अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस आ मधेशी महिला के उत्थान

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 २०७४ फाल्गुन २४, वीरगंज

भरत साह

पूर्व प्रधान-न्यायधीश सुशिला कार्की के मधेशी महिला सम्बन्धी टिप्पणी के बेसी दिन नैखे भैल। उनकर कहनाम रहे, “पतोह से घोघ तनवैले रहेके आ समावेशी समानुपातिक में नियुक्ति होखे के चाही कहेसे ना होई”। इ बात के लेके मधेशी विचारक आ नेपाली विचारक लोग में बहुत बड़का मतभेद लौकल रहे। निमन बेजाय कैसनको रहल होखे उनकर अभिव्यक्ति आपन आवरण में, लेकिन जवन मर्म रहे आ जवन बात उ बोलेके चाहत रहली उ                              यथार्थ ह हमनी के समाज के !

अभी भी अधिकांश, इहाँतक कि पढ़ल लिखल मधेशी महिला के सच्चाई इहे ह कि बियाह क लेला के बाद में ओह लोगके आपन पढ़ाई लिखाई के उप्योग करेके अवसर प्राप्त ना होला। इ समस्या बहुत हद तक देखल जाओ त मधेश में मध्यम वर्ग के सहि-छाप जैसन पहचान बन गैल बा। हमरे घर में हमर परिवार समेत दु गो भौजाई पढ़ल लिखल बाड़ी सन लेकिन ओह लोगके उ शिक्षा के कौनो इस्तेमाल नैखे होखे सकल।

वर्तमान के स्थिति

शादी के बाद स्थिल हो जाए वाला संस्कार से मधेश के सब वर्ग हालांकि पीड़ित नैखे। कुलिन वर्ग के महिला पाश्चात्य प्रभाव से कहल जाओ त या नेपाली प्रभाव से कहल जाओ त, ओह लोग में शिक्षा के उपयोग करेके संस्कार बैठ गैल बा। आपन स्व्यम् के व्यापार देखे से लेके विभिन्न तरेह के रोज़गार/राजनीति में पहुँच बनैले बाड़ी सन। आंकड़ा त हमनी के पास नैखे लेकिन अनुमान लगावल जा सकता अइसन महिला के संख्या बहुत कम बा।

मध्यम वर्ग के समस्या एक त शादी के बाद घर से बाहर के काम करबे ना करेके या करहुके मिलता त अपन आर्जन कइल शिक्षा से हटके दोसर क्षेत्र में या शैक्षिक स्तर से बहुत कम स्तर के रोज़गार आ खास करके दोकान सम्भाले वाला काम करेके मिलेला। जेकरा कथित रूप से “इज़्ज़त बचावे वाला काम” कहल जाला ! एकरा के ‘Underemployment’ कहल जाला, यानि कि कौनो व्यक्ति के योग्यता से बहुत निम्न स्तर में ओकर उप्योग करल ।

याद रहो इहाँ हमनी वर्ग के बात करत बानी सन, कौनो जाति विशेष के ना, काहेसेकि अब जाति आ वर्ग में कुछ अंतर आगैल बा पहिले के परतर में। “वर्ग” खास तौर पर आर्थिक हैसियत से सम्बन्धित ह, एकर जाति से लेना-देना नैखे।

उपरोक्त दुनु वर्ग से अलग, निम्न वर्ग के अवस्था कुछ भिन्न बा। आर्थिक तंगी इ वर्ग के पहचान होला। आ विशेष रूप से दैनिक बनिहारी पर आश्रित इ समूह के औरत लोग आ मरद लोग के पारिवारिक जिम्मेवारी में बेसी अंतर ना होला। मासिक बनिहारी केकरो मिलतो बा त मान के चली ४-५ हजार से बेसी ना। एह चलते घर के लगभग सब सदस्य बच्चे से काम पर लाग जालसन। मध्यम वर्ग के समस्या, जवना से सबसे बेसी महिला प्रभावित बाड़ी सन, उ “घूंघट” वाला समस्या एह वर्ग में नैखे। काहेसेकि यदि घोघ तानके बैठ जाए इ वर्ग के महिला त घर के भात-रोटी पर आफत हो जाई।

निम्न वर्ग महिला लक्षित योजना के आवश्यकता

निम्न वर्ग के महिला/लइकी के बन चुकल ‘Outgoing’ चरित्र के इस्तेमाल अगर कैल जाओ त समाज में सबसे बेसी नारी सशक्तिकरण के लाभ देखाई दे सकता। एह वर्ग के महिला लजाली सन ना, कौनो पुरूष के डर धम्की के परवाह भी ना रहेला । लेकिन सरकारी नीति इ वर्ग विशेष के लक्षित करके कौनो शिक्षा नीति लियैले नैखे जेसे “घूंघट-वर्ग” से अलगे रहल एह वर्ग के महिला सहज रूप से उत्थान कर सको आ सरकारी प्रावधान सब से एह समूह के लाभ मिल सको।

एह वर्ग के शिक्षा स्तर के उपर करे खातिर सबसे महत्वपूर्ण हो सकता रात्रि स्कूल। काहेसेकि दिनभर कमाए वाला एह वर्ग के छोट लइकी सबके फुर्सत भी ना होला कि स्कूल जाओ, अगर जैबो करी त मन लागी ना काहेकि आर्थिक आर्जन करेके भार निरंतर बनल रहेला एह लोग पर। रात्रि स्कूल में फ्री खाना के व्यवस्था करके जगह जगह ऐसन करल जाओ त हो सकता एह वर्ग के लाभ बहुत जल्दि मिली आ समाज में एकर असर बहुत प्रभावकारी होई।

मधेश के निम्न वर्ग प्रति लक्षित कार्य-योजना ना लियाके अन्य वर्ग के ही तरेह एकरा से बर्ताव कइल गैल त इ वर्ग बेसी से बेसी आर्थिक रूप से थोड़ा सबल होई आ मध्यम वर्ग के हिस्खा एह वर्ग में लाग जाई, आ पाटेवाला बेमारी जैसन “घूंघट-वर्ग” इहो हो जाई। इ वर्ग के महिला के खूबी ह कि इ वर्ग “घूंघट-वर्ग” नैखे, एकर जनसंख्या भी बहुतायत में बा, आ इ दुनु खूबी के अधिकतम इस्तेमाल करेके परल।

 

-लेखक साह समाजशास्त्री बानी।

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