अपना मन के मत मारी, आपन माई भाषा में अपना मन के बात लिखी (विचार )

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धनंजय तिवारी

भोजपुरी में बहुत लोग में लिखे के इच्छा होला पर लिखे खातिर उ ज्ञान या शैली ना होला। या बहुत लोग के पास इ भईला के बादो कॉन्फिडेंस ना होला औरी उ लोग सोचेला कि निमन ना लिखेब त लोग हसी उड़ाई। महत्व ना दी। ऊपर से फेसबुक के लाइक कमेंट के चक्कर अईसन बा कि केहू लिखे के कोशिश भी करेला लेकिन ज्यादा लाइक कमेंट ना मिलला से निराश होके लिखल बंद क देला। भोजपुरी में त पढ़वायिया अइसही कम बाड़े। त भोजपुरी मे लोग बहुत जल्दी निराश होजाला ।

लेकिन हम कहेब कि निराश मत होखी। हम आपन ही उदाहरण देब। हम के पद्य के बारे में ज्यादा जानकरी नईखे। हम मात्रा, छंद रस अलंकार, रूपक, यमक, इ सब के बारे में कुछु ना जानेनी। इहे हाल गद्य के भी बा। गद्य के आभूषित करे वाला श्रींगार से हम अनजान बानी।

लेकिन तबो हम जवन मन में आवेला उ माई भाषा में लिखेनी। लाइक कमेंट ना मिलेला पर हमके लिख के संतुष्टि मिलेला औरी इहे संतुष्टि के वजह से हम बहुत जल्दी भोजपुरी में आपन सौवा कहानी पोस्ट करेब।
पद्य में भी करिब 50 गो रचना कईले होखेब।

यकीन मानी रौवा भी बहुत आराम से क सकेनी। दुनिया लोक जहाँ के लाज औरी परवाह छोड़ी औरी अपना माई भाषा में अपना मन के बात लिख दी।

लाइक कमेंट के परवाह मत करी काहे कि अईजा माई बहिन के गारी लिखे वाला भी 1000 लाइक पावे ले त मस्तराम टाइप के घटिया साहित्य लिखे वाला भी ५०० कमेंट पावेला।
त इ कुल के छोड़ी के अपना माई भाषा में अपना मन के बात लिखी।
जय भोजपुरी।

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