अलग अलग प्याथोलोजी ल्याब के अलग अलग रिपोर्ट काहे आवेला ?

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रोग के सही पहचान करे ख़ातिर डाक्टर अनेकन किसिम के प्रयोगशाला अउरी रेडिओलोजी के जाँच करावेलन । ओसे आइल रिपोर्ट के आधार पर ही रोग के उपचार होखेला । रोग के सही पहचान ख़ातिर विश्वास करे लायक प्रयोगशाला के रिपोर्ट चहेला, माकिर हमनी के देश में प्रयोगशाला पिछे अलग अलग रिपोर्ट के घटना बारम्बार अइला से आम आदमी अभियो प्याथोलोजी के रिपोर्ट पर पूरा पूरा विश्वास ना कर सकेले । त आखिर काहे आवेला अलग अलग रिपोर्ट ? जन जन के इहे प्रश्न बा ।

एकर जवाब खोजे ख़ातिर रोगी के खून भा दोसर नमूना देवे बेर के अवस्था से लेके प्रयोगशाला के स्तर आ ओमें प्रयोग होखेवाला रसायन मात्र ना होके दक्ष जनशक्ति के बारे में भी चर्चा कईल जरूरी बा ।

१. रोगी के अवस्था आ उनकर आशन के चलते होखे वाला गड़बड़ी

– प्रयोगशाला में जाँच करे से पहिले नमूना लेवे बेर के रोगी के सही अवस्था के बारे में जानकारी लेहल बहुत जरूरी बा आ नमूना लेवे के विधि आ ओकर तरीका भी ओतने जरूरी बा । रोगी के अवस्था से होखे वाला गड़बड़ ल्याब रिपोर्ट के उदाहरण कुछ अइसन बा ।

क) रोगी के आसन

– खून लेवे बेर मरीज बेड पर सुतल बाड़न की कुर्सी पर बैठल बाड़न भा खड़ियाईल बाड़न, ई कुल अवस्था के चलते भी रिपोर्ट में फरक पर सकत बा । रोगी के खड़ियाईल अवस्था में खून में भइल प्रोटीन अउरी क्याल्सियम के मात्रा ४ से १५ प्रतिशत बढ़ल देखावेला ।

ख) रोगी के खानपिन

– रोगी के खान पिन के किसिम भा भूखे रहला के कारण भी खून के जाँच में फरक परेला । खून में रहल कोलेस्टेरोल अउरी ट्राइग्लिसेराइड के जाँच करे ख़ातिर रोगी के १२-१४ घण्टा भूखे रहेके परेला । ई जाँच खाना खइला के बाद तुरुन्ते कइला पर रिपोर्ट बेसि देखाई देला । ओइसेही बहुत जादा प्रोटीनयुक्त खाना जइसे की मास (मीट) खइला के बिहान (१ दिन बाद) भी खून में रहल यूरिया के मात्रा बेसि आवे के साथे पैख़ाना पर कईल जाएवाला ‘अकल्ट ब्लड टेस्ट’ भी अस्वभाविक रूप से पॉज़िटिव देखावे ला ।

ग) मदिरा/दारू पान

मदिरा (दारू) पियल के बखत खून में रहल सुगर के मात्रा बढला के साथे लिवर इन्जाइम अउरी ट्राइग्लेसराइड भी बढ़ सकेला ।

घ) धूम्रपान

धूम्रपान सेवन से खून में रहल सुगर, कोर्टिसोल, कोलेस्टेरोल, क्याटेकोलामाइन, युरिया अउरी ट्राइग्लेसराइड के मात्र में भी वृद्धि होला ।

ङ) स्ट्रेस

रोगी के बहुते चिन्तित अउरी स्ट्रेस में रहला के बखत भी खून के सुगर, कोर्टिसोल अउरी क्याटेकोलामाइन के मात्रा बढ़ जाला ।

च) जादा शारीरिक कसरत

बहोत लम्बा देर तक अगर शारीरिक व्यायाम कईला के अवस्था में भी खून में रहल क्रियाटिनिन, युरिक एसिड, लिभर इन्जाइम अउरी तरह तरह के हर्मोन के मात्रा बढ़ जाला ।

छ) उच्च हिमाली भेग के बसिन्दा

उच्च हिमाली एरिया में रहेवाला आदमी लोग के हेमोग्लोबिन अउरी रेड ब्लड सेल के मात्रा बहुति होला ।

ज) गर्भावस्था

जनानी (महिला) के गर्भावस्था में रहला के बखत भी पिसाब में सुगर देखल जाला माकिर एके साथे खून में रेड ब्लड सेल अउरी हेमोग्लोबिन के मात्रा घट जाला ।

झ) टर्निक्वेट के प्रयोग

खून संकलन करत बेर हात में टर्निक्वेट के प्रयोग कईल जाला माकिर क्याल्सियम के जाँच करत बेर टर्निक्वेट के प्रयोग ना करेके चाहि । टर्निक्वेट के प्रयोग कईला से क्याल्सियम के मात्रा बढ़ जाला ।

ई अनेकन टेस्ट के नतीजा मरीज़ के शारीरिक भा मानसिक स्थिति के कारण रिपोर्ट के वैल्यू में होखेवाला गड़बड़ी के कुछ कारण भइल अब मरीज़ के इलाज़ करे ख़ातिर लेहल गइल नमूना (sample) के चेक-जाँच करेवाला प्रयोगशाला (ल्याब) के स्थिति पर भी ध्यान देहल जाव ।

२.  प्रयोगशाला के अवस्था

हरेक देश के चिकित्सा से जुडल प्रयोगशाला (pathology lab) के दर्ता आ निगरानी करे ख़ातिर आपन आपन स्वास्थ्य व्यवसायी परिषद् होला, उन्करे काम ह की देश में रहल प्रयोगशाला आ एकर प्रविधि अउरी स्तरीयता नियमित रूप से चेक-जाँच करत रहेके ।

मेंडिकल ल्याब टेक्नोलोजी में स्नातकोत्तर के विशेषज्ञ, स्नातक तह के मेंडिकल ल्याब टेक्नोलोजिस्ट अउरी प्रमाणपत्र तह के ल्याब टेक्निसियन के रूपमा दर्ता कईल जाला । सामान्यतः चिकित्सा प्रयोगशाला अन्तर्गत क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्री, मेंडिकल माइक्रोबायोलोजी, हिमाटोलोजी अउरी हिस्टोप्याथोलोजी विषय में स्नातकोत्तर तह पढाइ होला । हरेक प्याथोलोजी ल्याब में कम्ती में एगो मेंडिकल ल्याब टेक्निोलोजिस्ट अउरी एगो प्याथोलोजिस्ट होखेके चाहि ।

वर्तमान परिपेक्ष में जाहाँ नयाँ नयाँ ब्याक्टोरिया भा भाइरस के पहचान भइला से भयानक रोग सब के भी सही पहचान आ व्यस्थापन अउरी चुनौतीपूर्ण होत जा रहल बा । देश में व्यक्तिगत सरसफाइ, स्वस्थ खाना तथा साफा पानी के अभाव में अनेकन संक्रमण के संभावना बढ़त जा रहल बा ।

स्वास्थ्य सेवा प्रभावकारी बनावे ख़ातिर रोग पत्ता लगावे वाला प्याथोलोजी ल्याब बहुति संख्या में खुलल अस्वाभाविक नईखे । माकिर, परिमाण से जादे गुणस्तरीय ल्याब मात्र सञ्चालन करे देवे ख़ातिर संबन्धित संस्था पहिलही से सचेत रहल बहोत जरूरी बा । स्तरीय अउरी परिणाममुखी प्रयोगशाला मात्र सञ्चालन करे ख़ातिर आवश्यक ज्ञान, प्रविधि तथा विशेषज्ञ प्राविधिक के पदपूर्ति कईल ल्याब सञ्चालक के ख़ातिर इ अनिवार्य सर्त होखेके चाही ।

देश में कुकुर मूत्ता जैसन प्याथोलोजी ल्याब खुलल बाड़ी सन माकिर अधिकांश ल्याब केवनो विशेषज्ञ के निगरानी में ना रहल देखल जाला । कम पुँजी लगानी करके जादा से जादा प्रयोगशाला परीक्षण कईसे कर सकल जाई खाली एकरे होडबाजी से आमजनता पर बहुते मार परल बा ।

प्रयोगशाला में प्रयोग होखे वाला उपकरण, केमिकल से लेके दक्ष प्रयोशालाकर्मी के नियमित निगरानी ना भइला से ल्याब के रिपोर्ट के विश्वसनीयता आ सही रिपोर्ट के अभाव बढ़त जा रहल बा । एगो प्रयोगशालाविज्ञ बहुते प्याथोलोजी ल्याब में काम कईला से भा दिन रात आराम बिना लागातार काम कईला से भी रिपोर्ट के स्तर गिरेला । जाँचकरे वाला प्रविधि अउरी तरीका में भी प्याथोलोजी ल्याब के रिपोर्ट में एक रूपता नईखे जेकरा चलते प्रयोगशाला पीछे फरक रिपोर्ट आ जाला ।

३. स्तरीय प्रयोगशाला रिपोर्ट के समाधान

क) अन्तर्राष्ट्रिय मापदण्ड मुताबिक सब प्रयोगशाला में जाँच होखे वाला एके प्रविधि अउरी तरिका लागू होखो ।
ख) हरेक प्रयोगशाला में परीक्षण बाद नतीजा लिखे वाला यूनिट एके किसिम के लागू होखों ।
ग) प्रयोगशाला के नीति निर्माण कर के सरकारी स्तर से ही कडाइ साथ ओकर पालन होखों ।
घ) प्रयोगशाला में चाहेवाला दक्ष जनशक्ति के भर्ती मात्र ना होके वोह लोग के हरेक किसिम के प्रयोगशाला के नमुना जाँच ख़ातिर आवश्यक तालिम देवे के ब्यावस्था भी होखो।
ङ) खून चाहे दोसर किसिम के नमुना संकलन करे से पहिले रोगी के खानपिन से लेके शारीरिक अवस्था सम्बन्धी जानकारी लेहल अनिवार्य कईल जाव जेकर कड़ाई के साथ पालन होखों ।
च) प्रयोगशाला में प्रयोग होखे वाला केमिकल के मापदण्ड सरकारी निकाय से ही तोकल जाए ।
छ) प्रयोशाला में काम करेवाला स्वास्थ्यकर्मी के दर्ता अउरी उनकर दक्षता प्रमाणित करेवाला परिषद् से नियमित रूप में अनुगमन होखों अउरी मापदण्ड ना पुगल संस्था तथा व्यक्ति के कारवाही होखों ।
(ज) संबन्धित निकाय से ही प्रयोगशाला के गुणस्तर आ काम कर रहल जनशक्ति के आधार पर वर्गीकृत करके सर्वसाधारण के सूचना प्रदान कइल जाव ।

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