आजु के भोजपुरी गीत–संगीत के अवस्था पर एक नजर आ कईसे होई सुधार पर विचार

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-संजय संयोग

मानव सभ्यता के शुरुवात के सँगे ही गीत सग्ीत के शुरुवात भइल बात के पुष्टि हमनी के इतिहास बता रहल बा । काहे कि मानव जाति के ही ना ई पृथ्वि पर रहेवाला हरेक जीव–जानवर के संगीत से लगाव रहेला, जइसे सपेरा लोग बिन बजा के कइसनो जहरिला साँप के अपना बस में कर लेवेला लोग काहे कि ऊ बिन से निकलल संगीत में साँप एतना ना मस्त हो जाला कि ओकरा खुद के थाहे ना लागेला कि ऊ कहाँ जाता आ केकरा हात में पड़ जाता मान्यता बा । एसे ई बात साबित कर देता कि संगीत जे बा ऊ सब के अच्छा लागेला, आपन दुःख दर्द भुलावे के शक्ति देवेला ।

अब आजु के गीत संगीत के देखल जाँव त आ एसे कुछ दिन पछे तनि घुम के देखल जाँव त का कुछ अंतर आवता ? जइसे भोजपुरी के आदिकवि कवीर जी महाराज के कइल गइल भाजपुरी रचना देखल जाँव त ओकर जोड़ नइखे । सब सार्थक शब्द, शुद्धता बेमिशाल जवना के चलते ऊ युगो युग तकले आपन स्थान बरकरार रखले रही ।काहेकि ऊ रचनन सुनला पर जिनगी के यथार्थ बात सब अयनक में आपन चेहरा देखला जइसन लागेला कि वास्तव में हमनी के जीनगी का ह, आ हमनी का करतानीसँ ई बात सब केहु के समझ में आ जाला ।

ओहितरे स्व. भिखारी ठाकुर जी के कइल गइल भोजपुरी रचना सब हमनी खातिर पुज्नीय आ मार्ग दर्शक के रुप में लेहल जा सकेला, काहेकि ई सब केहु भोजपुरी भाषा के मर्यादा के ध्यान में राखत ही कवनो रचना कइले बा लोग जवना से हमनी के भोजपुरिया घर समाज पर केहु कवनो बात लेके अँगुरी ना उठाओ लोग,जवना के चल्ते आज भी ओह लोग के सभे आदर आ सम्मान के नजर से देख रहल बा लोग आ समय–समय पर सम्मान भी दे रहल बा लोग । ओहि तरे ई भाषा के संरक्षण आ विकास खातिर जे भी आइल आपन–आपन जन–जन तकले पहुँचइलख, जवना के चल्ते ओह लोग के रचना एगो घर में बइठ के बाप, बेटा, मतारी, बेटी, पतोह सब लोग सुने भा देखे काहेकि ऊ सुने आ देखे में कवनो कहिसे तनको अपशब्द भा अभद्र दृश्य के जगह ना राखल जाए ओहिसे रचनाकार, गायक आ संगीतकार भा निर्देशक सब केहु बधाई के पात्र मानल जाए लोग ।

अब कुछ हमनी के वर्तमान के गीत–संगीत देखल जाँव त साफ जमिन आशमान के जइसन फरक देखल जा सकता । का ई अइसन काहे हो रहल बा ? का ई आधुनिक युग के देन ह ? का एकरे के आधुनिकिकरण कहल जाला ? जवना में कवनो रोक टोक ना होला, केकरो से केकरो लाज सरम ना होला । ई सब त पश्चिमी सभ्यता में होखेला जहवाँ ना त बाप महतारी के कवनो जगह बा ना भाई भउजाई के आ ना त मरद मेहरारु में मेल बा, बाकिर हमनी के धरती पर त श्रवण कुमार जइसन बेटा, लक्ष्मण जइसन भाई, सिता जइसन पत्नी के ई पावन धरती पर भाषा के जान लेवे वाला, भोजपुरी के बदनाम करेवाला, सब भाषा के सामने भोजपुरी के सर्मनाक करेवाला, आपन भाषा संस्कृति के अस्तित्व समाप्त करेवाला अइसन भस्मासुर कहाँ से जनम गइल बाड़सँ जवन अइसन अपशब्द के प्रयोग कके अपना के गीतकार कहातारसँ ।

आरे गीत त ऊ साधना ह जवना के सुन के राह भटकल लोग अपना सही राह पकड़ ली, दुःख गम में डुबल लोग, दुःख गम भुला के आप सुख भरल जीनगी जीए लागी । गीत–संगीत कवनो दवा से कम ना ह, गीतकार आ चाहे कवि के काम ह अपना भाषा के शुद्ध रुप से ओकर अवना रचना के माध्यम से संरक्षण करीं आ आवेवाला पुस्ता में आपन विरासत सउप दीं जे अब ओकरा के ऊ संरक्षण आ संवर्धन कर के ले चले । बाकिर हमनीए आपना भाषा, संस्कृति, संस्कार के तहस–नहस कर के अपना आवेवाला संतती के देहल जाई त ऊ का ओकर संरक्षण करी ? कुछ हमनी ओरवा देनीसँ बाकि रही त ऊ ओरवा दी तब दोसराके सहारे जीए के आदी होखे के पड़ी । एहिसे आजु से ना अभि से हमनी जे जहाँ से होखे जइसे होखे आपन मातृभाषा के जोगावे के तरफ लागल जाँव काहेकि हमनी के ई भाषा सिमित नइखे असँख्य जगह आ असँख्य लोग के ई भाषा ह । एसे कुछ लोग अगर एकरा के बदनाम करे पर लागल बा त हमनी सभे भोजपुरिया मिल के ओकरा के सवक सिखावल जाँव जे आगे चल के केहुँ अइसन ना कर सको ।

एकरा खातिर हमनी के केहु से झगड़ा तकरार नइखे करेके, खाली एगो अपने जगह से काम कइला से ही हमनी सफल हो जाइल जाई त एमे आनाकानी कथि के ? ऊ का त हमनी फुहर, अश्लील, गीत सुनल देखल छोड़ देहल जाँव, यदि ओइसन गीत हमनी गाँव समाज, रेडियो, टेलिभिजन पर अगर बाजता त ओकरा पर प्रतिबन्ध लगावल जाँव, ऊ रेडियो सुनल, ऊ टेलिभिजन देखल छोड़ देहल जाँव, जवना के चल्ते हमनी के सर समाज लज्जित हो जातानीसँ । तब जाके ओह रचनाकार, गयक, आ लगानीकर्ता के जब सब केहु चारु ओर से ठुकराई, जब ओकर लुटिया डुबाई तब जाके ओकरा बुझाई कि हम का कर देले बानी ।

अइसन फुहर गीत सुन के हसी मजाक जइसन लेहला के नतिजा ह कि आज जे केहु गीतकार चाहे गायक होता ऊ चाहता कि हमु ओही तरे के गीत लिख के रातो रात भोजपुरी में आपन अस्तित्व जमा लीं । ओहिसे हम सम्पूर्ण भोजपुरी रचनाकार, भोजपुरी के संरक्षण ला बनल संघ–संस्था, स्थानीय आ स्थानीय भोजपुरी भाषी लोग से आग्रह बा कि अभिनो से भोजपुरी गीत के सुधार खातिर अगाडि बढ़ी लगिन जवना के चल्ते कवनो घर परिवा, सरसमाज एक सँगे बइठ के भोजपुरी गीत के आनन्द ले सको आ केकरो ई सुन के भा देख के सरम ना लागो । अइसन माहौल तइयार कइल जाई निहोरा के साथे अशरा लगवले बानी ।

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