वीरगंज के सफल प्रेमिल जोडी कहले –‘अन्तरजातीय विवाह मे बहोत दिक्कत होला’

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वीरगंज,२५ फागुन

विश्वभर हाल ही मे ‘भ्यालेन्टाइन डे’ मनावल गइल रहे । नेपाल मे भी आईल ई पर्व जादा वर्ष भईल नईखे । मधेस मे त भल कुछ वर्ष मात्र भईल बा । ५ वर्ष एने आके भ्यालेन्टाइन डे के चर्चा मधेस मे भी तेजी आईल बा । समाजिक सञ्जाल मे क्रान्ति आईल संघे पश्चिमी सभ्यता के ई फेस्टीभल भारत अउरी नेपाल मे ढुकल हवे । धीरे धीरे मधेस के शहर मे भी येकर रौनक देखल जाता । पसल सब मे प्रेम बेचल जैसन लागत बा । १४ फ्रेबुअरी के आजकल प्रणय दिवस के रुप मे युवा लोग मनावत बाड़े ।

युवायुवती लोग आपन प्रिय साथी के प्रेम जाहेर करत एक दूसरा के नज़दिक आवेवाला दिवस हवे,प्रणय दिवस । भ्यालेन्टाइन विकेन्ड मे रोजडे,प्रपोजडे,चकलेटडे,टेडीडे,प्रोमिशडे,हगडे अउरी अन्तिम दिन भ्यालेन्टाइनडे मनावल जाला । बाक़िर मधेसी समाज आज भी पुरातन सोच आ परम्परा मे जकड़ के रह गइल महसुस होला । दुनिया के आउर समाज सरह स्वतन्त्र आ खुल्ला पन नईखे ईहा के समाज मे,जानकार लोग बतावेले ।

आज लभ म्यारेज बिहान ब्रेकअप भी ओहितरे हो रहल बा । ई सचो के एक चिन्ता के विषय हो गईल बा । मिनाक्षी आपन कल्चर आ समुदाय मे ही वैवाहिक सम्बन्ध स्थापना करेके धारणा राखत बाड़ी । अन्तरजातीय विवाह मे बहुते दिक्कत आवेला उनकर भोगाई रहल बा ।

मधेसी समाज मे बेटा लोग द्वारा कईल भगुवा विवाह के मान्यता बा माकिर बेटी द्वारा कईल भगुवा विवाह के गलत हर्कत कहके नाकर देहल जाला ।बालविवाह,दहेज प्रथा अउरी अभिभावक के ही सबकुछ मानल जाएवाला मधेसी समाज मे वीरगंज के एक सफल प्रेमिल जोडी बहुते संघर्ष भोगल कथा मिलल रहे ।

वीरगंज मे मिनाक्षी गुप्ता कर्माचार्या अउरी रानीघाट के शिव गुप्ता सक्सेसफुल प्रेमिल जोडी कहके चिंहल जाला । मिनाक्षी अउरी शिव स्कूल व्यवसाय से लेके समाजिक सेवा मे भी ओतने खटल जोड़ी हवे । बाक़िर ओह लोग के बितल क्षण के देखला पर बहुते पीडादायी लागेला । ओह लोग के मेहिनेत के अगाडि सब कोई के मूरी निहुराए के परल ।

रानीघाट मे रहल जीवन ज्योती बोर्डिग स्कूल के प्रिन्सिपल शिव हवन त मिनाक्षी स्कूल के प्रोप्राइट हई । मिनाक्षी वीरगंज के बेटी हई, उ भी पहाडी समुदाय के । मुर्ली चोक मे बाबु कृष्णसागर कर्माचार्य अउरी मोना देवी कर्माचार्य के यामाहा के सो रुम रहल परिवार से उनकर सम्बन्ध बा । कर्माचार्य परिवार के बड्की सन्तान मिनाक्षी प्रेम विवाह कर के शिव संघे जीवन जोडले रहली । ओने, शिव मधेसी समुदाय से सम्बन्ध राखेलन ।

मीनाक्षी- शिव के जोड़ी युवा समय के ।

मिनाक्षी आ शिव के जन्म सन १९७४ के हाराहारी मे वीरगंज के गलियारान मे भईल रहे । मिनाक्षी माध्यमिक शिक्षा खातिर दार्जिलिग के कालिगपुग गइली त शिव दार्जिलिग के ही कार्सिग मे अध्ययन करत रहले । माध्यमिक शिक्षा हासिल कर के ओह लोग वीरगंज आईल लोग। ओह बेर तकले उ लोग के आपस मे चिनजान ना रहे ।

उ लोग के पहिलका भेट उ बेर भइल जब प्रविणताप्रमाण तह खातिर उ लोग आइए मे वीरगंज के ठाकुरराम बहुमुखी क्यम्पस मे भर्ना भईले । धीरे धीरे नजदिकी बढ़े लागल । बाहर से पढ़ के आईल विद्यार्थी भईला के करते होई ओह लोग के सोच वीरगंज आसपास के विद्यार्थी संघे जादा ना मिलत रहे । २०४५ साल ओर उ दुनु जने इन्टरमिडिएट शिक्षा खतम कर लेले रहे लोग । इन्टर के पढाई खतम होत बेर शिव के आपन प्रेम विवाह करे के पहिलका हिम्मत आईल मिनाक्षी बतवली ।

उ लोग अभिभावक के मर्जी बेगर मनकामना मे जाके विवाह कइले रहे लोग । विवाह करके वीरगंज लवटत बेर मिनाक्षी के परिवार एतना खिसियाईल रहे की १२ वर्ष तक अपने बेटी के आपन घर मे ढुके ना देले रहे लोग ।

पहाडी समाज के खुल्ला वातावरण मे बढ़ल मिनाक्षी मधेसी समाज मे घूँघट ओढके जीवन के निरन्तरता देवे लागली । विवाह त भईल बकीर जीवन खालि विवाह ना हवे ई बात ओह बेर पता ना रहे उ सुनवली । घरपरिवार कइसे चलावल जाई एमे लाग गइले शिव आ मिनाक्षी के जोडी ।

शुरू शुरू मे घरपरिवार मे बहुते संघर्ष करे के पडल रहे उ लोग बतवले, ‘कबो हम बात के बिगारी त कबो शिव जी,’मिनाक्षी कहली,‘मधेसी समाज के बेटी लोग के बाहर काम करे जाए वाला चलन ना रहे,बाक़िर हम घुघट ओढ़ के ४ वर्ष दन्तमन्जन के काम करके परिवार के सहायता कइले रहनी ।’ सोचल जईसन जीवन ना रहे ओह बेर ।

ओकर बाद २०४८ साल मे लक्षुमनवा नियरे राधा मेमोरियल बोर्डिग स्कूल खुलल रहे । ओमे शिक्षिका के रुप मे काम करे लागली मिनाक्षी । डेढ वर्ष काम कईला के बाद स्टोभ्स ब्लास्ट होके मिनाक्षी के आधा शरीर जर गईल । उ क्षण याद कईल मात्र से सहम जाली ऊ । मिनाक्षी के बेटा मात्र डेढ वर्ष के रहे, उ कहली ।

श्रीमान शिव निर्माण व्यवसायी होके नगरपालिका के ठेक्का पट्टा तर्फ आगा बढले । मिनाक्षी के महिने पिच्छे तलब आवत रहे त शिव के एके बेर वर्ष के अन्तिम ओरिया । ओह बेर बोर्डिक स्कूल मे महिना दिन पढ़ावला पर पहिलका तलब ३ सय रुपिया मिलल के पल उनकर दिमाग आजूओ ताजे बा । बाद मे ज्ञानोदय मावि,हिमालय मावि,लिटर एन्जल होत खुद के स्कूल खोल लेहली । जीवन के संघर्ष के दिन आ दुख दरद धीरे धीरे बिलात गईल ।

७ वर्ष से भवन ‘भाडा मे लेके वीरगंज के ही एक पहिचान हासिल कर चुकल विद्यालय चला रहल बा लोग । पहिले से अभिन बहोत बढ़िया कर रहल बानी सन,टिचर के तलब समय पर ही दे सकल बानी,स्कूल के भाडा तीरे सकल बानी,अच्छा से रहे खाए के मिलत बा,मिनाक्षी कहली,‘समाज से लहले बानी सन त समाज पर ही खर्च भी कर रहल बानी सन ।’ सायद ओह बेर उ लोग के गार्डियन लोग ओह बात बुझले रहित लोग त भाग के शादी करे के बाध्यता ना आईल रहित ।

आज के अभिभावक लोग पहिले के तुलना मे बहुते समझदार बा लोग । आपन बालबच्चा के भविष्य आ भावना के कदर भी करे ला लोग । केहु केहु न्यारो माइन्डेड अभिनों बा । समय रहते सचेत रहे के परी । बेटाबेटि के सम्मान देवेके चाही अउरी दोस्त जैसन व्यवहार करके लालन पालन करे के चाही। अईसन कईला से उ लोग से भी घरपरिवार खातिर अच्छा सोच पनपी बात प्रमिल जोडी शिव–मिनाक्षी बतावत बाड़े । प्रेम आज के समय मे भी परिवर्तित स्वरुप धारण कइले बा ।आज लभ म्यारेज बिहान ब्रेकअप भी ओहितरे हो रहल बा । ई सचो के एक चिन्ता के विषय हो गईल बा । मिनाक्षी के अन्तरजातीय विवाह के जईसे मान्यता देहल गईल रहे,ओइसे ना होखे के चाही । उ आपन कल्चर आ समुदाय मे ही वैवाहिक सम्बन्ध स्थापना करे के धारणा राखत बाड़ी । अन्तरजातीय विवाह मे बहुते दिक्कत आवे ला उनकर भोगाई रहल बा ।

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