The biggest Bhojpuri digital media of Nepal

आलोचक के तर्क – नागरिकता विधेयक मे महिलन के राज्यविहीन बानवे के प्रयास

काठमाण्डू, ११ आषाढ़ ।

२०७५ सावन २२ गते से बिचराधीन रहल नागरिकता एन २०६३ के संशोधन करे के बनल बिधेयक के संसद राज्य सभा व्यवस्था तथा सुशासन समिति एतवार के दिने पारित कर के प्रतिनिधिसभा मे पाहुचा देहले बा । विधेयक के समर्थन आ विरोध मे जनता बांटागइल बा ।

विधेयक मे व्यवस्था कईल नेपाली पुरुष से वैवाहिक सम्बंध कायम करेवाला विदेशी महिला अंगीकृत नागरिकता लेवे खातिर नेपाल मे लगातार ७ साल तक स्थायी रूप से रहला के बाद ही देवे के प्रावधान के विरोध आ समर्थन मे जनमत बांटा गइल बा ।

यी विधेयक के विपक्ष मे रहल लोग के तर्क बा की फेरु महिला के दास बनावे के आ उ लोग के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक अधिकार से वंचित करे खातिर अइसन विधेयक लियावल गईल बा । पक्ष मे रहल लोग के तर्क बा की यी विधेयक से कोई उपर कवनों किसिम के विभेद नईखे कईल गईल, बल्कि राष्ट्रियता के मजबूत बनावल गईल बा ।

नेकपा के सांसद बृजेशकुमार गुप्ता यी विधेयक के विरोध मे देखाई देहले । गुप्ता विधेयक के प्रावधान के गैर संवैधानिक बतवले । संविधान के दफा ११ मे विवाह कईल विदेशी महिला आपन इच्छा अनुसार जब चाहि तब नागरिकता लेवे सकी प्रावधान रहल बा बतावत गुप्ता कहले, ‘ संविधान के हिसाब से अंगीकृत नागरिकता देवे के प्रावधान के विधेयक उल्टा आइल बा ।

अब वैवाहिक अंगीकृत नागरिकता विधेयक के ठीक कर के नागरिकता एन २०६३ के हिसाब से ही करे के चाहि गुप्ता के कहनाम रहल ।

संशोधित प्रावधान के हिसाब से नेपाली पुरुष से विवाह कर के आइल विदेशी महिला सात साल तक मतदान से ले के नोकरी तक के अधिकार से बंचित हो जाई । विवाह करे के अधिकार सब कोई के होखेला पर विधेयक त विवाह पर ही बंदेज लगा रहल बा, ‘ सांसद गुप्ता कहलन, अइसन विधेयक लियावल सरकार के गैरजिम्मेवारी आ सनकी कदम बा ।

सांसद गुप्ता के प्रश्न बा, ‘ नागरिकता सम्बन्धी कानून बनल २०१९ से यी ५७ साल मे कइसन राष्ट्रघात भइल बा, कहे के पडल । ना त पहिले के हिसाब से ही नागरिकता विधेयक आवे के पडल । ओइसे ही जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) के सांसद लक्ष्मणलाल कर्ण सरकार पत्नी, पतोह आ भौजाई लोग के दास बनावे के लागल बा क़हत आरोप लगवले ।

यी विधेयक महिला के विचारविहीन आ अधिकारविहीन बना रहल बा । नेपाली आपन पत्नी के रूप मे स्वीकार कर के ले आइल के साथे अइसन ब्यवहार कइसे कईल जा सकता ? सांसद कर्ण कहले, सिवान पार विवाह करे वाला मधेस, झापा, इलाम आ दार्चुला समेत के जिल्ला के नागरिक के संस्कृति आ संस्कार उपर आक्रमण कईल जा रहल बा ।

मधेसी के भारतीय समझ के अइसन अन्याय हो रहल सांसद कर्ण के दाबी रहल बा । यी विधेयक फेरु मधेसी नागरिक के दुसरका दर्जा के नागरिक बनाई, उ कहले, ‘ यदि एगो नागरिक सात साल बाद कइसे राष्ट्रीयबादी हो जाई ?

यदि अंगीकृत नागरिकता वितरण कईल करे के बा त दोसर भी एन संशोधन कर के भारत के जइसन ही नागरिकता के जइसन दोसर परिचयपत्र जारी कईल जाव कर्ण के कहनाम रहे ।

जसपा यी विधेयक विरोध करत बुध के दिने ही सड़क संघर्ष के घोषणा कइले बा । यी विधेयक के हिसाब से विवाह के बाद जन्मेवाला संतान के भी नागरिकता मिले मे कठिनाई होई बिपक्षी दल के नेता लोग के तर्क रहल बा ।

नेपाली कांग्रेस के सांसद मीन विश्वकर्मा के कहनाम, ‘ कवनों भी आदमी सात साल तक खराब रही आ सात साल बाद ठीक हो जाई यी कवन तर्क ह ?? यी प्रावधान लैंगिक विभेद देश मे लियाई ।

विश्वकर्मा कहले, ‘ नेपाल के संबिधान के धारा १८ समानता के हक देहले बा । एक ओर समाजवादउन्मुख क़हत संविधान मे लिखल बा त दोसर ओर अपने देश भीतर अनागरिक जनमावल जा रहल बा ।

भारत मे भी नागरिकता देवे खातिर सात साल इंतिज़ार करे के व्यवस्था बा ?? प्रश्न पर विश्वकर्मा कहले, ‘ हमनी कवनों देश के नागरिकता देखला से बढ़िया आपन देश के नागरिक के न्याय होखे के हिसाब से कानून बनावल जाव । भारत मे आधारकार्ड, राशन कार्ड समेत अनेकन कार्ड जारी भइल बा । हमनी यीहा त पीआर के भी प्रावधान नईखे ।

यी विधेयक विदेशी पतोह ही खाली ना उ लोग से जन्मेवाला सन्तान के शिक्षा, दीक्षा आ समपती के अधिकार मे भी बहुत बड़का असर करी विश्वकर्मा बतलवे । यी विधेयक मे बहुते व्यावहारिक उलझन बा कहले । स्कूल जन्मदर्ता खोजेला पर जन्मदर्ता खातिर नागरिकता के जरूरी पडेला बतवले । काही बीच मे मतारी के मृत्यु हो जाई त उ बच्चा के नागरिकता कइसे बनी ??

यी विधेयक सिवान आ नक्शा जइसन ही राष्ट्रीय महत्व के बिषय भइला से सर्वदलित सहमति मे निर्णय कईल उचित रही उनकर कहनाम रहल । बइठ का बतकही कईला पर सत्तापक्ष के कुछ अड़ान रहित आ प्रतिपक्ष के कुछ रहित पर उ कहले, ‘ सरकार त एकरा बारे मे बाते करे के ना चहलख ।

यी विधेयक मानोवैज्ञानिक त्रास सृजना कइले बा प्रदेश २ के मुख्य न्यायधिवक्ता दीपेन्द्र झा बतवले । अंतराष्ट्रीय कानून कोई भी कोई के राज्यविहीन बना के नईखे राख़ सकत कहले बा, झा जानकारी देहले । यी विधेयक सदियो से आइल सिवान आरिपारी के सम्बंध के अन्त कर रहल बा ।

प्रतिकृया
Loading...