बिना दहेज के एगो वियाह जहां कार मे आईल बरात आ हेलीकाप्टर मे भईल विदाई

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नवलपरासी, १४ बईशाख

साधारण आर्थिक अवस्था आ समाज मे शिक्षित कह के पहिचान बनवले एगो परिवार बेटी दामाद के खुशी खातिर हेलिकप्टर चार्टर कर के बारात बिदागरी कईलख ।

नवलपरासी, रुपन्देही आ कपिलबस्तु मे प्रेमचन्द्र गुप्ता नाम कहते सब कोई चीन्हेले । उ अपने भी किसान आन्दोलन के सामाजिक अभियन्ता हाऊवे । त्रिभुवन विश्वविद्यालय से एमएससी कईले गुप्ता के चार गो बेटी आ दु गो बेटा बाड़े लोग । स्नातकोतर दोसारका साल मे पढ़ रहल प्रेमचन्द्र के तिसरकी बेटी कान्ति के वियाह आज यीहा बहुते चर्चा के बिषय बनल बा । आपन तिसरका बेटी कान्ति के वियाह सुक के दिने रुपन्देही के लुम्बिनी संस्कृति नगरपालिका के चन्द्रकेश गुप्ता के संघे करवले बाड़े ।

तराई मे समान्यत : दहेज लेन देन के चलन लगभग पहिले जईसे ही बा माकिर बिना दहेज के भईल ई दु गो गुप्ता परिवार के वियाह यी पूरे क्षेत्र मे हलचल मचा दहले बा ।

चन्द्रकेश गुप्ता कार मे बारात ले के लईकी के दुवारा पहुचल रहले  पर दुलहिन ले के लौटे के बेरा श्री एयरलाईन्स के हेलिकप्टर मे  बिदागिरी करा के लावटले । दूल्हा के घर से २०० बरतिया बारात मे पहुचल रहले । चन्द्रकेश के शिक्षित ससुर प्रेमचन्द्र बेटी दामाद के सरप्राईज़ देवे खातिर बिदागरी खातिर हेलिकप्टर मंगईले रहले । लईका पक्ष के कुछों मांग ना रहे ओइसे बेटी दामाद के खुशी खातिर आ सरप्राईज़ खातिर हेलिकप्टर चार्टर कर के भेज देहनी, प्रेमचन्द्र बतवले । मधेस मे दहेज मांगे के चलन बा आ हमार दामाद अईसन कुछो के मांग ना कईले ओइसे सरप्राईज़ देवे खातिर बेटी दामाद के हेलिकप्टर मे बिदा कईनी ।

दूल्हा के मामा कृष्ण चन्द्र हेलिकप्टर चढ़े वाला दूल्हा के कौनो मांग ना भईला से आ ससुराली पक्ष से अईसन ब्यावस्था देख के आश्चर्य मे बाड़े कहले । पाँच गो सीट भईल हेलिकप्टर पर दूल्हा, दुल्हिन आ सहबोलिया बईठ के बारात बिदा भईल रहे । दूल्हा पक्ष से १५ गो गाड़ी मे बारात आईल रहे ।

प्रतापपुर गांवपालिका स्थित त्रिभुवन उच्च माध्यमिक बिधालय बेलाटारी के चऊर मे हेलिकप्टर उतरला पर देखे खातिर स्थानीय के भीड़ लागल रहे । लईकी पक्ष हेलिकप्टर चार्टर करे खातिर तीन लाख चालीस हजार रकम देहले रहे । गांव मे हार्डवेयर के दोकान संचालन कईले चन्द्रकेश वियाह खातिर एक महिना पहिले ही कार किनले रहले आ दहेज खातिर आपन कौनो मांग ना रखले रहले बतवले । हमार कौनो मांग ना रहे अब हेलिकप्टर आगईला के बाद ना जाएम भी ना कह सकतानी हँसते उ कहले यी हमरा खातिर एगो नया अनुभव ह चन्द्रकेश कहले । कान्तिपुर

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