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काहाँ से मिलो दहि चिउराके नास्ता ??

काहाँ से मिलो दहि चिउराके नास्ता ??

– गोपाल कुमार यादव

गोपाल कुमार यादव

ना बा घर मे बियाँ ना बा खाद,
इ हो बरस भइनी हम बर्बाद,
बियाँ छिटे के बितता म्याद,
एसो के बरस होइ भुके हलाद,

ना लगे नहर ना परता पानी,
पानी बिना भइल बियाँ नोक्सानी,
काहा से पैसा लेके किनी दमकल,
रोजो इहे सोच के मियाज बमकल,

निमन खेत बनल सरकारी रास्ता,
कहाँ से मिलो दही चिउरा के नास्ता,
बाली से महङ्गा बा खेत के जोताइ,
ना जाने एसो धान कइसे रोपाइँ ,

सब काम मे दलाल; सब बा चोर,
कवनो दिवस मनाके ना होइ भोर,
केतना सुनी सरकार के ढिलाइ,
भुके गरिबके का कुछ अब सहाइ ,

लेखक – गोपाल कुमार यादव,
एम.बि.बि.एस, बि.पी.के.आइ.एच.एस धरान

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