का अपने यूरिक एसिड के जाँच करवले बानी ?

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का अपने यूरिक एसिड के जाँच करवले बानी ?

अमेरेश यादव

क दिनके बात ह । एगो मरिज आईल हमर ओ.पी. डी. मे, हातमे एगो प्लास्टिक ओराईल टबलेट के खोल रखले रहलन । हम पुछनि, ‘अपने के का समस्या बा बताई, ऊ मरिज आपन समस्या के बारेमे बिना कुछो बतईले सरा-सर दवाईके खोल बतावे लगलन । ‘तीन साल होगईल डाक्टर साहेब, पहिलका साल हई पियरका खोलवा वाला दवाईया से ठीक भईल, दोसरका साल पियरका ना काम कईलख त गावें के डाक्टर हई उजरका खोल वाला दवाईया देहलन । परु त उजरके से ठीक होगईल, बाकीर ई साल पियरका, उजरका आ ई करियाका तीनू खोल वाला खईला के बावजूद भी ना ठीक होता, हम बड़ि परेशान बानी डाक्टर साहेब । पहिले त खाली दुनु गोड़ के अंउठवे फूलल रहे, लाल होके दुखाए, बाक़िर ई साल अंउठवा आ दुनु गोड़ के घुटनवा फुल गईल बा, लाल होगईल बा आ दर्द से चलल नईखे जात । सँघे- सँघे केहुनियो आ पुरा देहओ दुखाता, का जानि का होगईल बा हमरा ?’

तब हम कहनि मत घरबराइं अपने के पहिलही आके चेक जाँच करावे के चहत रहलक, रउवा के गेठिया यानिकी बाथ रोग होगइल बा । ‘का अपने आपन यूरिक एसिड के जाँच करवले बानी ?” गेठिया ? यूरिक एसिड ?  ई का होला ? बाचम कि ना डाक्टर साहब ।‘ ऊ ऐतना क़हत क़हत मे पसिना-पसिना होगईलन । हम कहनी, ‘मत घरबराई चाचा, ई सधारण बेमारी होला, पहिले एकर जाँच कराई, दवाई खाएके पड़ि, खान-पान मे सवधानी अपनावे के पड़ी आ जीवन शैली बदले के पड़ी सब ठीक होजाई ।‘

बादमे रिपोट आईल त उनकर युरिक एसिड ९.३ एम.जी/डी.एल. (mg/dl) रहे । उनका के दवा, खान-पान के सावधानी आ जीवन शैली मे बदलाव कइसे लाइल जाई सिखनि आ बीच-बीच मे आके देखावत रहेम कहनी । भल कुछ दिन पहिले आइल रहलन कुछ खाएवाला हमरा खातिर सनेश लेके । आ कहत रहलन की अब त लागत बा डाक्टर बाबु हमार जवानी फेर से लवट के आ गईल । केनहु दर्द, फुलल कुछु नईखे । राउर बतावल मूताबिक खातानी, खान-पान मे ध्यान देले बानी आ रोज कसरत करेनी ।

ओह दिन बरी ख़ुशी लागल आ सोचनि कि जनचेतना के कमि से ई चाचा के जिन्दगी ही कष्ठकर होगई रहलख । अबकि बेर मौका मिलते ईहे बिषय के जनचेतना मूलक लेख हम लिखेम छपवएम ताकि केहु के जिन्दगी युरिक एसिड के चलते कष्टकर ना होखो । आजु प्रस्तुत बा अपने लोग के सामने ई युरिक एसिड वाला गेठिया ( बाथ रोग ) के जनचेतना मूलक जनकारी :

युरिक एसिड का ह?

युरिक एसिड हमनि के शरीर मे मिले वाला एक किसिम के रसायन ह । ई सब केहु के शरीरमे रहेला । एकर निर्माण हमनि के शरीर मे रहल तन्तु आ खान पिन मे पावे वाला पिउरिन (एक किसिम के प्रोटिन) के टुकरला से होला । समान्यत: युरिक एसिड हमनि के खुन मे घुलनसिल होला आ एकरा के हमनिके किडनी बिकार के रूपमे पिसाब से बाहर कर देवेला ।

बाक़िर कवनो कारण बस जईसे शरीर मे एकर जादा निर्माण होनाई, किडनी एके पिसाब के माध्यम से बाहर निकाले मे असक्षम होनाई अथवा खाना मे ज्यादा ही प्रोटीन(पिउरिन) वाला समान खा लेनाई । जब युरिक एसिडके मात्रा खुन मे बढ जाला तब कवनो जरूरी नईखे कि सबमे बाक़िर अधिकांस मे युरिक एसिड के कनिका के जमवरा जोर्नी मे होखे लागेला आ ओकर बाद युरिक एसिडवाला गेठिया (बाथ) आदमि मे होजाला ।

गेठिया (बाथ) रोग का ह?

हड्डी, जोर्नी, नश आ मांसपेशी मे दर्द करावेवाला रोग के गेठिया चाहे बाथ रोग कहल जाला । एकर सयकड़ो किसिम होला जवना मे के एगो किसिम ह युरिक एसिडवाला गेठिया (बाथ) । एके पहिले-पहिले राजवा रोग अथवा धनिक के रोग भि कहे लोग ।

युरिक एसिडवाला गेठिया (बाथ) होखे के कारण सब कथि -कथि ह ?

प्रमुख कारण सब :

  •  बंसानुगत
  • महिला के तुलना मे पुरुष मे जादा होला
  • मोटापन
  • शराब (बियर) के जादे सेवन
  • ज्यादा प्रोटिन (पिउरिन) वाला खानाके प्रयोग
  • इन्जाईम मे खराबी
  • किडनीमे खराबि आ प्रत्यारोपन
  • लिड नामक रसायन से साट-घाट
  • नियासिन नामक भिटामिन के सेवन
  • कुछ दवा जईसे डाईउरेटिकस, एसप्रिन, साईकलोस्पोरिन आ लिभोडोपाके सेवन ।

युरिक एसिडवाला गेठिया (बाथ) के प्रमुख लक्षण सब का-का ह?

प्रमुख लक्षण सब:

  •  प्राय रातमे गोड़ के अऊँठा मे अचानक से दर्द होनाई, लाल होजानाई, फुल जनाइ, झमझमनाई आ धिकल लगनाई ।
  • गोड़ के अउठा सङ्घे- सङ्घे घुटना, केहुनी आ दोसरो जोर्नी मे दर्द होनाई, लाल होनाई, फुलनाई आ धिकल लगनाई ।
  • केकरो- केकरो जोर्नी खाली ना मांशपेशीमे भि दर्द होला ।
  • ई लक्षण प्रायः ३ दिन से लेके १० दिन तक मे ठीक होजाला ।
  • ना इलाज कइला पर ई लक्षण बार-बार होला आ अन्त मे जोर्नी सब मे युरिक एसिड के कनिका जमा होके जोर्नी के बिगाड़ देवेला आ उठल बइठल मसकिल कर देवेला । शरीर के अनेक जगह पर युरिक एसिडके कणिका के गांठ लउकेला । सङ्घे- सङ्घे किडनी मे भि दीर्घकालिन असर कर देवेला ।

युरिक एसिड वाला गेठिया (बाथ) भल-नाभइल कईसे पता चलि?

  • उपर लिखल लक्षण सब से
  • बंशानुगत ई रोग से लगाव से
  • स्वास्थ्य पड़ीक्षण से
  • खुनमे युरिक एसिड के मात्रा के जाँच से
  • ग्रसित जोर्नी के पानी के जाँच से
  • ग्रसित जोर्नी के एक्सरे कईला से

युरिक एसिडवाला गेठिया (वाथ) रोग से बचेके आ उपचार के बिधि सब कथि-कथि?

  – तत्कालिन बचाव

  • तुरन्ते दुखाईल जोर्नी के अराम देवे के चाहि, दर्द हटला के २४ घण्टा बाद तकले ।
  • दुखाई आ फुलल घटावे खातिर ग्रसित जोर्नी पर बरफ से सेके के करके चाहि ।
  • ग्रसित जोर्नी के हल्का उठाके राखे के चाहि ।
  • तत्कालीन दर्द आ फुलल घटावे खातिर दर्द नाशक दवाइ (एन एस ए ई डी), कोलचिसिन आ स्टरोआईड के प्रयोग कईल जा सकेला ।
  • एसप्रिन नामक दर्द नाशक दवाइ के भुल से भि ना खाए के चाहि उ अउरी खराबि करी ।

– दीर्घकालिन बचाव

  • जीवन शैली मे परिवर्तन, नियमित ब्याम ।
  • मोटापा घटावे के चाहि ।
  • खान पान मे सवधानी

हनिकारी खादय पदार्थ :

  • लाल मास (खसि,भेड़ा,भैंसी..ईत्यादि )
  • बियर
  • दारू
  • मास
  • अण्डा
  • दाल
  • कोभि
  • च्याउ (गोबरछाता)
  • ज्यादा फैटवाला दूध, दही आ घ्यू
  • मैदा
  • मिठ खादय पदार्थ

फाईदाकारी खादय पदार्थ

  • धान, गहु,मकइ
  • बनस्पति तेल
  • हरियर साग सब्जि
  • भिटामिन “सी”युक्त खादय पदार्थ
  • कफि, पानी
  • नियमित दवा जईसे एलोपुरीनोल, फेबुसोस्टाट आ प्रोबेनेसिड डाक्टर के सल्लाह अनुसार ।

सुझाव:-

– अपने मे भा केहु मे युरिक एसिडवाला गेठिया (वाथ) के लक्षण बा भा संखा बा त तुरन्ते सम्बंधित डाक्टर से सम्पर्क कर के कष्टकर जिन्दगी होएसे बाची आ बचाई ।

लेखक – डा• अमरेश कुमार यादव

 

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