का ई आदमी कहाई ?

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का ई आदमी कहाई ?

गोपाल कुमार यादव

हमहु एगो आदमी हई,
हमरा से दुर काहे रहेल ?

हमहु त एह देश के एगो पात हई,
हमर छुवल काहे ना खाल ?

तहरा जइसन हमरो मुह बा,
हमरा से काहे ना बोलेल ?

  जब हम तोहरा से पुछेनी ई,
   काहे खिसिया के भगावेल ?

  का हम सड़ल पियाज हई,
तु हमरा के सुङ्के फेकेल ? 

का हम पागल बानी,
जे तु हमरा हावा सम्झेल ?

जिएके नइखे ए देह सब के,
एक दिन जरुर मर जाई।

केतनो सुन्दर देहिया होई,
त एक दिन माटी से मिल जाई।

सबलोग कहेला आदमी सर्बश्रेष्ठ ह,
का ई आदमी “आदमी कहाई” ?
जब ले एह देश-दुनिया मे छुवाछूत ना हट पाई।।

लेखक – वीरगंज, नेपाल के रहनियार गोपाल यादव पेसा से धरान,नेपाल स्थित बी. पी. के. आई. एच. एस. मे अध्यनरत एमबीबीएस  के विध्यार्थी हई ।  

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