का हवे सिमसार दिवस? आ का बा ऐकर महत्व ?

79

संन्दर्भ- विश्व सिमसार दिवस

लेखक – बलदेव उपाध्याय “निर्मल”
लेखक – बलदेव उपाध्याय “निर्मल”

शवर द्धारा ई पृथ्वी प्रकृति जगत मे ईहवाँ रहेवाला प्राणी जीव मात्र के रहे बाँचे खातिर भोजन, आवाश, सुरक्षा लगायत अनेकन माध्यम के ओइनस आवश्यक होखेवाला बस्तुसब के सृजना आ व्यवस्था सहित करत बाँचे जिए के आधार खडा भइल बात सर्व विदिते रहल बा ।

जउना व्यवस्था मुताविक मानव लगायत के प्राणीजन आपस मे सहकार्ज एवं सहजोग करत, एक दुसरा उपर आसृत रहते आईल बात रहल देखेके भी मिलेला । जेसे आपसी अस्तित्व रखे आ रहेमे जे सहजोग होखेला ।

इहे प्रसंग मे पृथ्वी मे रहल ओइसन अनेकन प्राकृतिक वस्तु मध्ये रहल एगो बहुती महत्व के वस्तु भा क्षेत्र “सिमसार” क्षेत्र भी हउवे । जे जहवाँ प्राकृतिक रुपमे सबदिन पानी जमल रहेला । उक्त कारण से आसपास के नजदिकी क्षेत्र के जमिन भी हर समय गिला–ठंडा भा चिस्यान यूक्त रहेला । इहे ओइसन चिस्यान अर्थात ओसयुक्त हर समय पानी जमल अवस्था मे रहल अइसन विशेष क्षेत्र के “सिमसार” कहल जाला ।

हमनी देश नेपाल मे भी विभिन्न जगहा मे छोट बड विभिन्न प्रकार के अनेक ताल तलैया, सिमसार क्षेत्र रहल बा । जेमे जगदिशपुर ताल (कपिलवस्तु), बीस हजारी कसरा (चितवन), कोशी टापु (सुनसरी), रुपा फेवा बेगनास (कास्की) पोखरा, सुर्मा (बझांग), घोडाघोडी (कैलाली), बुलबुले (सुर्खेत), बारह कुने (दाङ्ग), कामिनि दह (बारा) आ सत्यवती (पाल्पा) लगायत रहल बा ।

ओइनस ताल तलैया सिमसार क्षेत्र मे विभिन्न गाछ बृक्ष झाडीसब समेत रहेके साथे ओइसन जमल स्थिर जलाशय के पानी मे विभिन्न घाँस पाता आ छोट छोट किट पतंग के साथे पानी मे आसृत मछरी कछुवा जइसन जलचर प्राणी खातिर सिमसार क्षेत्र से भोजन सहित बसोबास आ आश्रय मिलेला । साथे ओइसन क्षेत्र मे रहल गाछ बृक्ष से उ क्षेत्र मे रहेवाला पंछी लगायत झाडी मे रहेवाला छोट छोट जनावर के भी भोजन सहित आश्रय खातिर भी सहजोग पहुँचेला । जेसे “सिमसार” क्षेत्र मे भूमिका आ महत्वता बहुते रहल मिलेला । “सिमसार” क्षेत्र जलचर पानी जीव जन्तु सब के जीवन चक्र संचालन आ व्यतित होखे करेवाला जगह भी हउवे । ओहिसे “सिमसार” के ज्यादे महत्वपूर्ण स्थल मानल जाला ।

एतनाही ना, उहवाँ उगेवाला आ उगल घाँस पाता, गाछ बिरिक्ष, झाडी के उगे आ हरियर जिवित सदाबहार हराभरा रखे खातिर सिमसार के पानी से सिंचित होत सुक्खा होखे से बचावत करत सहजोग होला । साथे जीव जन्तु ही ना, सिमसार से हमनी आदमी खातिर भी विविध क्षेत्र मे बहुते सहजोग रहते आईल बा । “सिमसार” के महत्व एतना मे ही सिमित नइखे । पर्यटन के आकर्षित करत पर्यटकिय विकास आ राष्ट्र मे आर्थिक समुन्नति खातिर भी बडका योगदान सहित सहजोग होखेला ।

स्वदेशी आ विदेशी पर्यटक जन के आगमन एवं भ्रमण अवलोकनद्धारा राष्ट्र के ओइसन विभिन्न जगह धरोहर सब के भी स्वदेश आउरी विदेश मे प्रचार होत विश्व मे राष्ट्र के पहिचान मे भी सहजोग होला ।

माकिर “सिमसार” क्षेत्र के एतना बडका योगदान आ महत्वता रहलो पर भी हमनी बुद्धिमान प्राणी के रुपमे रहल विवेकशिल प्राणी मानवद्धारा ही अविवेकी बनत अज्ञानता भा लोभ लालच मे परके बन जंगल के गाछ बृक्ष के अबैध आ अत्याधिक कटान, नदी जन्य सामगृ भा प्राकृतिक सम्पदा सब के अधिक दोहन, नदी लगायत सिमसार क्षेत्र मे विषादी के प्रयोग, उद्योग कलकारखाना से निकलल धुँवा आ फुहर सामगृ ओइसन नदी ताल तलैया सिमसार क्षेत्र मे बिगे मिला देवे भा विस्थापित करेके लगायत जइसन कार्ज के कारण से भी होखेवाला वायु प्रदुषण, जलप्रदुषण, वातावरणिय प्रदुषण, जलवायू परिवर्तन सहित आदमी द्धारा बन जंगल आ ओइसन सिमसार ताल तलैया लगायत के क्षेत्र अतिक्रमण कके मानव वस्ति ओइसन क्षेत्र मे रहे से आवागमन एवं मानविय हो–हल्ला शोर गुल ईत्यादी कारण से उहवाँ आसृत जीव जन्तु के रहे खातिर वाधा उत्पन्न होखेला । साथे बाढ आवे एवं भुस्खलन ओइनस कारण से भी सिमसार क्षेत्र मे नदी से माटी बालु बहके आवत जमा होत उक्त जगह तोपा जाएके कारण ओइसन क्षेत्र के अस्तित्व समाप्त होला । अर्थात उनष्ट हो जााल । जेकारण उहवाँ आश्रीत पंछी किट पतंग लगायत के प्राणी सब के भोजन आवाश सुरक्षा लगायत के क्षेत्र मे संकट उत्पन्न होला । जउना कारण उहाँ रहेवाला ओइसन जलचर लगायत के प्राणी सुरक्ष्ँित वासस्थान के खोजी मे बसाई सरके अन्यत्र जाएलें । साथे बाढ से बहत आ माटी से मुनात अनेकन ओइसन उहाँ के प्राणीसब ज्यान गवाँ के नष्ट होजाला । अइसन उपरोक्त बात विज्ञलोग के कहनाम आ प्रकाशित प्रशारित संचार माध्यम के खबर द्धारा भी जानकारी होखे मे आवेके साथे ओइसन रहल बात देखे सुनेके भी मिलेला ।

मानविय लापरवाही एवं अवांछित कृयाकलाप के कारण “सिमसार” एवं ओइसन प्राकृतिक सम्पदा क्षेत्र नोक्सान भा लोप होरहल आ होखेवाला बात विज्ञलोग के कहनाम रहेके साथे जे ओइसन देखल भी जाला ।

अतः उपरोक्त बात उपर मनन करत सिमसार क्षेत्र के संरक्षण आ सम्बद्र्धन एवं गहाँ के जीव जन्तु सहित के प्राकृतिक वासस्थान मे रहे बाँचे पावे के अधिकार आउरी उनकर संरक्षण आ सुरक्षा खातिर हर सम्भव सहजोग करेके हमनी मानव सब के कर्तव्य हउवे । साथे सरकारी स्तर से भी अवांछित कृयाकलाप करेवाला उपर उचित दंड सजाय सहित “सिमसार” क्षेत्र के संरक्षण खातिर विशेष योजना सहित जन चेतना जगावे के कार्जक्रम भी करते रहेके चाहिं । जेसे आम जनसमाज मे सिमसार के संरक्षण सम्र्वद्धन मे चेतना जागृत करे करावे खातिर सहजोग पहुँची । आ एसे सिमसार क्षेत्र के संरक्षण एवं विकाश सम्भव होखी । “विश्व सिमसार दिवस”मनावे के उदेश्य भी इहे उपरोक्त बात उपर मनन करत “सिमसार” क्षेत्र के खातिर रहल मिलेला ।

– मुर्ली बगैचा–१२, वीरगंज

advertisement

राउर टिप्पणी

राउर टिप्पणी लिखी
Please enter your name here