सुभाष कुमार बैठा

मर घर उहाँ ह जहाँ के जगह गंगा से पवित्र, स्वर्ग से सुन्दर आ समुन्द्र से भि स्वच्छ बा । जेकरा के प्रकृति भि आपन सब रुप देके शृंगारले बा । जहाँ गौतम बुद्ध, राजा जनक, माता सिता के जनम भइल बा । हम जन्मनी उहाँ जहाँ के धरती आपन देश नेपाल के दाना पानी से लेके लगभग ८०% आवश्यकता पुरा करेला । काहे कि देश के प्रमुख द्वार से लेके कलकारखाना, वनजगल, उपजाऊ जमिन सब इहे बा ।

एतने ना समय समय मे देश पर परल संकट से भि इहे बचइले बा काहे कि नेपाल के कवनो क्रान्ति बिना ए जगह के सहयोग समर्थन से सफल नइखे भइल । ई कुली के एक शब्द मे कहल जाव त ई जगह पुरा देश के मुटु (दिल) ह । जवना के बिना देश के साँस लेहल भि मोश्किल बा ।

देश के भौगोलिक नामाकरण अनुसार ए जगह के तराई नाम बा आ ए जगह पर रहेवाला लगभग सभी लोग के देश के शासक लोग द्वारा मधेशी नामाकरण कइल गइल बा आ आजकल उ मधेश नाम मे परिणत हो गइल बा  । तराई से मधेश नामकरण के पीछे भी बहुती कारण सब बा ।

समय बितत गइल नेपाल मे भि समय के साथे अनेकन परिवर्तन होत गइल । देश मे क्रमश: राणाकाल, राजतन्त्र, प्रजातन्त्र, लोकतन्त्र जइसन परिवर्तन भइल आ ए सब परिवर्तन मे मधेश आ मधेशी के भी अहम (जोडदार) भूमिका रहल बा ।

लगभग ए सब काल मे मधेश आ मधेशी पर सिर्फ शोषण हि भइल । देश मे जब प्रजातन्त्र आइल तब पुरा देशवाशी अपने आप के तनि स्वतन्त्र महसूस कइलख लेकिन मधेश आ मधेशी के हालत जइसन के तइसने रहल । मधेश आ मधेशी मूलत: करदाता, मतदाता आ अन्नदाता मात्र के रुप मे प्रयोग होखे लागल । ओकरा बदला मे शासक लोग मधेशी के देखावा (उदाहरण) के रुप मे कहि कहि राखे लागल । जइसे जहा बिस गो मन्त्री बनल ओ मे दुगो मधेशी के राख देलख । आ आज तक ले उहे परम्परा चलते आ रहल बा । कवनो भी जगह होखो चाहे कवनो राजनैतिक पार्टी, संघ संस्था चाहे सरकारी पदे काहे ना होखो ओ सब पर देखावा  ही लउकेला । कुछ जगह पर मधेशी आपन क्षमता अनुसार जरुरे पुगल बा बाक़िर अन्य मे बात उहे देखवा ।

जब लोकतन्त्र आइल त सब देशवाशी बहुते खुश भइल कि अब हमनी के आपन शासन-सत्ता आ गइल, अब हमनी के भेष भुषा, भाषा संस्कृति, शाशन प्रशासन, के संरक्षण संवर्द्धन होई, उच्च मान सम्मान मिली, हमनी सब नेपाली के बराबर हक अधिकार होई कहके । काहे कि ई लोकतन्त्र कवनो एगो आदमी चाहे एगो समुदाय के प्रयास से ना मिलल रहे, ओ मे सम्पूर्ण नेपाली के बलिदानी रहे जे मे मधेश आ मधेशी  के अग्रगामी आ निर्णायक भूमिका रहे । हजारो लोग शहिद भइल, लाखो माई बहिन बिधवा भइली, लाखो जवान अपांग भइल ।

बाक़िर ए लोकतन्त्र मे भि मधेश आ मधेशी के साथे सौतेला व्यवहार पहाड़ी खस शासक के द्वारा होए लागल। सम्बिधान भि बनल त उ खाली पहाड़ी बाहुन के मध्य नजर राख के बनल । काहे कि ओकर बनवनिहार खाली उहे लोग रहे । जवना के ८० % नेपाली स्वीकार ना कइले आ सब लोग आपन आपन तरिका से विरोध जनइले । इहे क्रम मे मधेशी लोग नाकाबन्दी तकले कके विरोध जनइले । आ उ आंदोलन अब काठमाण्डौ केन्द्रित आंदोलन मे परिणत हो के अभिनो जारी बा ।

ई बिरोध के आन्दोलन मे जवन क्रूर तरीका से राज्य द्वारा शान्ति सुरक्षा के नाम पर दमन भइल ओ से साफ स्पष्ट हो गइल कि मधेश आ मधेशी के लेल ना नेपाल मे पुलिस प्रसाशन बा ना मधेशी लाए नेपाली सेना बा ना ही कवनों मानवाधिकार । काहे कि काठमांडू के अान्दोलन मे उहे पुलिस प्रसाशन पानी के फुहेरा से आन्दोलन के सहज करत देखल गइल त उहे मधेश मे बन्दुक के गोली से सिधा छाती भा कपार पर मार के आपन द्वेध चरित्र उजागर कइले रहे । इहाँ तकले कि आन्दोलन के कंट्रोल करेके नाम पर चार बरिष के अबोध लइका से लेके ज़नानी सब के पकड़ पकड़ के गोली मरले रहे लोग । आखिर का आपन अघिकार मांगल गुनाह रहे कवनों मधेशी लाए ?

आजो मधेशी-जनजाति के आन्दोलन के दबावे खातिर अनेकन उपाय अखतियार कइल जा रहल बा । आंदोलनकारी मधेशी पर अनेकन आरोप लगावत मधेशी के भारतीय के नाम से नामाकरण करत बा लोग । ई गलत आरोप बा, हम ओ लांक्षणा लगावेवाला लोग के चुनौती देत कहतानी कि आपन पुर्खा के कागजात निकालस आ कवनो मधेशी के पुर्खा के कागजात से मिलाके देखस कि के कय पुस्ता से के नेपाली बा ?

ना त प्रमाणे देखे के बा त पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा, माधव नेपाल, कृष्ण प्रसाद भट्टराई जइसन एक पुस्ते दु पुस्ते खस पहाडी बाहुन लोग के देखी । के काहाँ से आइल बा चाहे काहाँ जनमल रहे । आरे ई सारा दुनिया जानत बा की ई लोग के मधेशी बिहारी नजर आवेले उहे दार्जेलिङ्ग होखे चाहे देहारादून आदि से कवनों तामाङ, कोइराला, खनाल आदि खाली नाम के पछाड़ी जोरले होखे उनका के ई खाटी नेपाली मानेले । आखिर एसे का सिद्ध करेके के चाहत बा लोग की नेपाली राष्ट्रियता ह की एह लोग जइसन जातीय शब्द ।

जहाँ तकले बात बा राष्ट्रवादी आ देशभक्त के, ” जे चोर ओकरे बड़का सोर ” त टनकपुर , कोशी आदि के बेचेके, चन्द पैसा के लोभ मे पर के भारतीय, भूटानी सब के नागरिकता देवे के काम त सब आपना के बडका देशभक्त कहेवाला पहाडी बाहुन लोग हि कइले बा । नेपाल के असली देशभक्त आ राष्ट्रवादी त मधेशी बा काहे कि आज तकले कवनो मधेशी देश के शिर झुकावेवाला कामे नइखे कइले ।

आरे उ मधेशी ह जे आपन भेष भूषा आपन संस्कृति आपन बोली लवज़ तकले के दान देके अपना आप के ई देश के खाटी नागरिक देखावे के चक्कर मे रात दिन बरसो बरस नेपाली के पाठ पढ़ लख, नेपाली भाषा बोललख । इहाँ तकले की आपन बालबच्चा के साथे अइसन दुर्व्यवाहर ना होखों कहके मात्र नेपाली भाषा सिखइलस । हम उ पहाड़ी से पुछेम की कहियों आपन भेष भूषा आपन संस्कृति के छोडके दोसर के समुदाय मे दोसर भाषा मे एक दिन त बोल के देखस सारा राष्ट्रियता के भूत उतर जाई । ऐतना आसान ना होला दोसरा जइसन बनल तेपरो मधेशी ही ह जे नेपाली राष्ट्रियता मे समाहित होखे लाए ई सब कइलस ।

जहाँ तकले देश के हरेक ढंग से आगे बढ़ावे के बात बा त मधेशी एहु मे दोसरा से तनिकों पीछे नईखे । आजू नेपाल एक गणतन्त्र संघीय लोकतन्त्र राष्ट्र बा त एमे मधेशी के अमिट सहयोग समर्थन रहल बा । देश मे संघीयता आइल कइसे मधेशी के मधेश आंदोलन के चलते । आज भी देशके अग्रगामी प्रगति दूरगामी सोच आ प्रतिगामी के जाल से बचावे लाए मधेशी जनजाति से मिलके निरन्तर लड़ रहल बा । संबिधान के जालसाजी नियम चाहे कमी कमजोरी लाए आज भी मधेशी निरन्तर ओकर बिरुद्ध लड़त बा । एसे मधेश आ मधेशी ई देश के बचावे मे हि मदत कइले बा ।  एहिसे झुठ मुठ के खोखला राष्ट्रवादी आ देशभक्ति से काम ना चली । आखिर रउवे बताई, बा के राष्ट्रवादी ?

                    सुभाष कुमार बैठा

                    बेलदारी ५ बारा , नेपाल

                 हाल  पेन्सलभेनिया , अमेरीका

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