गुणवान नेता – नेता जी की जय हो !

223

 

दिपेन्द्र सहनि

बिरगंज शहर हमार जन्म धरती भईला से तनी बहुति इक्छा रहेला की कुछ कईल जाव जनम धरती खातीर । आपन शहर अउरी देश के दुर्दशा आ स्थिति देख के राजनीति मे टांग घुसइयावे के मन त करेला बाकीर आपन ब्यक्तिगत स्थिति देख के ध्यान मे रखते आपन टांग पाछा घिच लेवेनी । साढ़े चार महिना के नाकाबन्दी हमरा मंदबुद्धि मगज मे अईसन असर देखवलख की एका एक हमहु राजनीति खातिर अउरी देश खातिर सोचे लगनी आ देश प्रेम हमरा भीतरी उफान मारे लागल| बहुते सोच बिचार कईला के बाद पता चलल की राजनीति मे राज करे खातीरा दिमाग के गठरी खोल के बहुते बेलना बेले के पडेला ओकरा बादे नेता नाम से नामकरण कईल जाला | कुंडली बेईमानी से बनल होखे त बढ़िया नेता बनेम ना त ठन ठन गोपाल अर्थात जनता के जनता ही रहेम ।

आजू के दिन मे बिरगंज चाहे पूरा मधेस मे रउवा कही चल जाई जहा बीस आदमी होई ओह बीस आदमी मे से पनरे आदमी नेता होई, पाँचे आदमी रउवा जनता भेटाई । नेता ओइसे त आपन चोला से चिनाह जाला लोग बकिर बिना बतियवले नेता चिन्हे मे रउवा कनफ्यूजियात होखेम त हम अपने के कुछ बिशेष टिप्स दे तानी । कईसे अपने आपन श्रवण शक्ति के खर्च कर के नेता काहाए वाला जीव के पहिचान कर सकतानी । पूरे देश, मधेस, बिरगंज शहर चाहे कौनों गाव ही काहे ना होखे जइसे हर कुकुर के गुण होखे टांग उठा के लघुशंका करे के ओईसे ही सारा नेता लोग मे भी कुछ कुछ गुण एके होखेला ।
नेपाल के नेता लोग के गुण लिखल जाव त नेपाल के कागज कारख़ाना के कागज खतम हो जाई बाक़िर उ लोग के गुण लिखला से ना ओराई । कुछ गुण साधारण होखेला । काहल जाला “नेता कुकुर हाथी नाही जात के साथी” अर्थ नेता, कुकुर अउरी हाथी आपना आफ्ना बिरादरी के कट्टर दुश्मन होखे लोग । राजनैतिक बिरादरी बहुते धोखा धड़ी औरी मेहनत से बनावला जाला जेकरा के पार्टी नाम देहल गईल बा । हर बिरादरी मे राजनैतिक औरी बैचारिक समानता भले ना होखे बकीर बिरादरी समानता लगभग एके जईसन होखे | केकड़बुद्धि अर्थात एक दोसरा के टांग खिचे के , टांग फसाई अर्थात एक दोसरा के काम मे टंगरी घुसियावे के , चुगल खोरी, भीतरघाती, एक दोसरा के गारी देवे के आ चाहे बदनाम करे के कौनों औसर ना छोडेके यी सब गुण साधारण ह जवन हर राजनैतिक बिरादरी के एके लाखा होला । कुछ बिशेष गुण भी होखेला आई नेता बने खतीरा कुछ बिशेष गुण रऊवों सीख ली कहियों नेता बनेके सोच बनल त कामे आई ।

औसरबादी :
नेपाल अउरी माधेस के नेता मे मिलेवाला समय संदर्भ के हिसाब से सब से पहिले लमर पर औसरबाद आवेला जेकर पर्यावाची शब्द गिरगिटिगुणी भी होला । भोजपुरी मे एगो कहावत बा ” सियारा उहे ह पोछवा रंगवले बा ” मतलब नेता बने खातिर गिरगिटगुणी के सटीक ज्ञान जरूरी ह । दसो साल से लागल बानी पार्टी मे अवसर नईखे मिलत अगर दोसर पार्टी मेयर के टिकट देत होखे त यी गिरगिटयागुण मतलब औसरबादी गुण के सदुपयोग करी फाटक से रंग बदली, दल बदली अउरी चोला बदली तब जा के राजनीति मे राज करे के मौका मिली । पार्टी प्रबेश, पार्टी त्याग, पार्टीगत गठबंधन, पार्टी बिलय, पार्टीगत तालमेल यी सब उदाहरण देखल जा सकता । मौका परला पर गदहा के बाप बनावल अउरी मौका निकलते ही बापके पिछवाड़ा पर लात मारल नेता मे होखेवाला पहिलका अउरी उतम कोटी के गुण मानलगईल बा।

नाताबाद कृपाबाद :
एगो असल नेता खातिर राजनीति मे दोसरका अहम गुण मानल गईल बा नाताबाद अउरी कृपाबाद | राउर अगर एगो बेटा होखे त ओकर तीन गो बियाह कराई ओइसे नेपाल के नियम के हिसाब से बहूबियाह एगो अपराध ह बाक़िर राउर सरकार बन जाता त उ कानून – किताब, अदालत अउरी साधारण जनता तक ही सीमित हो जाला । उदाहरण हमरा देवे के ना परी जेकरा चाही उ प्रचंड जी अउरी उंकर सुपुत्र जी के बारे मे देख लेहेम । बहू बियाह से रउवा सामाजिक कार्यकर्ता के मानपदवी मिल सकता, मेहरारू संघ के अध्यक्ष बने मे सहयोग हो सकता एकरा साथे भोट भी बढ़ जाता आ रउवा नेपाल के कानून से ऊपर रहेमे सक्षम हो सकतानी । बेटा, बेटी, भाई, भौजाई, अर्धांगिनी, बहिन सब के अलग अलग जिल्ला से चुनाव लड़ाई नोट से मिले त भोट किनी ना त बिरोधी पार्टी भी किना सकेला । हारे के मौका आवे त बंदूक देखा के भोट डलवाई, ओ से भी काम ना चले त जबरदसती मत पत्र फड़वा दी फेर से भोट होई | अपना बाप के घर से कथी जाता जितला के बाद पुलिस, प्रशासन देश के हर बड़का पद पर आपन जेतना हो सके नातेदार लोग के पद ग्रहण काराई तब जा के राउवा एगो सफल नेता कहाएम |

छल, बल :
छल अउरी बल यी गुण इतिहास से ही प्रयोग मे बा । जे छल कईलख उहे राज करेके सामर्थ्य रखेला । छल अउरी बल भिभिक्षण औरी भगवान श्री कृष्ण जी से हर नेता के बरदान के रूप मे मिलल गुण ह । भिभिक्षण ना रहते त राम जी के का दुर्दशा होइत । श्री कृष्ण ना रहते त भीम से दुर्योधन कहियों ना मरित । छल अउरी बल से ही करन चाहे बाली के भी बध कईल गईल ।। कब केकर गोड पकड़ लेवे के बा अउरी कब आपन बिपक्षी उपर वार करे के बा छल औरी बल के ज्ञान बिना असंभव बा । नेपाल के राजपरिवार, मदन भण्डारी, मधेस आन्दोलन चाहे हर एक मधेसी सहिद छल अउरी बल के ही शिकार भईल लोग । नेपाल के राजनीति मे बहुते कोई आपन यी गुण के सहयोग से सत्ता के आनन्द उठा रहल ब लोग ।

धन :
आजू के नेता ला राजनीति करे खातिर धन बहुते महत्वपूर्ण भूमिका निभावे ला । सायद यीहे गुण ना भईला के करते हमरा जईसन केतना लोग नेता ना बने के चाहे ला । केतना गरीब अउरी बेरोजगार जनता अइसन भी बा लोग जेकरा के धन ही राजनीति करे खातिर आकर्षित करेला । कुछ गरीब अउरी बेरोजगार लोग के माने त राजनीति धन कमाए के एगो बहुत छोट आ सहज रास्ता ह । नेपाल के राजनीति होखे, मधेस के राजनीति होखे चाहे बिरगंज के जे नेता बनल बा कुर्सी पवले बा कुर्सी के साथ साथ धन भी खुबे बटोरले बा । आजू नेपाल मे नेता बने के रेस लागल बा जावना रेस के पहिला पायदान पर ब्यापरी, चाहे धनिक आदमी ही मिलेला लोग । धन से बल मिले, भोट मिले, बिपक्षी भी मिले आ अगर बिपक्षी ना मिले बहुति बिरोध करे त उनका के ठेकाना लगावे के रास्ता भी धन से ही मिलेला । मिला जुला के देखि त धन के बहुते गहिर नाता आजू के राजनीति से बा । काहल जाला धन देख के शंकर भगवान के त्रिनेत्र खुल जाला सत्ता मिलते ही हर नेता जी लोग शंकरीय रूप धरण कर लेवे लोग सायद ओहि से भोजपुरी मे कहावत ब ” हमहू लूटी तुहों लूट लूटे के आजादी बा, सब से ज्यादा उहे लूटे जेकरा देह पर खादी बा”

लबरई, बेशर्मी :
नेता बने के पाचवा गुण ह लबरई अउरी बेशर्मी । बढ़िया नेता बनेके बा  त हर बात पर झुठ बोले आवे के पडल अउरी लाज शरम के गाछी पर लटकावे के पड्ल । जनता से जेतने झूठ बोलेंम, जेतने लबरई के भाषण देहेम ओतने ताली मिली भले बाद मे गारी ही काहे ना मिलो । नेपाल के नेता लोग त खैर झूठ बोले मे मास्टर डिग्री आउरी बेशर्मी मे पीएच डी होल्डर ही अधिकतम बा लोग । झूठ के कौनों सीमा ना होखे । एही से मुह मे जवन आजाए बे झिझक बोली । नेपाल मे पानी जहाज चलाएम, घर घर मे गैस के पाईप लाईन लिया देहेम, गाव गाव मे बैंक होई , नेपाल के हर घर मे इन्टरनेट मिली, हर शहर मे एगो सिंह दरबार बनी, आंदोलन मे जे सहादत प्राप्त करी उनका पचास लाख मिली । एतना लबरई बोलला के बाद अपने बेशर्मी ना देखवनी त सारा लबराई बेकार हो जाई ओहि से लबराई के साथ साथे बेशर्मी के बहुते महत्व मानल गईल बा । अगर कौनों बात कह देनी औरी अगर दाव उल्टा पर गईल तब बेशर्मी काम आवेला अउरी लाज शरम छोड़ के फाटक से अपना बात से पलटी मर दी । उदाहरण | MAY-9- संसोधन बिना मधेस मे चुनाव कौनों कीमत पर ना होखे देहेम- उपेंद्र यादव, अब पलटी JUNE-9- मधेस मे चुनाव कोई से ना रोकाई – उपेंद्र यादव | उपेंद्र यादव जी संघीय समाजबादी पार्टी के एगो जनल मानल नेता हई |

प्रेम:

अङ्ग्रेज़ी मे एगो कहावत ब की ” Everything Is Fair In Love & War” राजनीति मे दुनु प्रेम के जगह मिलल बा मानस प्रेम अउरी राजनीतिक प्रेम । फरक एतने होला की राजनैतिक प्रेम मे प्रेमिका के जगह कुर्सी के देहल गईल बा । बस एतने फर्क होखेला मानस प्रेम अउरी राजनैतिक प्रेम मे । ऊपर के जेतना गुण बा सारा गुण के प्रयोग यीहे कुर्सी प्रेम खातिर ही होखेला । रामायण चाहे महाभारत आखिर यीहे प्रेम के कारण आज ले देखे के मिलेला । बिधा देबी जी के कुर्सी प्रेम रास्ट्रपति बना देहलख त ओली जी अपना प्रेम खातीरा मधेस मे गोली चलवा देहले । हर प्रेम मे बलिदानी देही के पडेला ।

advertisement

राउर टिप्पणी

राउर टिप्पणी लिखी
Please enter your name here