गढ़ीमाई मेला मे पशुबलि भईल शुरू, मेला देखे खातिर लाखो के भीड़ उमडल

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    वीरगंज, १७ अगहन ।

    बारा जिल्ला के महागढ़ीमाई नगरपालिका के बरियार पुर मे पाँच साल मे एक बेर लागेवाला हिन्दू धार्मिक आस्था से जुडल बिश्वप्रसिद्ध मेला मे आजू बिधिगत रूप से पशुबलि शुरू भईल बा । सोमार के रात मे शुरूभईल पूजा समापन भईला के बाद मंगर के बीहनईया पंचबलि देवे के शुरू भईल । पंचबलि मे बोका, पाठा, मूस, परेवा आ पाड़ा के बलि चढ़ावल जाला ।

    गढ़ीमाई के मुख्य पुजारी के रूप मे शिव चौधरी अभी मुख्य पुजारी के रूप मे बाड़े जे थारु समुदाय के पुजारी के ११ वा पूस्ता हउवे । पुजारी के घर मे पूजा हो गईला के बाद सोमार के रात से ब्रहमस्थान मे पूजा शुरू कईल गईल रहे । ऊहा पूज ओराईला के बाद माई के मन्दिर के आगा रहल पुराना त्रिशूल हटा के नाया राखल गईल । ओकरा बाद फेर वापस ब्रह्मस्थान मे ही मंगर के दिने आ के पंचबलि देहल गईल रहे ।

    गढ़ीमाई के हांस, मुर्गा, सुवर समेत अनेकन पशुबलि के साथ साथे भाखल परेवा उडावे के चलन परम्परा से चलत आइल बा । पशुबलि से पहिले नरबलि देवे के चलन बा । चौधरी समुदाय के ओझा जीब, आँख के निचला भाग, छाती, पाखुर आ जांघ से पाँच बूंद लहू निकाल के चढ़वाल जाला । सिमरी गाँव से आइल दुखा चौधरी यी साल मेला मे नरबलि देहले मुख्य पुजारी शिव चौधरी जानकारी करवले । मुख्य पूजा ही आदमी के लहू चढ़ा के होला, हमनीयो दे सकीले माकिर गढ़ीमाई के मन्दिर लगे भइला से रोज लहू देवे के परेला पुजारी चौधरी बतवले । एही से हमनी ओझा मानेनी आ उ लोग जब आवे तब उ लोग के लहू चढाही के परेला ।

    अगहन १ गते से शुरू भईल मेला मे मंगर आ बुध दु दिन पशुबलि देवे के कार्यक्रम राखल गईल बा । मेला मे मंगर के दिने पाड़ा आ बुध के दिने बोका, हाँस आ मुर्गी के बलि होई कहला पर भी मेले देखेआइल दर्शनार्थीलोग आफ्ना हिसाब से ही बलि देवे के शुरू कईले बा लोग । पसाहा नदी पार कईला के बाद गढ़ीमाई के सिवान परला से दर्शनार्थी लोग पासहा नदी हेल के बलि देवे के शुरू क देहले बा लोग ।

    गढ़ीमाई मन्दिर तराई मधेस क्षेत्र के बिश्वप्रसिद्ध शक्तिपीठ ह । बारा जिल्ला के सदर मुकाम कलेया नगरपालिका से लगभग ७/८ किलोमीटर पुरुब बरियारपुर मे रहल यी गढ़ीमाई मेला हरेक पाँच पाँच साल पर अगहन शुक्ल सप्तमी से शुरू होखेला । मेला मे होखेवाला लाखो के भीड़ यी साल भी लाखो के संख्या मे दर्शनार्थी के भीड़ देखल गईल । मंगर आ बुध के मुख्य पूजा के दिन भईला से भीड़ बहुते संख्या मे बढ़ी पूजा समिति जानकारी करवले बा । बरियारपुर से कलेया आ कलेया से बिरगंज तक नेपाल आ भारत के दर्शनार्थी लोग के भीड़ बढ़त गईल बा ।

    सीवान से जुडल शहर रक्सौल, आदापुर, घोड़ासहन, भेलवा, सिकटा सिवान के रास्ते अनेकन स्थानन से दर्शनार्थी लोग के भीड़ आरहल बा लोग । सोमार तक २० लाख से बहूती संख्या मे दर्शनार्थी लोग आ चुकल बा आ मंगर, बुध के होखेवाला भीड़ के गिनती संभव नईखे ब्यावस्थापन समिति जानकारी करवले बा ।

    सवारी साधन मेला स्थल तक ना पाहुचला के चलते मेला देखे आववाला दर्शनार्थी लोग पैदल ही मेला देखे पहुचल बा लोग । दर्शनार्थी लोग ले के आइल मोटरसाइकिल, जीप, कार, बस, ट्रक, मिनी बस आ ट्र्याक्टर मेला स्थल से २/३ किलोमीटर पहिले ही खेत भा सड़क के किनारे रोक के राखल गईल बा ।

    बरियारपुर के खुल्ला चउर मे राखल त्रिशूल से आदमी के शुल रूपी तीन ताप आध्यात्मिक,आदिदेर्विक आ आदिभौतिक नाश होई अइसन जन बिश्वास बा । त्रिशूल स्थापना के दक्षिण मे गढ़ीमाई देवी के मूर्तिसहित के मन्दिर बा । मन्दिर के पुरुब दक्षिण मे पीपर के गाछ संघही ब्रहम स्थान बा । ब्रहम से मन्दिर तक के रास्ता शुक्ल सप्तमी के दिन सरसफाई आ लिपापोती क के गढ़ीमाई के स्वागत करत पाँच दिन ले पूजा कईला के बाद सर्वसाधारण के दर्शन खातिर मन्दिर खुल्ला कईल जाला ।

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