चिकित्सा प्रयोगशाला के इतिहास

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चिकित्सा प्रयोगशाला के इतिहास

राजेश कुमार साह

चिकित्सा प्रयोगशाला के बोलचाल के भाषा मे प्याथोलोजी ल्याब भी कहल जाला आ एकर इतिहास पुरापूर्वकाल से ही बहुत दिलचस्प बाटे । सुक्ष्मदर्शक यन्त्र के अविस्कार से पहिले प्रयोगशाला मे खासे कवनो परीक्षण सब उपलब्ध ना रहे । धिरे-धिरे मानव के विकास के क्रम के साथे-साथे बहुते प्रयोग सब के भइलक आ आजु आधुनिक प्रयोगशाला मे सभि रोग सब के परीक्षण उपलब्ध हो गइल बा । प्रयोगशाला के इतिहास मुलतः पाँच भाग मे विभाजन कर के विस्तारित रूप मे बुझल जा सकेला ।

१) आदि काल के प्रयोगशाला विधि:

आदिकाल के प्रयोगशाला के इतिहास इजीप्ट आ मेसोपोटामिया से शुरू भइल बा। ओह जमाना मे रोग के पहचान रोगी के लक्षण के आधार पर होखत रहे । इसा पूर्व ४०० वर्ष पहिले वैज्ञानिक सब पेशाब मे परीक्षण करे के शुरू कइलक । ओह जमाना मे पेशाब के जमिन पर फेक के चिउटी सब आवता कि ना से परीक्षण होखत रहे । चिउटी आगाइला पर छाला रोग (Boil) डायगनोसिस होखत रहे । इसापुर्व ३०० मे हिपोक्राइटस के चिकित्सा के पिता भी कहल जाला, उनकारा अनुसार कवनो भी बेमारी के पता लगावे खातिर तीन गो चीज देखल जाला : रोगी के पेशाब, फेफड़ा के आवाज आ छाला के रंग । इ.स. ५० मे रफस इफेसस नाम के वैज्ञानिक पेशाब लाल रंग देखला के बाद किडनी के रोग भइल बात पता लगइलन । इ.स. २०० मे ग्लेन नाम के फिजिओलोजिस्ट आ ओकर बाद मे इ.स. ९०० मे जुड़ियस वैज्ञानिक पेशाब के रंग, घनत्व आ जमे के आधार के साथे पैख़ाना के रंग आ ओकर पतलापन के आधार पर रोग के पता लागे के शुरू भइल । आदिकाल मे हिन्दू परम्परा के साथे क्रिश्चियन सभ्यता मे भी रोग के मनुष्य द्वारा कइल पाप के सजाय के रूप मे देखल जात रहे । गुरुवइ, झाक्री अथवा झारफुक वाला इलाज के प्रथा आदि काले से ही प्रचलन मे आइल इतिहास बाटे ।

२) मध्यकाल के प्रयोगशाला विधि :

इ.स. १००० के बाद के समय के मध्यकाल कहल जाला । ई समय मे रोग पता लगावे खातिर बहुतों प्रयोग सब भइल रहे, विशेष कर के पेशाब आ पैख़ाना मे । इ.स. १६०० मे विलियम हार्भे खुन के संचार पता लगइला के बाद मे आदमी के शरीर मे होखेवाला बहुतों प्रक्रिया सब के बारे मे जानकारी आइल । इ.स. १७०० मे एन्टोनी भान लुइनहुक सुक्ष्मदर्शक यन्त्र पत्ता लगवले रहे । अठरहवा शताब्दी के प्रेक्टिसनर आ क्वेक सब खातिर गोल्डेन युग कहलजाला । ई समय मे शरिर के तापक्रम, खून के दबाव, दिल के धड़कन, पेसाव आ पैख़ाना मुख्य रूप से जाचाई होखे लागल रहे ।

चिकित्सा प्रयोगशाला के इतिहास के कुछ रोचक  जानकारी 

आदिकाल के प्रयोगशाला के इतिहास इजीप्ट आ मेसोपोटामिया से शुरू भइल बाटे

ओह जमाना मे पेशाब के जमिन पर फेकला के बाद चिउटी के संख्या के आधार पर संक्रामण निधारण होखत रहे 

सन १८९० तकले नेपाल मे वीर अस्पताल मे मधुमेह के परीक्षण खातिर रोगी के पेशाब अस्पताल के छत पर राखल जाए आ माछी अउरि चिउटी के संख्या के आधार पर संक्रामण निर्धारण होखत रहे ।  

3) अस्पताल के शुरुआत आ प्रयोगशाला विधि :

अमेरिका के फिलाडेल्फिया एलम्स हाउस अस्पताल के विश्व के पहिलका अस्पताल मानल जाला । जवन इ.स. १७०० मे खोलल गइल रहे । उन्नइसवा शताब्दी से पहिले तकले प्रयोगशाला सुविधा आ अस्पताल सुविधा राजा महराजा आ उच्च पदस्थ लोग सब के मात्र उपलव्ध रहे । ओह जमाना मे अस्पताल धार्मिक संस्था अथवा राजा माहाराज सब द्वारा अनुदान पर संचालन होखे । उन्नइसवा शताब्दी मे आके प्रयोगशाला मे बहुत विकास भइल आ धिरे-धिरे आधुनिक विधि सब आवे लागल आ ओकर बाद आदमी के खून से बहुतों किसिम के परीक्षण सब शुरू भइल ।

४) नेपाल में प्रयोगशाला के विकास :

नेपाल में प्रयोगशाला के विकास वीर अस्पताल के इ.सं १८९० साल में स्थापना के बाद शुरू भइल इतिहास बाटे । ओह जमाना में मधुमेह (चीनी के बेमारी) के परीक्षण के खातिर रोगी के पेशाब वीर अस्पताल के छत पर राखल जाए । जेतना माछी पेशाब पर बैठे ओतना बुझल जाए की रोगी के मधुमेह लागल बाटे । १९६५ मे जाके वीर अस्पताल मे एक बर्षे ल्याब टेक्निसियन के पढ़ाई शुरू भइल । धिरे-धिरे ल्याब टेक्निसियन त्रि.वि. शिक्षण अस्पताल मे प्रयोशाला सम्बन्धी पढाई अन्तरगत बीएमएलटी, पथोलोजी, बायोकेमिस्ट्री लगायत के कोर्स के स्नातक आ स्नात्तोतर लेभल तकले के पढ़ाई भी उपलब्ध बाटे ।

सिटिइभिटी में भी ल्याब असिष्टेन्ट आ ल्याब टेक्निसियन के पढ़ाई होखेला । नेपाल में प्रयोगशाला के नीति निर्माण आ विकास के लेल नेपाल सरकार राष्ट्रीय जनस्वास्थ्य प्रयोगशाला नामक संस्था के स्थापना कइले बाटे जेकर काम नेपाल भर के प्रयोगशाला के क्वालिटि कंट्रोल करेके हवे । नेपाल के प्रत्येक हेल्थ पोस्ट, जिल्ला अस्पताल, अंचल अस्पताल, क्षेत्रीय अस्पताल आ केंद्रीय अस्पताल मे चिकित्सा प्रयोशाला उपलब्ध बाटे ।

५) अत्याधुनिक प्रयोशाला विधि :

एकाइसवा शताब्दि मे प्रयोगशाला बहुत आधुनिक होगइल बाटे । नयाँ-नयाँ स्वचालित प्रविधि के विकास के साथे रोग के परीक्षण बहुत आसान हो गइल बाटे । अभिन चिकित्सा प्रयोगशाला के सुपर स्पेसलाइजेसन हो गइल बाटे । ई अन्तरगत माइक्रोबायोलोजी, वायोकेमिस्ट्री, पारासाइटोलोजी, हिमाटोलोजी, हिस्टोप्यथोलोजी आदि के परीक्षण अलग-अलग होखेला। अभिन लगभग सभी रोग के पत्ता लगावेवाला प्रयोगशाला प्रविधि उपलब्ध बाटे । अन्त मे कथि कहेला चाहत बानी कि ई प्रयोगशाला के क्रमिक विकास से आजु सभी रोग के निदान सरल सुव्यस्थित रूप से आम जनता के लेल उपलब्ध हो गइल बाटे आ ई विज्ञान के बहुत बड़का तरक्की बाटे ।

लेखक – रौतहट जिल्ला के रहनीयर राजेश कुमार गुप्ता, नेपाल के चिकित्सा प्रयोगशाला विधा के एक जानल-मानल विध्यार्थी हई, बीएमएलटी मे स्नातक कइला के बाद वर्तमान मे ईहा के क्लिनिकल बायोकेमिस्ट के रुप मे महाराजगंज मेडिकल क्याम्पस त्रि.वि.शिक्षण अस्पताल मे कार्यरत बानी ।

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