जयन्ती विशेष : भोजपुरी के अनमोल रत्न, भोजपुरिया शेक्सपियर भिखारी ठाकुर के नमन

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वीरगंज, पुष ४ ।

भोजपुरी भाषा के शेक्सपियर कहल जाए वाला भिखारी ठाकुर के १३१ वां जन्म जयंती काल्हू १८ दिसम्बर के रहे । भिखारी ठाकुर के बिना भोजपुरी साहित्य अधूरा बा । माटी से जुडल ई भाषा के माटी के पहचान से जोड़े में भिखारी ठाकुर के महत्वपूर्ण योगदान बा। जवना ज़माना में हिंदी भाषा आपन अस्तित्व खातिर गुलामी के प्रतीक अंग्रेजी के साथ संघर्ष कर रहल रहे, उ ज़माने में भिखारी ठाकुर अकेले अपना दम पर भोजपुरी के जनमानस के सामने ला खड़ा कइले रहलन ।

उहाँ भोजपुरी के लोक कलाकार के साथ-साथ रंगकर्मी, लोक जागरण के सन्देश वाहक, नारी विमर्श अउरी दलित विमर्श के उद्घोषक, लोक- गीत तथा भजन कीर्तन के अनन्य साधक भी रहनी ।

18 दिसंबर 1887 में भारत बिहार राज्य के छपरा जिल्ला के कुतुबपुर दियारा गांव में एक निम्नवर्गीय नाई परिवार में भिखारी ठाकुर के जन्म भइल रहे । भिखारी ठाकुर लुप्त हो रहल भोजपुरी संस्कृति के एक नया जीवन देहले बानी ।

भिखारी ठाकुर देहनी भोजपुरी के एक अलग पहचान

भिखारी ठाकुर लोक कलाकार मात्र ना, बालुक जीवन भर सामाजिक कुरीति अउरी बुराइ के खिलाफ अनेकन स्तर पर निरन्तर संघर्ष करे वाला महान योद्धा रहनी । उनकर अभिनय आ निर्देशन में बनल भोजपुरी फिल्म बिदेसियाआज भी लाखन-करोड़न दर्शकन के बीच पहिले जेतना ही लोकप्रिय बा । उनकर निर्देशन में भोजपुरी के नाटक बेटी बेचवा‘, ‘गबर घिचोर‘, ‘बेटी वियोग‘ के आज भी भोजपुरी क्षेत्र में मंचन होत रहेला । ई कुल नाटकन आ फिल्मन के माध्यम से भिखारी ठाकुर सामाजिक सुधार के दिशा में अदभुत पहल कइले बानी ।

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित भिखारी ठाकुर

भिखारी ठाकुर द्वारा लिखल गइल कुल २९ पुस्तकन में ही उनकर पहचान निहित नईखे, काहे से की भिखारी ठाकुर सिर्फ एक लेखक ना रहलन बालुक ऊ अपना आप में एक संस्थान रही, नाटक लेखन से लेके अभिनय, मंचन इहाँ तक की आपने नाटक में ऊ खुद भी नृत्य करत रहनी । उनकर नाटक बेटी बेचवा‘, ‘गबर घिचोर‘, ‘बेटी वियोगसहित उनकर सभी नाटकन में बदलाव को दिशा देवे वाला एक सामाजिक चिंतक की व्यथा साफ लउकेला । कोई उहाँ के भरतमुनि के परंपरा के पहिलका नाटककार मानेला त कोई भोजपुरी के भारतेंदू हरिश्चंद्र । महापंडित राहुल सांकृत्यायन त उन्का के भोजपुरी का शेक्सपियर‘ के उपाधि देहले बानी । एकरा के अलावा उन्का के कैयन आउर उपाधि अउरी सम्मान भी मिलल बा । भारत सरकार ई महान भोजपुरिया योद्धा के पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित कइले बिया । 

आपन वीरगंज परिवार अपना सांस्कृतिक नायक, साहित्य के धुरि, लोकगीत, लोक-भजन के शान भिखारी ठाकुर जी के उँहा के जयंती प बेर बेर नमन क रहल बा ।

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