बेतिया,  बिहार ।

भारत, बिहार के पश्चिम चंपारण के मुख्यालय, बेतिया के चर्च, ‘सेंट मैरी कैथेड्रल’ के आसपास बसल ईसाई समूह अपना के इहाँ सुरक्षित महसूस करेला, ए लोग के इहाँ कवनो प्रकार के खतरा ना बुझाए।

चर्च के उप-पादरी, नोर्बेर्ट कुजूर अग्रेज़ी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहले कि, “हमनी के इहाँ कवनो परेशानी नईखे। अभी तक बिहार में ईसाई लोगन संगे कुछ नईखे भईल।” कुजूर के इशारा छिमेकी देश भारत  के कुछ हिस्सा में ईसाई समुदाय के निशाना बनवला के ओर रहे।

इहाँ के ईसाई समुदाय के घर्म गुरु मानत बाड़े कि, धार्मिक रीति रेवाज़ जगह के मुताबिक होखेला, ए लोग के कहनाम बा कि बेतिया के ईसाई अवुरी गोवा के ईसाई अलग-अलग तरीका से पुजा-पाठ करेले। कुजूर कहले – “रेवाज़, पुजा-पाठ के तरीका स्थानीय होखेला।”

कुजूर कहले – “गोवा समेत दक्षिण भारत में बियाह के घरी ईसाई लईकी सफ़ेद कपड़ा पहिनेली। बेतिया में ईसाई लईकी बियाह के मौका प रंगीन साड़ी, मेहँदी, गहना पहिन के आवेली।”

हिन्दू अवुरी ईसाई धर्म के संगम के बतावत कुजूर कहले कि, “बेतिया में जब बियाह के अंत में पादरी दूल्हा-दुल्हिन के आशीर्वाद देवेले, त ए मौका प दूल्हा अपना दुल्हिन के मांग में सिंदूर भरेला। इ कार्यक्रम ठीक ओसही होखेला जईसे कवनो हिन्दू बियाह में होखेला।”

बेतिया के एगो मशहूर स्कूल के महिला ईसाई प्रिन्सिपल अपना बियाह के याद करत कहली- “हम बियाह के बाद जब ससुराल पहुंचनी त पहिले हमार गोड़ दऊरा में परल, ओकरा बाद मछरी देखावल गईल। इ दुनो कार्यक्रम ठीक ओसही भईल जईसे कवनो हिन्दू परिवार में होखेला।”

” बेतिया में जब बियाह के अंत में पादरी दूल्हा-दुल्हिन के आशीर्वाद देवेले, त ए मौका प दूल्हा अपना दुल्हिन के मांग में सिंदूर भरेला। इ कार्यक्रम ठीक ओसही होखेला जईसे कवनो हिन्दू बियाह में होखेला।”

मालूम रहे कि, चंपारण समेत पूरा भोजपुरी भाषी इलाका में कवनो हिन्दू परिवार के पतोह जब पहिला बेर घरे आवेले त ओकर गोड़ जमीन प ना धरे दिहल जाए। उ दउरा में डेग डालत कोहबर में पहुंचेली। चंपारण में एकरा बाद मछरी देखावल जाला। मछरी के स्थानीय हिन्दू लोग शुभ मानेले।

बेतिया से निकल बिहार अवुरी देश के दूसरा हिस्सा में बसे वाला इहाँ के ईसाई लोग अजूओ अपना ए संस्कार के नईखन भुलाईल।

पटना के सेंट जेवियर्स कॉलेज में पढ़ावे वाली, मैरी अपना बियाह के अनुभव बतावत कहली – “हम बियाह के दिने सफ़ेद-नीला रंग के गाउन पहिनले रहनी, लेकिन ए दिन से पहिले हमरा के भर देह में हल्दी लगावल रहे।”

बेतिया में ईसाई अवुरी हिन्दू धर्म के अयीसन संगम भईल बा कि, ईसाई क्वार्टर में घुमत घरी, हर क्षण आपके अपना ज्ञान प संदेह होई। इहाँ रहेवाली हर औरत के मांग में सिंदूर देखाई दिही, आप देख के नईखी तय कर सकत कि कवन औरत हिन्दू ह, अवुरी कवन ईसाई।

इहे सभ कारण बा कि, हिन्दू अवुरी बौद्ध धर्म से बहुत करीबी नाता राखेवाला ए जिला में धार्मिक तनाव के घटना बहुत कम, या शायद ना देखाई देवे। इहाँ हिन्दू अवुरी ईसाई, एक संगे रहेले, एक निहन बोली बोलेले, एक निहन कपड़ा पहिनेले, एके निहन रेवाज़ मानेले, तबहूँ दुनो अपना-अपना आस्था के मुताबिक अपना-अपना ईश्वर के पुजा करेला।

साभार – टाइम्स ऑफ़ इंडिया 

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