टांग आडाई मन ईच्छित सुख पाई !

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अशोक कुशवाहा

कोई के बिच में टांग आडावल हम दुनिया के सर्बश्रेष्ठ काला मानेनी । टांग आडावल के बहुते उपनाम होखेला भोजपुरी में जईसे की अड़चन,बाधा,हस्तक्षेप औरी काबाब में हडी बनल पर एकर उदेश्य एके गो होला आपन स्वार्थ के पूरा कईल औरी दोसरा के दुःख के माजा उठावल । हम लईकाई में प्रत्यक्ष रूप से टांग आडाई संघतिया लोग के लंगड़ी लगा के चाहे झिटका मार के मुहुकुरिये चाहे गड्चिते गिरावे के काम करी औरी जब गिर जाए लोग त उ लोग पर ताली बाजा के चाहे हंस हंस के माजाक उड़ाई सन । धीरे धीरे समय बदलल औरी युग भी बदलल काहे की बदलाव ही दुनिया के नियम मानन जाला ओहिसे टांग आडावे के तरीका भी प्रत्यक्ष से अदृश्य में बदल गईल । अब लोग दोसरा के काम में टांग त अडईबे करे बाकिर अदृश्य रूप से ।

टांग आडावे वाला काम कौनो नाया काम ना ह । यी काम बहुते सूझ बुझ औरी होसियारी से करेवाला काम ह । अगर एह काम में राउवा योग्य नईखी तब गलती से भी कही आपन टांग ना आडाएम ना त कबो कबो आपन टांग लोग अपने ही अईसन अझुरा लेवे ला की लोग मार के टांग भी तुर देवेला । यी सदियों से अर्थात भगवान जी लोग के समय से नियम पुर्बक चलावल गईल अड़चन ह । हम टांग आडावे वाला कला के पूर्ण योगदान माहारीषी नारद मुनि के देवे नि काहे की उनकर जनम ही भईल रहे सभे कोई के काम में टांग आडावे के औरी दोसरा के परेशानी में डाल के खूब माजा करे के । भगवान कृष्ण पांच पांडव औरी कौरव के बिच में टांग अड़वलन । रावन सीता औरी राम के बिच में टांग घुसईयवलन । रुक्मिणी कृष्ण औरी राधिका के बिच में टांग अड़वली । मोदी जी सोनिया औरी मनमोहन जी के बिच में टांग फसवलन । नेपाल के नेता जी लोग त खैर टांग आडावे के जन्मसिद्ध अधिकारे ले के आइल बा लोग हमनी के देश में टांग आडा के सुख प्राप्ति करेवाला लोग के कौनो कमी नईखे । गाव सामाज से लेके राजनीति चाहे पुरे दुनिया में एकर जाल माकरा नियन फैलल बा । देश में सारकार बानवे में बिपक्षी के टांग आडावल । भाई भाई के बतकही में पडोसी के टांग आडावल । ससुराल के हर काम काज में मेहरारू सन के टांग आडावल । गाव के झगडा में नेता लोग के टांग आडावल । अमेरिका के काम में आतंकबादी लोग के टांग आडावल । भारत के काम में पाकिस्तान के टांग आडावल । सारकारी दफ्तर के काम में सारकारी कर्मचारी लोग के टांग आडावल । टांग आडावला के बहुते बाडका इतिहास बा । टांग आडावल के पीछे एके गो निस्वार्थ भावना होखेला जेकर नाम ह आपन स्वार्थ ।

नेपाल के राजनीति में टांग आडावल सब के बस के बात ना ह । दुगो पार्टी के बिच में तीसरा कोई के टांग आडावेवाला कलाबाजी कोई मामूली नेता ना बाकिर एगो बहुते योग्य ईमानदारी के साथ बिरोध करे वाला टांग अडाऊ नेता के काम ह । नेपाल के राजनीति में भी सदियों से टांग आडावे वाला राजनीति होते आगईल औरी भाबिस्य में भी होते रही । आज भले ही देश के आठ टुका में बाट देहेले बा लोग बाकिर टांग आडावे वाला टांग आडईबे करी औरी आडाही रहल बा । जेकरा यी सहमती से फायदा ना होई उ औरी का करी । कोई जनजाति के नाम पर, कोई मधेश प्रदेश के नाम पर, कोई भाषा के नाम पर, कोई अधिकार के नाम पर त कोई आपन स्वार्थ के नाम पर सब के टांग आडावे के तरीका अलग अलग बा ।

राउवा कौनो सरकारी दफ्तर में जाई सरकारी बाबु राउर काम में टांग आडईहे ओकरा पीछे उनकर स्वार्थ रही लक्ष्मी प्राप्ति । सास, नन्द के बिच में पतोह टांग अडईहे उनकर स्वार्थ रही अशांति । हर काम में टांग अडावाल के माजा ही कुछ और होखेला । गलत काम में कबो टांग ना आडावे के यी बात हमनी के पुरनिया लोग भी कहेला की गलत काम ना करे के ओहिसे हम सभे कोई से निहोरा करेम के कभी भी रौउवा लोगन टांग आडाएम त सही काम में ही आडाएम ना की गलत काम में । कबो भूल के भी कौनो मरद मेहरारू के बिच में मत टांग आडाएम ना त ओकर बड़का कीमत चुकावे के पड़ेला ।

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