दहेज के कारण मुस्लिम समुदाय में भी बढत जा रहल तलाक के समस्या

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मो.रेहताज आलम । रौतहट

मुस्लिम समाज में भी अभीन बहुत किसिम के भेदभाव कायम रहल हए। हिन्दू समुदाय में रहल जईसन बहुत किसिम के भेदभाव मुस्लिम समाज में भी रहल हए। तिलक प्रथा मुस्लिम समुदाय में भी रहल हए। वास्तव में ई प्रथा कवनों भी समाज के लेल उपयुक्त न हए। कवनों भी समाज के लेल ई प्रथा खराब ही मानल जाएत। मुस्लिम समुदाय में भी तिलक प्रथा अत्यधिक रहला के चलते बहुत लोग बेटि जल्मावे ही ना चाहले। बेटि के निकाह(शादी) में तिलक देबे के होएला से बहुत लोग तिलक(दहेज) के बोझ से बचेके लेल बेटि जन्मावे के ना चाहले। एकर विपरित देखल गेला पर बेटा के निकाह में तिलक आवेबाला होएला से बेटा प्रती कवनों चिन्ता केनहु से न कएल जाले ।

तिलक प्रथा के चलते बेटा आ बेटि में आउरो किसिम के भेदभाव भी कायम हए। हमनि के समाज में बेटा के निमन निमन खाना खिआवेके, निमन कपडा पेन्हेला देवेके आ बेटि के निमन खाना न देवेके साथे बेटि के हरदम पिटाई करईत रहेके जईसन भेदभाव भी कभी-कभी केनहु-केनहु देखल जाला। कुछ अवस्था में अईसन भी देखल गेल हए कि बेसि तिलक के लोभ में अधिक बेटा के जलम देल गेल हए। बेसि बेटा जल्मनाई के भी हमनि के समाज में कए बेर अच्छा मानल देखल गइल बा। बेटिके तिलक देवे के परला से बेटि के जन्मावे भी न चाहईअ।

बेटा आ बेटि में भेदभाव जलम के बेर से ही सुरु होईअ जबकी बेटा आ बेटि दुनु एकेगो मतारि के कोख से जन्म लेवले । अबहीओ बहुत समाज में अईसन भी हए कि बेटा जलम भइल त पार्टी देलक । छठियार के समय में लमहर भोज कएलक। बर्थडे मनावेके चलन भी कुछ बढते गेल हए माकिर बेटि के जलम आ छठियार में शायदे कोई अईसन करईत होई। ए सब के प्रभाव कुछ हद तक मुस्लिम समुदाय में भी परल हए। बेटि के जलम होएला पर चिन्ता करईत भी देखल गेला पर अचरच न होई। बेटि के जलमपर मुस्लिम समुदाय में ओतना खुशी मनावे के लेल समाज अभी तैयार न होए सकल हए। माकिर एक दिन अईसन होई कहके विश्वास लेल जा सकईअ।

समाज में अईसन भेदभाव हटनाई जरुरी हई। अईसन भेदभाव हटावे के लेल आदमी में चेतना आ वृद्धि होनाई जरुरी हई। शिक्षा के ज्ञान होनाई ओतने जरुरी हई। चेतना के कमि हमनि के समुदाय में भी रहल हई।

वास्तवमें देखल जाए त तिलक न लेवेके चाहीँ। सब के बेटा बेटि एक समान होईअ। अपना बेटि के निमन से तिलक न देवे सकला पर ससुरार में ओकर सास ससुर पिटेके अवस्था बेहद दुख दाई हई । अपना बेटि के निमन से तिलक न देवे सकला पर ससुरार में ओकर सास ससुर पिटे के जईसन खराब काम करईत सुनल जाईअ कभी कभी । बच्चे से ही भेदभाव सहते आएल लडकी लोग शादी-निकाह के बाद अपना घर में गईला पर भी निमन से बर्ताव सास ना करे ली । कुछ परिवार में मामला ईहा तक बिगड जाईअ कि तिलक के चलते तलाक भी होजाईअ। ई सब में सुधार होनाई जरुरी हई। शिक्षा आ चेतना के विकास से अईसन प्रथा में कमि आवे के हमरा विश्वास हए।

मो.रेहताज आलम
प्रदेश न:-2 रौतहट

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