देश में गृह युद्ध के नेवता ! देत बिया नेपाल सरकार !!

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देश में गृह युद्ध के नेवता ! देत बिया नेपाल सरकार !! 

अशोक कुशवाहा

नेपाली शोसक सारकार के मधेश औरी मधेशी जानता प्रति देखावत रवईया देखला से नेपाली शोसक बर्ग देश में गृह युद्ध के नेवता भेजल जईसन लागता ।

नेपाल सारकार मधेश में जवन अत्याचार, दमन औरी बर्बरता देखा रहल बा एसे देश में सांप्रदायिक हिंसा औरी मधेशी पहाड़ी के बिच गृह युद्ध के समभावना उच्च स्थान पर नजर आवता । झापा, कलेया, सिमरा चाहे अभी गौर में हो रहल हिंसा औरी क्रूरता के देख के दमनकारी सारकार के मधेश औरी मधेशी जानता प्रति के रवईया हर एक मधेशी के बढ़िया से समझ में आगईल बा । पुरखो पुरखा से मधेश औरी मधेशी लोग चुप चाप सहत आईल असहनीय शाही शासन, शोसण, अत्याचार, दमन, क्रूरता आज के युग के मधेशी मौन रह के नईखे सह सकत । अगर स्वतन्त्र देश में सब कोई के आपन हक़ अधिकार खुल के मांगे के अधिकार होखेला तब मधेश में मधेशी जानता के काहे नईखे ? मधेश में ही खाली स्वतंत्रता अस्वतंत्र काहे बा । आज अगर मधेशी लोग आपन हक़ अधिकार के खातिर आवाज उठावता त काहे नेपाली शासक लोग कबो कलैया, कबो सिमरा, कबो झापा त कबो गौर में हिंसा फैलावत बा लोग ।कबो सारकारी दफ्तर ठाऊसारी के नाम पर त कबो मधेशी के नाम पर त कबो डा. सी. के. राऊत के नाम पर । कौनो ना कौनो बहाना से मधेश के धरती औरी मधेशी पर हिंसा हो ही रहल बा ।

गृह मंत्री के सायद यी पता नईखे की मधेश के माटी में जनमल हर एक मधेशी बचपन से ही कमती में पाच गो भाषा (भोजपुरी, मैथली, हिंदी, अंग्रेजी, नेपाली) के ज्ञान हासिल कईले रहेला ।गृह मन्त्रालय में बईठ के सेना के मोहड़ा बना के मधेश औरी मधेशी जानता के साथे खेल रहल खुनी खेल आज सारा मधेशी जानता बहुत बढ़िया से देखता औरी बुझता । राणाशाही त लोप हो गईल सायद आपन पोंछ छोड़ गईल जवन तानाशाही बन के मधेश के ऊपर मंडराता ।१० साल माओबादी गृह युद्ध में का बाकी रह गईल जे अब मधेश के उकसावत बा लोग । 

नेपाल देश के उच्च पद गृह मन्त्रालय के कुर्सी पर बईठल गृह मंत्री नेपाली सेना के कान्ह पर बन्दुक रख के गौर में कईल हत्या का मधेश औरी मधेशी नईखे जानत ? बढ़ बोल बोलेवाला सब नेता, मंत्री काहे कौनो भी मधेश औरी मधेशी के ऊपर हो रहल अत्याचार पर बागड़ बन जाला लोग । देश के लोग के अंग्रेजी बोले ना आवेला कम्पुटर चलावे ना आवेला बड बोल बोलेवाला गृह मंत्री के सायद यी पता नईखे की मधेश के माटी में जनमल हर एक मधेशी बचपन से ही कमती में पाच गो भाषा (भोजपुरी, मैथली, हिंदी, अंग्रेजी, नेपाली) के ज्ञान हासिल कईले रहेला । ईनार के बेंग ईनार के ही सारा संसार समझे । गृह मन्त्रालय में बईठ के सेना के मोहड़ा बना के मधेश औरी मधेशी जानता के साथे खेल रहल खुनी खेल आज सारा मधेशी जानता बहुत बढ़िया से देखता औरी बुझता ।

सायद सभे कोई के मधेशी जानता के मरे के इंतिजार रहेला काहे के मरला के ऊपर राजनीति के शेयर बाजार बड़ा तेजी से ऊपर चढ़ेला । आज मधेश हक़ अधिकार खातिरा आजादी के आग में झुलस रहल बा औरी गृह युद्ध के तरफ बढ़ रहल बा । उत्तर तरफ के सहर सभे त बखूबी देख रहल बिया यी सरकार माकिर जबे दक्षिण के बात आवे त लागेला की सरकार आनर होगेल बिया । अईसन कबले चली, आखिर येह जनता जनार्धन है अउर जनता सब जानती है !!

राणाशाही त लोप हो गईल सायद आपन पोंछ छोड़ गईल जवन तानाशाही बन के मधेश के ऊपर मंडराता । १० साल माओबादी गृह युद्ध में का बाकी रह गईल जे अब मधेश के उकसावत बा लोग । काहे मधेश औरी मधेशी जानता खातिर उठत हक़ अधिकार के दबावे के कोशिस कईल जाता । आज एतना मधेशी लोग मधेश के हक़ अधिकार के लड़ाई में आपन प्राण न्योछावर कई देहले, केतना लहू लुहान भईले । गौर कांड से आज पूरा मधेश में हक़ अधिकार औरी शोसक बर्ग से आजादी के सुनामी चल रहल बा । शोसक बर्ग लोग अगर मधेश औरी मधेश के हक़ अधिकार प्रति उहे निंदनीय औरी क्रूर रवईया रहल त पुरे देशमें मधेशी पहाड़ी के बिच जातीय गृह युद्ध के कोई नईखे रोक सकत ।

मधेश के कलैया, सिमरा, झापा चाहे गौर कौनो भी काण्ड के ऊपर दू चार गो स्थानीय संस्था के छोड़ के कौनो पहाड़ी या मधेशी नेता, चाहे मानव अधिकार, चाहे प्रशासन, चाहे कोई सरकारी या गैर सारकारी संघ संस्था, या कोई भी राजनीतीक दल के कौनो प्रतिकिरिया ना आईल । हर काण्ड में जब कोई मधेशी सहीद हो जाला तब कोई के बक्तब्य सुने के मिले ला । सायद सभे कोई के मधेशी जानता के मरे के इंतिजार रहेला काहे के मरला के ऊपर राजनीति के शेयर बाजार बड़ा तेजी से ऊपर चढ़ेला । आज मधेश के हर सच्चा मधेशी जानता राजनीती में लागल मधेशी नेता लोग के दिल से सारापत बा लोग । कलैया, सिमरा, झापा, गौर काण्ड में आपन मधेशी भाई पर हो रहल कठोर अत्याचार, हत्या, हिंसा औरी अकाल्पनिक क्रूरता के ऊपर एक शब्द कोई नेता लोग ना बोलल । एकर एके गो वजह बा सत्ता के मोह औरी आपन राजनितिक जिन्दगी बचावे खतिरा फिरंगियन के तलुवा चाटे के । आज मधेश हक़ अधिकार खातिरा आजादी के आग में झुलस रहल बा औरी गृह युद्ध के तरफ बढ़ रहल बा । अगर आज सारा मधेशी एक जुट ना होखिये त मधेश पर दिन पर दिन बढ़ रहल अत्याचार बढ़ते जाई ओकरा बाद मधेशी जानता हक़ के लड़ाई खतिरा युद्ध के रणभूमि में उतरही के पड़ी ।

आज जवन किसिम से काठमांडू में बैठल बैठल सेवा केंद्र सारे के नाम पर या केंद्र बिस्तर करके नाम पर धमाधम निर्णय करत बाड़े उ सत्य असत्य से भी जादे नियत में खोट भईल स्पस्ट नजर आवत बा । अगर सचमे बिस्तार करके बा त दुनु तरफ करी, सभे केंद्र काहे खाली उत्तर में सारल जात बा ? सभे सेवा केंद्र पहाड़ी बस्ती वोर ही खाली काहे लेजायील जात बा , का मधेश के बिकट आ घाना बस्ती नइखे दिखाई देत सरकार के । अगर नियात ठीक रहित त रौतहट जिल्ला में ही देखते बंकुल, पिपरा ,कोपवा जईसन बिकट छेत्र  ?  अगर  आख  ठीक रहित त देखते पर्सा जिल्ला के पोखरिया जवन की नगरपालिका घोषणा होगेल बा माकिर उनकर आख वोहिजाने ना जाई कहे की ईहा मधेशी बहुल छेत्र बा । ईन्करा त खाली नजर आवेला बारा के सिमरा, रौतहट के चपुर , महोतारी के बर्दिबास , सुनसरी के इटहरी आ धरान  वोइसेही भैरहवा से बुटवल , नेपालगंज से कोहलपुर काहे के यी सभे सहर में पहाड़ी के बहुलता बा । बिश्वास करी अगर पर्सा जिल्लामे सेवा केंद्र बीरगंज से नइखे सारेके निर्णय भईल त एकर कारण एके ह की पर्सा जिल्ला में पहाड़ी बहुलता के कवनो दोसर सहर नइखे ना त कलेया, गौर कांड पर्सा में भी जरुरे रचते यी सरकार । 

जरुरी यी बा की जब देश अस्थिर संक्रमण काल में बा आ जल्दिहे संघियता में जाये के तय बा त ऐसन दीर्घकालीन निर्णय लेला के का जल्दबाजी देखलस यी सरकार ? सरकार के बिकास के काम छोडके, सारा संसार के काम छोडके एइसने बिबादित निर्णय लेत रही त जनता जनार्धन के जादे दिन चुप नइखे रह्सकत काहेकी  “जनता सब जानती है !!!” 

पहाड़ो की ज्वालामुखी से ना कभी डरे थे तो अब क्या डरेंगे । हक़ अधिकार के लिए हम अब सारी दुनिया से भी लड़ेंगे ॥

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