नारायणी अस्पताल के सेवा शुल्क वृद्धि के भईल विरोध, सरकारी अस्पताल ही महँगा होजाई त काहा जाई गरीब जनता – अगुवा लोग के प्रश्न

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वीरगंज, चैत ७ –

मध्य तराई आ नेपाल-भारत सिमा क्षेत्र के जनता के स्वास्थ्य उपचार खातिर केन्द्र के रुपमे स्थापित रहल नारायणी उप-क्षेत्रीय अस्पताल मे भईल शुल्क वृद्धि के अनेकन स्थानीय संघ संस्था अउरी नागरिक समाज के अगुवा लोग द्वारा बिरोध भईल बा।

नागरिक समाज के अगुवा अउरी युवा नेता ओमप्रकाश सर्राफ अस्पताल द्वारा लेहल गईल उक्त कदम के कडा बिरोध करत शुल्क वृद्धि के निर्णय तुरुन्त खारेज करेके माग कईले बानी । जहाँ संसार भर सामुदायिक अस्पताल सबके सेवा नि:शुल्क होखत जारहल बा उहवे लाखों जनता के स्वास्थ्य सेवा देवेवाला ई अस्पताल मे उल्टे शुल्क वृद्धि कईल अमानविय कदम हवे ऊहा के बतईनि ।

नागरिक संवाद मंच के संयोजक समेत रहल सर्राफ अस्पताल मे भईल अनियमित शुल्क वृद्ध के बारे स्थानीय जनप्रतिनिधि आ प्रशासन के ध्यानाकर्षण करावे के बतावत निर्णय फिर्ता ना कइला पर कडा प्रतिकार करेके समेत जनवनी । बिगत दु वर्ष से संचालित नरायणी उप-क्षेत्रीय अस्पताल बिकास सहयोग अभियान (हेल्प डेस्क)के संयोजक समेत रहल सर्राफ अस्पताल परिसर के निजि औसधि पसल सब भी बन्द भईल अवस्था मे समेत अस्पताल द्वारा संचालित औसधि पसल मे आवश्यक औषधि उपलब्ध ना होरहला पर असन्तुष्टि प्रकट करत औषधि के व्यवस्था मे अस्पताल प्रशासन के तदारुकता के साथ् लागेके आग्रह कईनी ।

ओइसही वीरगंज युवा सामज से भी आजू एक प्रेस विज्ञप्ति जारि करत नारायणी उप-क्षेत्रीय अस्पताल मे भईल शुल्क वृद्धि के विरोध भईल बा । समाज के अध्यक्ष कमल चौगाई द्वारा जारि कईल उक्त विज्ञप्ति मे गरिब आ निम्न वर्गीय समुह खातिर सेवा प्राप्त करेवाला अस्पताल भी अगर निजि अस्पताल सरह शुल्क वृद्धि आ रकम असुली करे लागि त उ गरीब जनता काहा जाई, अइसन कईल जनता आ सेवाग्राही लोग के आउर दुख देवल सरह भईल, कहल गईल बा ।

“राज्य द्वारा स्वास्थ्य सेवा के ग्यारेन्टी देहल अवस्था मे ई क्षेत्र के एक मात्र स्तरीय सरकारी अस्पताल से अनेकन सेवा उपर कडा मुल्य वृद्धि करके जनता पर सीधा आक्रमण भईल बा । खास करके गरिब आ निम्न वर्गीय समुह ई अस्पताल मे सेवा लेवे आवे लालोग त अइसन मे सरकारी अस्पताल से भी निजी अस्पताल जैसने शुल्क लेवेके खोजल आम जनता आ सेवाग्राही के आउर पीड़ा देहल सरह हवे’, विज्ञप्ति मे लिखल बा, ‘अस्पताल के आर्थिक सन्तुलन करे खातिर अनावश्यक खर्च कम करे के चाही औरी स्थानीय, प्रदेश आ संघीय सरकार से समन्वय करे के जगह थप नियुक्ति आ भरणपोषण खातिर आम्दानी के श्रोत खाली बढ़वाल खेद जनक बा । अत:सेवाग्राही के ढाड मरकावे के जैसन अब्यवहारिक रुपमे बढावल शुल्क फिर्ता लेवेके माँग कारत बानी सन ।’

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