निती आ नियत दुनु बदलल जरुरी बा 

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सुभास कुमार बैठा

धेश आ मधेशी शब्द अब खाली नेपाल में ही  सिमित ना रह के एह दुनिया के लगभग सब संचार माध्यम के समाचार बनके अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भी एगो चर्चा के विषय बन गइल बा आ ई दूनू शब्द नेपाल के तराई में रहेवाला लोग के पहचान आ शान बनगइल बा । एह दुनिया के कवनो प्रमुख व्यक्ति अब एह दूनू शब्द से अंजान नइखे । अब ई संसार के पता होगइल बा कि मधेश, नेपाल के ऊ भू–भाग ह जेकर नेपाल के इतिहास से बहुत पुरान इतिहास बा आ ऊ जगह नेपाल के दानापानी से लेके लगभग ८० प्रतिशत आवश्यक्ता पुरा करेला काहे कि उपजाऊ जमीन से लेके कल–कारखाना, मुख्य प्रवेश द्वार उहें बा ।

आ साथे–साथ नेपाल के हरेक परिवर्तन में समय के साथे अग्रगामी भूमिका निर्वाह कके परिवर्तन भी करइले बा काहेकि बिना एह जगह के सहभागिता के नेपाल में कवनो परिवर्तन भइले नइखे । आ कल्पना भी कइल मुश्किल बा । दोसर बात इहो बा कि मधेशी नेपाल के हरेक क्रान्ति में अग्रगामी भूमिका निर्वाह कके बलिदानी देलक कि हम एह देश के नागरिक हई, हमार भी ओतने अधिकार मिली जेतना सबका बा, बाकिर ओह दिन के मधेशी प्रतीक्षा करते रह गइल जवन दिन मधेशी के आज लेक ना आइल ।

शुरु से ही एह जगह के नेपाल के शासक वर्ग यानी खस पहाडी समुदाय  दुधगर गाई के रुप में उपयोग करेला , जब जेतना मन कइलक ओतना , जइसे कहियो अन्नदाता के रुप में त कहियो करदाता के रुप में त कहियो भोटदाता के रुप में ।

ई जगह नेपाल के लगभग सब आवश्यकता पुरा करेला फिर भी इहाँ के जानता चाहे जमीन राज्य के लगभग सब सेवा सुविधा से बंचित बा । कहों–कहाें आपना क्षामता योग्यता आ बाध्यता से पुगल भी बा त कहों सैम्पल (देखावा) प्रवृति  कायमें बा । संक्षेप में कहल जाँव त खस आर्य शासक वर्ग इहाँ के जानता के जब भी दास बनावे के ही कोशिस करत आइल बा, बाकिर  ई कब तकले चली ? सब कुछ होते हुए भी हमनी के बाप–दादा ई सब जुलुम सहलक, हमनी भी सहनी, बाकिर हमार बेटा–पोता त ना सही काहे कि दिन पर दिन सबलोग शिक्षित होता, ज्ञान बढ़ता, ऊ सिधे सोची कि एही देश में हमार बाप–दादा देश के सब आवश्यकता पुरा करेला आ  हमहु एही  देश के नागरिक हइँ, बाकिर हमार अधिकार काहे कम बा ? हम काहे अपने देश में मधिशे, भैया, धोती, भेले, पानीपुड़ी  जइसन शब्द से अपहेलित होखिले ? जब कि हमनी त केहु पहाडी के अइसन अपमान जनक  शब्द से सम्बोधित ना करिले ।

जहाँ तकले बात रहल राष्ट्रीयता आ देशभक्ति के त इतिहास उठा के देखो लोग कि देश के शिर झुकावेवाला काम चाहे देश से गद्दारी के काम के कइले बा ? सब त कइले बा पहाडिए लोग ओ में त केहु मधेशी के नाव नइखे  । इहाँ तकले मधेशी त राज्य के हरेक तरिका से सहयोग कके सिवान पर धोती लँगोटी पहिर के बिना हतियार के आपन सिवान के सुरक्षे कइले बा ।  दोसर बात हमनी के भारतीय आ बिहारी कहे वाला लोग आपन पुस्तानी कागज निकाल के देखो आ आपन भ्रम दुर करो लोग काहे कि मधेश के जनकपुर लुम्बिनी, बिराटनगर के इतिहास नेपाल के इतिहास से बहुत ही पुरान बा ।  दोसर बात यूपी बिहार के लोग के का होइ नेपाली नागरिकता ? ऊ लोग काहे इहाँ के नागरिकता ली ? ऊ लोग त हमनी से शिक्षा , रोजगार , विकाश , राज्य के अवसर में बहुते आगे बा । ओह लोग जेतना पुगे में त नेपाली के अभिन बहुते समय लागी ।

देखल जाय त मधेशी सबके हरेक क्रान्ति लड़ला के बाद भी कुछ ना मिलल । सब जइसन के तइसने रह गइल । तब मधेशी सब में धिरे–धिरे चेतना आवे लागल । हाला कि ई मधेशी के अवाज आजे ना उठल बा । बहुत दिन पहिले से ही उठल बा जेकरा के केहु तरे राज्य दबा के चाहे अनेकन बाहाना बना के रखलक । जब देश में संविधान सभा के चुनाव होके लोकतन्त्र आइल तब फेर से मधेशी के , राज्य ( पहाडी शासक वर्ग) द्वारा उहे सब के निरंतरता मिलल जवन लगभग पहिले से ही रहे । जब कि सब राजनीतिक पार्टी आपना–आपना घोषणा पत्र में मधेशी आ मधेश के स्वर्ग के सपना देखइले रहे । सब मधेश के अनेकन सपना से सजइले रहे ।

बाकिर जब संविधान बनल तब सब असलियत पर आके आपना हक अधिकार के सुरक्षित कके सिर्फÞ आपना के मध्यनजर राख के बनइलक लोग । अर्थात छोटकरी में कहल जाँव त ई नेपाल के प्रमुख दल काँग्रेस , एमाले आ एमाओवादी के खस आर्य पहाडी बाभन (बाहुन) लोग जबरदस्ती आपना मन से अपना के देख के बनावल संविधान नेपाली जानता पर लाद देलक । जेकर पहिलाका दिने ही अनेकन किसिम के विरोद्ध भइल । काहे कि ऊ संविधान ८० प्रतिशत नेपाली के ना छुअलक । इहाँ तकले कि मधेशी हक अधिकार के मध्यनजर राखत पहिले भइल मधेशी दल आ सरकार के बिच के सम्झौता के भी लतिआवल गइल । जवन ५४ से उपर मधेशी के कुर्वानी से मिलल रहे ।

एहीसे मधेशी लोग भी आपन जोडदार शान्तिपूर्ण विरोध कइलक । जवना में सिर्फ मधेशी दल ही ना, बल्कि सारा मधेशी भी आपन समर्थन जनइलक । काहे कि काँग्रेस , एमाले आ एमाओवादी के चुनाव में प्राप्त मत (भोट) के दोबर लोग संसार के सबसे बडका मानव जंजीर आ विरगंज के शहीद श्रद्धांजली सभा में रहे ।

फिर भी नेपाल के शासक वर्ग अर्थात पहाड़ी खस आर्य ब्राह्मण लोग ओकरा के अनेकन उपनाम आ बहाना बनाके ओकरा के दबावे के खातिर आपन सब शक्ति लगा देले बा । इहाँ तकले कि आन्दोलन के दबावे खातिर आपन कवनो कसर चाहे शक्ति नइखे छोड़ले । एह आन्दोलन में सरकार द्वारा ना कवनो मानवता ना कवनो मानवाधिकार के पालन भइल बा । सिधा मधेशी के कपार या त छाती पर गोली मारल गइल बा । इहाँ तकले कि नदान लइका सब के भी घर में समा के पकड़–पकड़ के गोली मारल गइल बा, जब कि ऊ लइका सब आन्दोलन के “अ” भी ना जानत रहे । आजु ५ महिना से बंद नेपाल में मधेश के का हाल बा ? केहु सरकार चाहे शासक वर्ग पुछलक ?

दुनिया के इतिहास बा बन्दुक के गोली से व्यक्ति के, समुदाय के दबावल जा सकेला, बाकिर अवाज, अवाम आ विचार के ना । जब भी जहाँ भी दबावे के कोशिश भइल बा त ऊ दोसर रुप लेले बा जवन राज्य के हक में बाड़ा ही नोक्सान भइल बा ।

सुभाष कुमार बैठा
बेलदारी ५ बारा , नेपाल
हाल  पेन्सलभेनिया , अमेरीका
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