‘नेपालीय भोजपुरी साहित्य के भीष्मपितामह’ दीपनारायण मिश्र के श्रद्धांजलीसभा करे के निर्णय

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    वीरगंज, २४ बैसाख ।

    नेपालीय भोजपुरी साहित्य के ‘भीष्मपितामह’ आ बरिष्ट साहित्यकार पण्डित दीपनारायण मिश्र के बृहत श्रद्धांजली सभा होखेवाला बा ।

    वीरगंज के मुर्ली बगईचा मे स्तंभकार चंद्रकिशोर के अध्यक्षता मे बइठल बइठक मे आवेवाला बैसाख २८ गते शनिचर के दिने स्वर्गीय मिश्र के श्रद्धांजली सभा के आयोजना करे के निर्णय कईल गईल । बियफे के दिने रात मे १० बज के ३८ मिनट पर वीरगंज के रामटोल मे उनकर आपने निवास पर ८३ बरस के उमर मे देहान्त हो गईल रहे ।

    बइठक मे एक मिनट मौन धारण कईला के बाद बतकही शुरू भईल रहे । बइठक के निर्णय के हिसाब से अनेकन काम काज खातिर सभे कोई मे जिम्मेवारी के बांटल गइल रहे ।

    बईठक  मे नेपाल भोजपुरी समाज, नेपाल हिन्दी साहित्य परिषद, भोजपुरी टाइम्स दैनिक पत्रिका, संस्कृति, सहयोगी नेपाल, आपन वीरगंज मेडिया ग्रुप प्रा. लि. सजक सहित के संस्था के प्रतिनिधि लोग के उपस्थिती रहे । मिश्रा नया पूस्ता के आगा बाढ़ावे खातिर २०२९ साल मे ही नेपाल भोजपुरी समाज आ ओकरा बाद बङ्ग्मय प्रतिष्ठान आ नेपाल हिन्दी साहित्य परिषद जईसन संस्था सब के स्थापित कईले रहले । बइठक के सहभागी लोग मिश्रा के ‘ नेपालीय भोजपूरी के जग निर्माता’ कह के याद कईले लोग ।

    पण्डित मिश्र पंचायती ब्यावस्था मे नेपाली भाषा मे भी पत्रपत्रिका निकाले के बहुते समस्या झेले के परे ओह बेरा पण्डित मिश्र खुदे सम्पादक बन के भोजपुरी भाषा मे ‘सामाद’ नाम के पत्रिका निकल ले रहले जेकरा बदे उनका जेल भी जाएके पडल रहे ।

    अवकास प्राप्त शिक्षक रहल पण्डित मिश्र आर्थिक अभाव मे जीवन निर्वाह करतेहुवे भी भोजपुरी के सेवा मे लागत लागत रह गईले । पण्डित मिश्र दर्जन भर से बहुति कृति भोजपुरी मे लिखले बाड़े । जेमे से अजामिल भोजपुरी खण्डकाब्य, दोहा नीति सार, फुलझरी, अंजुरी के फूल, ससुरार सहित के कबिता संग्रह आ करनिभरनी कथा संग्रह प्रमुख बा ।

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