पुजारी के हत्या के बाद से वाड अध्यक्ष ही फरार

 पुजारी के हत्या के बाद से वाड अध्यक्ष ही फरार

रौतहट, १४ भादो ।

रौतहट के माधव नारायण नगरपालिका – २, खेसरिया टोला मे रहल हनुमान मन्दिर के पुजारी ६४ साल के श्रीराम साह के भादो ३ गते रात के पौने ९ बजे के करीब अज्ञात समूह गोली मार के हत्या कर देहले रहे । हत्या मे सामील के खोजतलास के क्रम मे प्रहरी के अनुसन्धान देवाही गोनाही नगरपालिका वाड नम्बर १ के वाड अध्यक्ष शेख नरुल्लाह ओर जात देखल गइल ।

नरुल्लाह जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) के स्थानीय नेता हउवे । उनकर करुनिया मे घर बा । २०७४ के स्थानीय निर्वाचन मे उ तत्कालीन संघीय समाजवादी पार्टी के तरफ से चुनाव जीतले रहले । प्रदेश २ प्रहरी कार्यालय जनकपुर आ जिल्ला प्रहरी कार्यालय रौतहट के अनुसन्धान टोली वाड अध्यक्ष नरुल्लाह के खोज मे जुटल पर नरुल्लाह पुजारी के हत्या के दिन से ही घरे नईखन आइल । उनका संघही दोसार ३ जने अउरी फरार बा लोग प्रहरी श्रोत जानकारी देहले बा । उ घटना घटल दिन से ही घर से भाग के भारत पहुच चुकल बाड़े प्रहरी अनुमान कईले बा ।

जिल्ला प्रहरी कार्यालय रौतहट आ प्रदेश प्रहरी कार्यालय जनकपुर के श्रोत के हिसाब से नरुल्लाह चुनाव से पहिले तक रौतहट प्रहरी के सुराकी मे बारम्बार प्रयोग भइल व्यक्ति हउवे । २०६४ साल से ही प्रहरी अधिकारीयन के प्रभाव मे राख़ के अपराध के धन्दा चलावत आइल उ पिछला बेर से ही हत्या के आरोप मे प्रहरी द्वारा खोजतालस के सूची मे परला के बाद से फरार बाड़े ।

पुजारी के हत्या भइला के कुछ हप्ता पहिले नरुल्लाह कुछ आदमी के साथे मन्दिर लगे आइल रहले अनुसन्धान मे सामील श्रोत द्वारा जानकारी मिलल बा । ओह बेरा पुजारी से कावनों बात्त के ले के कुछ काहासुनी भी भइल रहे ।

देवाही गोनाही के मेयर धर्मेन्द्र पटेल भी वाड अध्यक्ष नरुल्लाह सम्पर्क विहीन बाड़े बतवले । कुछ समय से उ सम्पर्क मे नईखन, कोरोना संक्रमण के समय मे जनप्रतिनिधि ही सम्पर्क विहीन भइला से गंभीर शंका उपशंका भइल बा, उ कहले, ‘ हम बहुत बेर सम्पर्क करे के प्रयास कईनी पर ना होखे सकल । पुजारी के हत्या मे नरुल्लाह जी के भी नाम जुडल बा कह के सुनले बानी । मेयर पटेल जसपा के रौतहट जिल्ला संयोजक भी हउवे । अभी फरार रहल उ वाड अध्यक्ष बाहेक पार्टी के दोसर भूमिका मे नईखन मेयर पटेल जानकारी देहले ।

जिल्ला भीतर होखेवाला आपराधिक गतिविधि के प्रहरी मे सुराकी देहला के बाद नरुल्लाह २०७० से पहिले खुबे चर्चा मे रहले पर ऊपर से प्रहरी के सुराकी बनल उ भितरिया धन्दा करत आपन आपराध के जाल फैलावल देखला के बाद ६ साल पहिले उनका के प्रहरी पकड़े के प्रयास कइले रहे । भाग के बाहर रहत आइल नरुल्लाह बाद मे संघीय समाजवादी पार्टी से चुनाव मे उठ के वाड अध्यक्ष मे जीतल रहले । चुनाव जीते मे भी उ प्रहरी के सुराकी के सम्बंध के ही प्रयोग कईले रहले श्रोत से जानकारी प्राप्त भइल बा ।

नरुल्लाह के ही वाड के सदस्य कृष्णनन्दन यादव दस दिन से उ सम्पर्कविहीन बाड़े कहले । नरूल्लाह जी के फोन भी नईखे लागत, वाड मे कोई के जिम्मेवारी भी नईखन देहले, हमनी सिफारिस के कागज मे दस्तखत करे खातिर कय बेर फोन करे के प्रयास कईनी, उ कहले, ‘ सम्पर्क नईखे होखे सकत । पुजारी के हत्या मे नरूलाह जी के भी नाम आइल बा सुनले बानी हमहू यादव बतवले ।

प्रहरी देशभर अपराध अनुसन्धान तथा नियन्त्रण खातिर घुमुवा प्रहरी खाटावत आइल बा । घुमुवा संघही प्रहरी संदिग्ध व्यक्तिसब के सुराकी के रूप मे भी प्रयोग करत आइल बा । ओइसन के गलत धन्दा से प्रहरी संगठन ही बदनाम होत आइल बा । पुजारी के हत्या के बाद फारार रहल नरुल्लाह एकर उदाहरण बाड़े ।

घुमुवा आ सुराकी परिचालन के मापदण्ड नईखे :

पुजारी हत्या के घटना से रौतहट मे प्रहरी द्वारा ही सुराकी के रूप मे परिचालित कईल व्यक्ति द्वारा पुजारी के हत्या के आशंका से प्रहरी निकाय कईसन व्यक्ति के सुराकी मे खाटावेला यी बात के स्पष्ट कर देहले बा । सालो से सुराकी परिचालन सम्बन्धी निर्देशिका बनावे के मांग उठावला के बाद भी गृह मन्त्रालय ओकरा प्रति चुप बा । बितल साल सुराकी आ सदा पोसाक के प्रहरी परिचालन सम्बंध मे कार्यविधि बना के प्रहरी प्रधान कार्यालय स्वीकृति खातिर गृह मे भेजले रहे । पर उ अभी तक पारित नईखे होखे सकल उच्च श्रोत जानकारी देहलख । यी बिषय पर निवर्तमान प्रहरी महानिरीक्षक ठाकुर प्रसाद ज्ञवाली कुछों ना बोले के चहलन । पर उ सुराकी आ सादा पोसाक के सुरक्षाकर्मी परिचालन के व्यवस्थित बनावे खातिर प्रहरी नेतृत्व के विश्वास करे के साथ साथे जवाफदेही बनावे के बतवले ।

नेतृत्व से यदि विश्वास हटजाई त दण्ड के भागीदारी उहे होई उनकर कहनाम रहल । ज्ञवाली घुमुवा आ सुराकी के गम्भीर किसिम के अपराध मे ही खाटावे के आ आर्थिक ममिला से जुडल बिषय से अलग राखल जरूरी बा कहले । नेतृत्व सही आ पारदर्शी होई तबे नीचे के प्रहरी पद के दुरुपयोग भा अपराध करे के हिम्मत ना करी ज्ञवाली कहले, ‘ ओहि से नेतृत्व के विश्वास जवाफदेही आ दण्ड के भागीदार होखे के कार्यविधि आ मापदण्ड भइल सुराकी आ घुमुवा से सिर्जित बदनामी खतम होई । उ अपने प्रदेश १ के प्रमुख रहल समय केन्द्र से खटल घुमुवा सिवान क्षेत्र मे आ आर्थिक ममिला से जुडल बिषय मे प्रवेश ही ना देहले रहले उ स्पष्ट कईले ।

३० साल के प्रहरी सेवा के अधिकांश समय सादा पोशाक मे रह के काम करेवाला यूनिट मे बितावल प्रहरी पूर्वडीआईजी हेमन्त मल्ल अपराध अनुसन्धान तथा नियन्त्रण मे घुमुवा आ सुराकी परिचालन के अवधारणा सही बा पर ओकरा के संचालन करेवाला नेतृत्व गलत भइला के चलते पूरा संयंत्र ही बदनाम भइल बा । घुमुवा आ सुराकी परिचालन के अवधारणा अपराध अनुसन्धान आ नियन्त्रण के ह पर यीहा आर्थिक संकलन आ शक्ति आर्जन तथा विरोधी पक्ष के खतम करे के प्रयोजन खातिर उ शक्ति के दुरुपयोग भइल, पूर्वडीआईजी मल्ल कहले, ‘ एगो व्यवशायिक आ ईमानदार अधिकृत कावनों यूनिट मे गइला पर उहे घुमुवा आ सुराकी सही प्रयोजन मे परिचालन होई कहले । बदनामी छवि कमाइल अधिकृत गइला पर विवाद त होखबे करी ।

प्रहरी प्रवक्ता एसएसपी कुवेर कड़ायत भी सिभील सुराकी सम्बन्धी व्यवस्था संस्थागत रूप मे आवश्यक बा बतवले । अभी अइसन प्रावधान संस्थागत या कानूनी हैसियत मे ना रहल बा उनकर कहनाम रहे । खास कर के शहरी सिवान क्षेत्र मे सरुवा हो के जाएवाला प्रहरी नेतृत्व के छवि व्यवशायिक चरित्र के रहे के परल उनकर कहनाम रहल । मल्ल सुराकी के रूप मे परिचालित सर्वसाधारण अपराध के भेष मे खटला से ओकरा खातिर खाटावल नेतृत्व चालाकिपूर्ण आ सतर्क रहल बहुत जरूरी बा बतवले ।

२०६६ से २०६८ तक रौतहट प्रहरी प्रमुख हो के रहल दोसर पूर्वडीआईजी पीताम्बर अधिकारी सुराकी आ घुमुवा आपराधिक चरित्र आ व्यवहार के कारण पूरा प्रहरी संगठन बदनाम भइल बा स्वीकार कईले । सुराकी के रूप मे सम्पर्क मे आवेवाला व्यक्ति बाहर एक आ भीतर दोसर रूप भइला से ओकरा प्रति नेतृत्व्व मे रहल अधिकारी के देखे के चाहि, बदनामी भा व्यवशायिक चरित्र कवन चाही उहे से पता चलेला, उ कहले, ‘ ओकरा खातिर प्रहरी नेतृत्व से ही चरित्र सुधार कईल बहुत जरूरी बा  ।

व्यक्ति संगत घुमुवा :

नेपाल प्रहरी मे विशेष किसिम के आपराध अनुसन्धान तथा नियन्त्रण मे काम करेवाला दर्जनो यूनिट बा । केन्द्रीय अनुसंधान ब्यूरो, विशेष ब्यूरो, साइबर ब्यूरो, लागू औषध अनुसन्धान ब्यूरो, उपत्यका के महानगरीय अपराध महाशाखा जईसन यूनिट के चरित्र ही सादा पोशाक मे परिचालित होखे के ह ।

यी सारा यूनिट के काम करवाही भी सुराकी आ हुलिया परिवर्तन कर के खटे के किसीम के ह । एकरा बाहेक जिल्ला प्रहरी कार्यालय के मुद्दा शाखा मे काम करेवाला अधिकान्स के सादा पोशाक मे ही खटेके ही नियम अनुसार के कार्यविधि ही जारी भइल बा । पर यी यूनिट बाहेक प्रहरी महानरीक्षक से ले के महानगरीय कार्यालय, प्रदेश संघीय इकाई, जिल्ला, बृत/प्रभाग तथा वडा कार्यालय प्रमुख अपना मनमौजी हिसाब से सादा पोशाक मे प्रहरी खटावत आइल बा लोग । आवरण मे सूचना संकलन आ मातहत जनशक्ति के काम करवाही के निगरानी के खातिर संयन्त्र परिचालन करे के दाबी प्रहरी के बा  ।

पर एकर खास उदेश्य आर्थिक आर्जन से जुटल बा । सादा पोसाक के सुरक्षाकर्मी तस्करी, चोरीसीकार आ अउरी दोसार जघन्य अपराध मे सामील रहे के बात आवत रहेला । लागू औषध, जालीनोट, सोना तस्करी, सीमा अपराध, जबरजसती वसूली समेत के धन्दा मे बारम्बार घुमुवा प्रहरी परत आइल बा लोग । प्रहरी प्रवक्ता कुवेर कड़ायत व्यवशायिक चरित्र आ पदीय मर्यादाविपरीत काम करेवाला सादा पोसाक या दोसार प्रहरी जइसन भी करवाही के दायरा मे लियावे के बतवले । पद के दुरुपयोग करेवाला अधिकार कोई के भी नईखे, जे दुरुपयोग कईले बा या अपराध मे सामील बा उनका करवाही के भागीदार होखही के परी आ भइल भी बा ।

अपराध मे सुराकी :

महानगरीय प्रहरी कार्यालय के प्रमुख डीआईजी विश्वराज पोखरेल २०७६ पुष १७ गते उपत्यका मे कार्यरत २५ घुमुवा प्रहरी के वापस बोलवले । ओकर कारण रहे, घुमुवा के नाम मे आपराधिक समूह से मिल के वसूली कईल । सूचना संकलन खातिर खटावल कुछ घुमुवा पद के दुरुपयोग करत आपराधिक धन्दा मे सामील भइल देखला के बाद सब कोई के एके बेर वापस बोला के अप्रेसनल काम मे खाटावल गईल ।

बितल सावन १३ गते सुनधारा के सोनाचानी तस्करी प्रकरण मे दरबार मार्ग बृत के दो गो घुमुवा प्रहरी बहादुर सिंह कड़ायत आ प्रसन्न श्रेष्ठ आपराधिक समूह से मिल के लुटपाट मे सामील के बाद पकड़ाइल रहले । भारत गुजरात के रहनियार काठमाण्डू रहत आइल देवान सिंह पटेल आ कौशल पटेल से मिल के घुमुवा प्रहरी सोना लुटपाट के योजना बनवले रहले । कौशल प्रहरी के सुराकी के भूमिका मे रहले । २०६० साल के बाद प्रहरी सुराकी बन के अपना विरोधी तह लागावे मे सक्रिय बनल बारा के प्रस्टोका के अलताफ काहाएवाला इलताफ़ हुसैन अंसारी बाद मे कुख्यात जालिनोट तस्कर रहले पता चलल । इलताफ़ बारा, पर्सा, रौतहट समेत सिवान से सटल जिल्लन मे रह के ऊहा सरुवा हो के जाए वाला अधिकान्स प्रहरी के विश्वासी सुराकी भी दारा गइल बा लोग ।

उहे इलताफ़ जालिनोट कारोबारी के रूप मे बाद मे सक्रिय बनले । उनका के सुराकी परिचालन करेवाला कुछ उच्च प्रहरी अधिकारीलोग भी जाली नोट कारोबार मे शंका के घेरा मे बा लोग । ओतने ना २०७० आसार २३ गते कोटेश्वर से ३५ केजी सोना बरामद भइल । सोना बरामद साथे ही तस्कर आ प्रहरी बीच कमिसन विवाद चारुओर छीटागइल । ३५ केजी सोना कांड के रूप मे पहिचान बनवले उ घटना मे सुराकी कमिसन ना मिलला के कारण राज्य द्वारा देवेवाला प्रोत्साहन भता कटौती हो गइल । ओकरा से पहिले जेतना भी तस्करी के सामान बरामद कईला पर भी सुराकी के १५ प्रतिशत आ अनुसन्धान करेवाला के १० प्रतिशत भता मिलत रहे । उहे काण्ड उ व्यवस्था संशोधन कर के जेतना समान बरामद कईला पर भी १० लाख या १५ प्रतिशत जवन कम आई उहे खाली देवे के व्यवस्था लियावल गइल ।

२०७४ फागुन १८ गते ३३ केजी सोना काण्ड मे सनम शाक्य के हत्या भइल । जून ३ केजी सोना काण्ड के रूप मे अभी भी चर्चा मे बा । घुमुवा प्रहरी आ उनका मार्फत सूचना संकलन मे सहयोगी के रूपमे देखल गईल व्यक्ति आपराध धन्दा मे कइसे फंसले यी सब ही कुछ सत्य बात  । श्रोत : कान्तिपुर

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