प्रदेश नं २ के भाषिक अवस्था आ नामाकरण विवाद

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    आनन्द अस्तित्व

    दु नं प्रदेश के नामाकरण आ आगामी कार्यदिशा खातिर संयम आ वर्तमान परिस्थिति के आकलन कर के आगे बढ़ला में सबकर भलाई बा । हमनी काहे बिसर जा रहलबानी सँ जे ई संघियता के संरचना आ संविधान, संविधान जारी होखे के प्रक्रिया पर हमनी सभी केहु ६ महिना से उपर आपन जान के हथेली पर राख के आन्दोलन कइले रहनी । केतना लोग सहादत प्राप्त कइलक । सब केहु के पता बा कि ई संरचना केकरो पसन्द नइखे ।

    तब काहे इहे संरचना के अन्तिम मान के हमनी आपन–आपन भाषिक/साँस्कृतिक नाम भा पहचान खातिर आन्दोलन शुरू कइले बानी ? जबकि केकरो भाषिक/साँस्कृतिक पहचान संरचना पूर्ण रूप में मिलल नइखे, केकरो संरचना बा त ओकरा अधिकार नइखे । जइसे मैथिली भाषिक क्षेत्र दू टुत्रा में बटा गइल बा त बा त भोजपुरी चार टुक्रा में ।

    यदि हमनी के अधिकार पूर्ण रुप से मिल गइल रहित त भाषिक साँस्कृतिक नाम के ही आवश्यक्ता बा, बाकिर जब लेक पूर्ण अधिकार नइखे मिलत तब लेक जवन नाम भा संरचना हमनी के भाषिक/साँस्कृतिक पहचान के पूर्ण रूप में लौटा पावे ओकरा खातिर उर्जा प्राप्त होखेवाला नाम भा राजनीति के आवश्यक्ता बा । हमनी के आज के आवश्यक्ता ई बा कि वर्तमान में मैथिली बाहुल्य क्षेत्र, भोजपुरी बाहुल्य क्षेत्र, अवधी बाहुल्य क्षेत्र थारू बाहुल्य क्षेत्र भा अन्य के भी पूर्ण अधिकार खातिर २ नं प्रदेश के आधार भूमि बनावल जाँव । एइसन एकता कायम राखल जाँव जेमें जनकपुर खातिर वीरगंज लड़ो आ नेपालगंज खातिर विराटनगर ।

    २ नं प्रदेश के मुड़ी पर खाली २ नं प्रदेश के जिम्मेवारी नइखे बल्कि बिहान के राजनीति, देश में वास्तविक लोकतन्त्र के स्थापना, देश में समाजिक न्याय के स्थापना लगायत सम्पूर्ण मधेशीयन के पूर्ण अधिकार खातिर प्रतिरोधात्मक लडाई के जिम्मेवारी भी बा । २ नं प्रदेश के ही हमनी पूर्ण मान लेहल जाई क त एमें बहुत द्वंध के बीजारोपन बा वर्तमानमुखी रूप में देखला पर, बाकिर भविष्यमूखि देखला पर ई सारा देश में वास्तविक लोकतन्त्र के स्थापना खातिर उर्जा के केन्द्र ह ।


    अब २ नं प्रदेश के नामाकरण के सन्दर्भ में बहुत सारा नाम समाजिक संजाल भा चाय गप में सुने के मिल रहल बा जेमे से प्रमुखतः मधेश, मध्य मधेश, मिथिला, मिथिला–मधेश, मिथिला–भोजपुरा, विदेह, जनक, जानकी, तिरहुत, तिरहुत–मधेश, विदेह–मधेश प्रदेश इत्यादी नाम चर्चा में बा जेमे सब से बेसी संस्थागत तरिका से मैथिली भाषा अभियानी लोग द्वारा मिथिला प्रदेश, मधेशी पार्टी द्वारा मधेश भा मध्य मधेश, तराई मधेश राष्ट्रिय परिषद द्वारा मध्य मधेश, नेपाली काँग्रेस के कुछ नेता लोग द्वारा मिथिला प्रदेश भा मिथिला–भोजपुरा, नेपाल कम्न्युष्ट पार्टी के कुछ नेता लोग द्वारा मधेश बाहेक कवनो नाम पर समर्थन होखी वाला मनोविज्ञान देखाइ दे रहल बा ।

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