बजड़ी से बजड़ भईल भाई-बहीन के सनेह, धूमधाम से मनल गोवर्धन पूजा

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वीरगंज, कातिक २३

आजू शुकरवार के दिन पूरा मधेश में बहीनलोग गोवर्धन पूजा का बाद भाई के बजड़ी खिया के उनकर लमहर उमिर के कामना कईलख लोग। गोवर्धन पूजा के लेके आजू सवेरही से ही औरतन लोग नहा धोके गाँव-शहर के चउक-चौराहा प गाई के गोबर से मूर्ति बनाके ओकरा के कूटके भाईयन लोग के दीर्घायु होखे के कामना कईलख लोग।

गोवर्धन पूजा का दिन से ही हिंदू धर्मशास्त्र के अनुसार शादी-बियाह भा अन्य कवनो भी शुभ लगन के शुरुआत हो जाला।भोजपुरिया समाज में ई भी मान्यता बा जे लईका के वियाह का उमेर हो गइला के बादो बियाह नईखे होखत त ऊ लईका के गोधन कुटाई के बखत गोधन के लाँघल जाला । जवना से बियाह के लगन मज़बूत होला।

मधेश के सभे ज़िला के विभिन्न गाँव-शहर में गोवर्धन पूजा के तईयारी १-२ दिन पहिलही से शुरू हो गईल रहे। सभे ज़नाना आ लईकीयन घर के अगाड़ी भगवान गोवर्धन के मूर्ति स्थापित कईले रहे लोग।

गोधन कूटला का बाद बहीनलोग भाईलोग के माथा प टीका लगाके बजड़ी के रूप में चना आ मिठाई खिवलख लोग। बजड़ी भाई के एके बेर मे निले के खाए के होला जेकर मान्यता बा की भाई बजड़ी जईसने बजजड़ होखिहन । बजड़ी के अजरता अमरता के प्रतीक मानल जाला ।

एह समूचा धार्मिक अनुष्ठान से भाई-बहीन में स्नेह बढ़ेला। बहीनलोग के आशीर्वाद से भाईयन के उमिर बढ़े के साथे-साथे यश के प्राप्ति भी होला।

वीरगंज शहर के साथे-साथे आस-पास के कईयन गाँव में औरतन आ लईकियन लोगिन गोबर से बनल भगवान गोवर्धन के कूटे के साथ पूजा-पाठ शुरू कईलख लोग। औरतन-लईकियन लोग सज-सँवर के पूरा हर्षोल्लास से नया-नया कपड़ा पहिनके सबेरे सूर्यदय होखे से पहिलही गोवर्धन के पूजा कईली आ विधि-विधान से कूटे लागली आ गीत गावेली। गोधन के गोबर, रेंगनी के काट आ हर के पालो भा हरिस राख़ के गोधन कुटाला । समवेत स्वर में जब गोवर्धन भगवान के गीत गूँजल त पूरा वातावरण धर्म, स्नेह के ओज से ओत-प्रोत हो गईल।

एह परब के दशकन पूर्व रीति के अनुसार बहीनलोग पहिले भाई के सरापेली आ भौजाई के राड़ बानवे ली तेकर बाद फेर गीत के माध्यम से भाई के जियावल जाला आ भौजाई के मांग भरल जाला । गोधन कुटाई आ मांग भराई के बाद भाईयन के लमहर उमिर के कामना करेली।

अईसन मान्यता बा जे एह परब के दिन बहीनलोग के सरापला से भाईयन के उमिर भगवान बढ़ा देवेलन। गोवर्धन पूजा का दिन से ही हिंदू धर्मशास्त्र के अनुसार शादी-बियाह भा अन्य कवनो भी शुभ लगन के शुरुआत हो जाला। भोजपुरिया समाज में ई भी मान्यता बा जे लईका के वियाह का उमेर हो गइला के बादो बियाह नईखे होखत त ऊ लईका के गोधन कुटाई के बखत गोधन के लाँघल जाला । जवना से बियाह के लगन मज़बूत होला।

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