डा. अमरेश कुमार यादव ( एम. बि. बि. एस. )
इन्दिरा कुमारी यादव ( बी. पि. एच. )

हाल–फिलहाल के बात ह, परिवार बि. पि. एच. फाइनल सेमेंंस्टर के जाँच खतम कर के आइल रहली भरतपुर से धादिङ आरुघाट अस्पताल के कोवाटर में । सझिया के राउण्ड खातिर अस्पताल जाए के रहे हमरा, परिवार भी इच्छा देखावली कि हमहु चलेम त हम कहनी बहुत बढि़या बात बा, चलऽ दूनू आदमी चलिले सँघे ।

अस्पताल मेंं भरना भइल मरिज में से दू–तिहाइँ बोखार के मरिज रहे, ओहु बोखार के मरिज में से भी अधिकतर मरिज टाइफाइड से ग्रसित रहे । बहुत बोखार के मरिज के रिपोट पहिले ही आ गइल रहे आ पता लाग गइल रहे टाइफाइड त एगो १८–१९ साल के बबी के पुरा रिपोट ओही सँझिया राउण्ड में आइल आ पता चलल कि ओहु बबी के टाइफाइड भइल बा ।

जबही हम बतवनी कि बबी के टाइफाइड भइल बा त उनकर माई आ बहिन लगलक लोग छाती पिट–पिट के रोए आ कहे कि ‘टाइफाइड हमरे बेटी के काहे हो गइल ? अब ना बाचीं हमार बेटी, दादा रे दादा ।’ हम समझावे के कोशिस कइनी, बाकिर जोर–जोर से रोइते रहली ऊ, ओतने में परिवार के देखनी टाइफाइड के बारे में समझावे लगली । उभी सुसकत–सुसकत सुने लगली । मरिज भी ज्याादा रहे, हम परिवार के ओही बेड़ लगे छोड़ के राउण्ड के आगे बढ़वनी । राउण्ड खतम कइला पर जब हम उहवाँ अइनी त पता चलल कि बबी, उनकर माई–बहिन के सँघे–सँघे अगल–बगल के बेड के लोग भी टाइफाइड के बारे में बहुत जनकार होगइल रहे ।

बड़ी खुशी लागल, हँसते–हँसते परिवार के कहनी आजुले मरिज के इलाज आ लोग मेंं जनचेतना फइलावे के काम हम अकेले करइत रनी हँ, बाकिर आज से तूँ पब्लिक हेल्थ के विधार्थी भइला के नाते कन्धा से कन्धा मिला देहलु, अब इलाज हम करेम आ जनचेतना तू फाइलइहऽ ।

परिवार भी हँसते–हसते कहे लगली कि ‘बड़ी लोग मेंं जनचेतना के कमी बा, ना देखनी हँ कि टाइफाइड के नाम सुनते कइसे रोए लगनी हऽ ।’ तब हम कहनी कि ‘बात मेंं सच्चाई बा कि लोग मेंं जनचेतना के कमी बा । पहिले अकेले रहनी, अब त दूनू प्राणी मिल के जनचेतना फइलावल जाइ । मौका मिलते टाइफाइड पर जनचेतना मूलक लेख लिखल जाई,

आजु प्रस्तुत बाः

◆ टाइफाइड का ह ?

  • समान्यत: टाइफाइड कहला पर एक किसिम के बोखार बुझल जाला । एह बोखार के भितर के बोखार भा म्यादी बोखार कहके भी चिन्हल जाला । ई बोखार एगो साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु (बैक्टेरिया) आदमी के शरिर मेंं प्रदुषित पानी भा खाना के माध्यम से प्रवेश कइला से होला । एमेंं बोखार धिरे–धिरे कर के चढ़ेला, अधिक से अधिक १०३–१०४ डिग्री तकले पुग जाला । इलाज के अभाव मेंं ई बोखार निरन्तर २–४ हप्ता तकले लागले रह जाला ।

◆टाइफाइड खास कर के कवना के होला ?

  •  बोखार कवनो के भी हो सकेला, बाकिर अधिकतर १५ से १९ वर्ष के उमर समूह मेंं देखल गइल बा । उमेंर के बढ़ला के सँघे ई बोखार के जीवणु सँघे लडेवाला रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ल देखल गइल बा ।
  • जनाना के अपेक्षा मरदाना लोग मेंं ज्यादा देखल जाला ।
  •  न्यून गरीब आ सरसफाई के कमी वाला लोग मेंं ज्यादा देखल जाला ।
  •  प्रदूषित पानी आ खाना खाएवाला लोग मेंं ज्यादा देखल जाला ।
  •  शौचालय के प्रयोग ना करेवाला परिवार आ समाज मेंं ज्यादा देखल जाला ।
  •  टाइफाइड बोखार भइल मरिज अथवा टाइफाइड के वाहक–कैरियर के पैखाना आ पेसाब के संसरग मेंं रहेवाला लोग मेंं ज्यादा देखल जाला ।

◆ काहे वर्षात के समय मेंं बढ़ जाला टाइफाइड के मरिज ?

  • वर्षात यानि कि अषाढ़ से कुवार तकले टाइफाइड के मरिज के संख्या मेंं बढ़ोत्तरी होला काहे कि वर्षत मेंं अधिकांश पिएवाला पानी के मुहान प्रदूषित भइला के संभावना ज्यादा भइला के सँघे–सँघे ई मौसम मेंं माछी के संख्या मेंं बढोत्तरी होला आ माछी खाना के प्रदूषित कर देवेला ।

◆ टाइफाइडके लक्षण का–का होला ?

  • पहिलका हप्ता के लक्ष्णसबः

  •  बोखार सिढ़ी के तरह धिरे–धिरे कर के चढेÞला, अधिक से अधिक १०३ से १०४ डिग्री तकले पुगेला )
  •  ह्रदय के गति मेंं कमी
  •  कब्जियत
  •  कपारबथ्थी
  •  पेटदुखी
  •  कमजोड़ी
  •  पेटझरी आ कय ( लइकन मेंं )

दुसरका हप्ता के लक्षण सब :

  •  छाती पर गुलाबी रंग के दाग
  •  पेट फुलनाइ
  •  खोकी
  •  नाक से खून निकलनाई
  •  पेटझरी
  •  साँस–प्रस्वास मेंं दिक्कत होनाई

तिसरा भा चउथका हप्ता के लक्षण सब :

  •  मरिज के हालत बहुत खराब तरह से खराब होनाई
  •  पेट फुट के भितरिए खून के बहनाई
  •  मृत्यु होनाई

◆ टाइफाइड बोखार पता लगावे खातिर उपलब्ध जाँच सब का–का ह ?

प्रथम हप्ता के जाँच

  •  उजरका खून (ह्वाइट ब्लड सेल) कनिका के मात्रा मेंं कमी होजाला
  •  खून के कल्चर जाँच ज्यादा विश्वसनीय होला

दुसरका हप्ता के जाँच

  •  विडाल नामक जाँच मेंं चार गुणा एन्टीबडी ( रोग के विरुद्ध लड़ेवाला तत्व) मात्रा बढ़ जाला

तिसरका हप्ता के जाँच

  •  पैखाना के कल्चर

■ चौथका हप्ता के जाँच

  • पेसाब के कल्चर
  • सँघे–सँघे कुछ आउर जाँच कइल जाला ।

◆ टाइफाइड भइला पर ध्यान देवे वाला प्रमुख बात सब का–का ह ?

  • पूर्ण रुप से अराम करे के चाही ।
  • नरम आ जल्दी पचे वाला खाना आ ज्यादा पानी पिए के चाही ।
  • मरिज आपन सैखाना आ पेसाब के दोसरा से दुरे राख के उचित ब्यवस्थापन करे के चाही ।
  • डाक्टर के सल्लाह अनुसार पुरा डोज एंटीबायोटिक खाए के चाही ।
  • डाक्टर के निगरानी मेंं रहे के चाही ।
  • डाक्टर के सल्लाह अनुसार समय–समय मेंं जाँच करावे के चाही ताकि मरिज कैरियर (वाहक) ना बने टाइफाइड के ।

◆ टाइफाइड के कैरियर (वाहक) का होला ?

  • जवना आदमी मेंं टाइफाइड के बैक्टेरिया रहेला आ ऊ आदमी अपना मेंं भइल बैक्टेरिया से पैखाना आ पेसाब के माध्यम से दोसर आदमी के संक्रमित बना सकेला, बाकिर पर अपना मेंं कवनो लक्षण ना देखावेला ओइसन आदमी के टाइफाइड के कैरियर (वाहक) कहल जाला । वाहक ( कैरियर) अस्थाई आ दीर्घकालीन कर के दू किसिम के होला । वाहक टाइफाइड के मरिज से भी ज्याादा खतरनाक होला ।

◆ टाइफाइड के इलाज के तरिका सब का–का होला ?

  • मरिज के स्थिति देख के डाक्टर के सल्लाह अनुसार अस्पताल मेंं सुई के माध्यम से पुरा डोज एन्टीबायोटिक देहल जाला अथवा घर मेंं टेबलेट के रूप मेंं पुरा डोज एन्टीबायोटिक खाए के पड़ेला ।
  • टाइफाइड के वाहक (कैरियर) भइला पर एन्टीबायोटिक के सँघे–सँघे पित्तथैली काट के बिगे वाला अपरेशन के नवबत भी आ सकेला ।

◆ टाइफाइड के सही समय आ तरिका से इलाज ना कइला पर दीर्घकालिन असर सब का–का होला ?

  • टाइफाइड अइसन बोखार ह जवना के सही समय आ तरीका से इलाज ना कइला पर ई शरिर के हर अंग मेंं जइसे मेंं पित्तथैली, मस्तिष्क, करेज, फियो, आन्द्रा, हडी–जोर्नी, हृदय… इत्यादी सब मेंं क्षति पुगावेला । सबसे बड़का दीर्घकालिन असर ह पेट फोर के खून बहल । यदि खून बहला पर सही तरीका आ समय पर ना इलाज कइल जाए त मरिज के मृत्यु के मुह से केहु ना बँचा सकेला ।

◆ टाइफाइड से बचे के प्रमुख उपाय सब का–का होला ?

  • टाइफाइड के बैक्टेरिया (साल्मोनेला टाइफी) आदमी के शरिर बाहेक दोसरा जनावर के शरिर मेंं ना मिलेला ना बँच सकेला ओसे हल्का भी सावधानी अपनावल जाए त तुलनात्मक रूप मेंं देखल जाँव त दोसरा बेमारी से ई बेमारी से बाँचल असानी बा । ।
  • इ बैक्टेरिया खाली मानव शरिर मेंं रहेला यानी कि जब रही तब कि त मरिज मेंं ना त टाइफाइड के वाहक के शरिर मेंं अगर ई दूनू किसिम के लोग के पैखाना आ पेसाब के उचित ब्यावस्थापन कर देहल जाँव त टाइफाइड से छुटकारा मिल सकेला । इहे कारण ह कि टाइफाइड पब्लिक हेल्थ के गहन विषय बनल बा ।
  • प्रदूषित पानि आ खाना के सेवन मत करीं ।
  • अनिवार्य रूप से पैखाना आ पेसाब करे खातिर शौचालय के प्रयोग करीं ।
  • कवनो भी किसिम के बोखार होता त डाक्टर से सल्लाह करीं आ पूर्ण परीक्षण कराइँ । सतर्क रहीं कि टाइफाइड त नइखे भइल ?
  • सब से ज्यादा जरूरी आ मुस्किल काम बा टाइफाइड के वाहक (कैरियर) के पाता लगावल, ओकरा खातिर सब मिल के जनचेतना फइलावल जाँव ।
  • व्यक्तिगत आ वातावरणीय सरसफाई मेंं पूरा ध्यान देहल जाँव ।
  • टाइफाइड के मरिज आ वाहक के खाद्य पदार्थ, दुध आ पानी निरोगी लोग खातिर बनावल आ परोसल मेंं बन्देज लगावे के पड़ी ।
  • खाना बनावे से आ खाए से पहिले साबुन पानी अथवा राखी पानी से हात धोए के आदत डाले के पड़ी ।
  • सलाद भा साग खाइत बानी त साफ पानी से बढिया से धोके खाइँ ।
  • दूध के जब भी खउला के खाइँ ।
  • कवनो भी खाद्य पदार्थ पर माछी ना लागो, पुरा ध्यान दीं ।
  • टाइफाइड से बचे खातिर भ्यक्सिन (टिका) भी उपलब्ध बा डाक्टर से सल्लाह कर के ले सकत बानी ।

◆ टाइफाइड के भ्याक्सिन (टिका) केकरा–केकरा लगावल जरूरी बा ?

  • यदि रउवा घरपरिवार, टोल–गांव मेंं ज्यादा ही टाइफाइड के मरिज बा त डाक्टर के सल्लाह अनुसार भ्यक्सिन (टिका) लगाइँ ।
  • अगर रउवा टाइफाइड ग्रसित क्षेत्र मेंं कवनो काम विशेष से जाइत बानी त डाक्टर के सल्लाह अनुसार भ्यक्सिन (टिका) लगा सकत बानी ।
  • यदि रउवा टाइफाइड के ज्यादा खतरा वाला समूह से बानी जइसे स्कूल के बच्चा या अस्पताल के कर्मचारी तब डाक्टर के सल्लाह अनुसार भ्यक्सिन(टिका) लगा सकत बानी ।

★ सुझाव :

  • कइसनो भी बोखार होखे त डाक्टर से सल्लाह लीं, पूर्ण परिक्षण कराइँ । अपने भी टाइफाइड से बचीं आ जनचेतना फइला के सब केहु के भी टाइफाइड से बचाइँ ।

लेखक : रौतहट के रहनियार बानी
हाल बुढ़ीगण्डकी जनरल हास्पिटल, धादिङ

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