बिकाऊ त सभे ह

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‘बिकाऊ त सभे ह’

 

बिकाऊ त सभे ह, लागल दाम नईखे ।             कालाकार त हमहू हई, बाकिर नाम नईखे ॥

नशा त हमरो होला, बाकिर हाथ में जाम नईखे ।   कुकुर इहवो बिटोरा सकेलन, बाकिर लगे चाम नईखे ॥

बिकाऊ त सभे ह, लागल दाम नईखे ।

पूजा रोज होत बा, मन्दिर/मस्जिद में,               बाकिर कही रहीम-राम नइखे ।                       पण्डित मुल्ला सभे बा, बाकिर हजाम नइखे ॥       बिकाऊ त सभे ह, लागल दाम नईखे ।

काम कुछो ना, बाकिर आराम नईखे ।                 सुतल बा सभे, बाकिर केहू बेराम नइखे ॥           बिकाऊ त सभे ह, लागल दाम नइखे ।

माघो में छूटे पसेना, बाकिर घाम नइखे ।             दाबल माल लगही बा, बाकिर खुलेआम नईखे ॥

बिकाऊ त सभे ह, लागल दाम नईखे ।             कलाकार त हमहू हई, बाकिर नाम नईखे ॥

लेखक : राजेश प्रसाद ( प्रधानाध्यापक )

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