ब्राहामणबादी अवुरी अवसरबादी के सिकार सोझ जानता !

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ब्राहामणबादी अवुरी अवसरबादी के सिकार सोझ जानता !

नेपाल के जनम से पहिले गोरखा राज्य के शाहबंशी राजा के आपन राज्य बढ़ावे खतिरा उकसावे के काम गोरखा राज्य के ब्राहामण लोग ही सूरु कईलख । नेपाल देश एकीकरण के लाड़ाई खतिरा सुरबीर मानल गईल क्षेत्री, राई, लिम्बू, गुरुंग, तामांग जईसन सूरबीर योद्धा लोग के मृत्यु के मुह में झोक के एगो छोट राज्य गोरखा के बडहन कर के नेपाल राज्य के संरचना कईल गईल । आज के ब्राहमण पुस्ता भले ही शाहबंस के योगदान भुला गईल होखे बाकिर यी लोग के पुस्ता के जिनगी शाहबंस के चमचई करे में गुजरल एकर इतिहास कईसनको जन युद्ध से नईखे बदलल जा सकत । भले ही आज कोई गणतन्त्र, सामजबाद चाहे कम्युनिज्म के नारा काहे ना लागावत होखे लोग ।

भोजपुरी में एगो कहावत बा की “मुरख लगे पईसा रही त चलाख कहियो भूखे ना मरे ” देश के राजनीति ब्राहमण लोग से भरल रहे, बा अवुरी रही ई सभे जनमानस के पता ही बा । ब्राहमण लोग यी भोजपुरी कहावत बहुत बढ़िया से समझेले ।

नेपाल में राजनीति के सकुनी रणनिती के जनम दाता ब्राहमण लोग के ही मानल जाला । इतिहास से ले के बर्तमान तक राजनीति में ब्राहमण लोग के ही बर्चस्व रहल बा एकरा के नईखे नाकारल जा सकत । ब्राहमण जाती के इतिहास युगों युग से चलत आइल बा जे लोग सीधा साधा जानता के शुरुवे से ही मुरख बानावते आगईल लोग । हमनी के जनमानस में फैलावल ब्राहामणबादी के बेमारी ब्राहामण लोग के आपन पेट पोसे अवुरी घर चलावे खतिरा ब्राहमण जाती से ही फैलावल गईल । जवन आज हमनी के रीतिरिवाज अवुरी परम्परा बन के रह गईल बा । श्रावण, भादो के महिना में सभे जन मानस के घरपरिवार से ले के ब्यापार तक भादरा लागल रहेला बाकिर यी महिना में ब्राहमण लोग के पूजा के ब्यापार खूब चले ला ।

मधेशी, दलित चाहे जनजाती ई लोग जरुरत से ज्यादा सीधा साधा होखेले । भोजपुरी में एगो कहावत बा की “मुरख लगे पईसा रही त चलाख कहियो भूखे ना मरे” देश के राजनीति ब्राहमण लोग से भरल रहे, बा अवुरी रही यी सभे जनमानस के पता ही बा । ब्राहमण लोग यी भोजपुरी कहावत बहुत बढ़िया से समझेले । देश के शाहबंशी राजा लोग के कुबेर के उचित प्रयोग करे के होखे चाहे देश के सीधा साधा मधेशी, जनजाति चाहे दलित के सोझापन के फायदा उठा के देश में राज करे में माहिर ब्राहमणबादी अवुरी अवसारबादी निति के ज्ञान यी लोग के जन्मे से दैबिक प्राप्ती भईल रहेला । उ लोग के सिकार मधेशी, दलित अवुरी जनजाति शुरुवे से रहल बा अवुरी अभी भी प्रमुख सिकार मधेशी, दलित अवुरी जनजाति ही बनल बा । देश के दुर्दशा ब्राह्मणबादी अवुरी अवसरबादी सोच के ही परिणाम ह ।

नेपाल में राजधानी काठमांडू के केन्द्रीकरण भी यी ब्राह्मणबादी अवुरी अवसरबादी लोग के कमीनापन के उदाहरण ही ह । नेपाल के कौनो भी जगह रऊवा पढ़ाई करी बाकिर प्रमाणपत्र खतिरा रउवा काठमांडू ही जाए के पड़ी । नेपाल के हर सारकारी, अर्ध सरकारी चाहे गैर सरकारी संस्था ही काहे ना होखे सारा के केन्द्रीकरण काठमांडू ही कईल रहेला । अईसन राजनीतिज्ञय लोग एक बेर केन्द्र में पहुचते उ लोग के काठमांडू में घर किना जाला ओकरा बाद गाव के रस्ते भुला जाला लोग । अगर रौउवा कौनो किसिम के सेवा चाही त जाई काठमांडू  ।

१२ बरस के जनयुद्ध भी ब्राहमणबाद से ही शुरू भईल जहा सीधा साधा अशिक्षित दलित, मधेसी अवुरी जनजाति लोग के जातीय राज्य, धार्मिक बर्गीकरण, भाषिक पहिचान अवुरी जातीय पहिचान के लड्डू देखा के शिक्षित, धूर्त,  ब्राहमणबादी अवुरी अवसरबादी नेता लोग नेतृत्व संभललख लोग जवन जनयुद्ध में १५००० हाजार से बहुती मानव क्षति भईल अवुरी जब देश के नेतृत्व संभाले के मौका मिलल तब यी सत्ता पिपासु लोग अवसरबादी बन के सोझा साझा जानता के धोका देके आपन आपन कुर्सी खून पिएवाला जोख के जईसन पकड़ लेहलख लोग । इतिहास में भी इहे ब्राहमणबादी अवुरी अवसरबादी देश के बिगड़ले रहे लोग अवुरी आज भी ईहे यी देश के बर्बादी के कागार पर ले के जा रहल बा लोग ।

कम्युनिज्म के लाल किताब पढके रास्ट्रीयता अवुरी समाजबाद के ज्ञान बाटे वाला अवुरी रात भर में देश के कायापलट कर के नेपाल के सिंगापूर बनावे के सापना देखावे वाला माओबादी लोग । देश के बर्बाद कर के देश के युवा शक्ति के काया पलट के रख देहलख लोग जेकर परिणाम ह की आज खाड़ी मुलुक के हर देश में युवा शक्ति गिरमिटिया मजदुर बन के शोषण के सिकार हो रहल बा लोग । जे जे उच्च ओहदा पर रहले उ सात पुस्ता ला धन सम्पति जुटा के रख लेहले अवुरी आपन बाल बच्चा के बिदेश में पढ़ा रहल बाड़े  अवुरी शानो शौकत से आराम के राजवाड़ी जिनगी बिता रहल बा लोग ।

नेपाल के राजनीति के सब से घिन लागेवाला काम स्थानीय राजनीति जाहा हर १० आदमी के बिच में ८ आदमी कौनो ना कौनो राजनीतिक पार्टी से ही जुडल रहेला लोग ।देश के कौनो अईसन अंग नईखे जवन यी लोग के अशिर्बाद बिना के चलत होखे  ।

धन को लोभी अईसन नेता लोग बिदेशी शक्ति के भर पर आपन डेग राजनीति में आगे बढ़ावे ला लोग । बिदेशी भीख के ऊपर देश के बिकास करे में बिश्वास रखेवाला अईसन राजनीतिज्ञय लोग आज देश के बजेट रेमिटेंस अवुरी बिदेशी आर्थिक सहयोग के आधार पर बानावे लोग । नेपाल में आइल प्राकृतिक बिपत माहा बिनास्कारी भूकम्प में मानवीयता क्षति भईल ई बिपत से सिर्फ अवुरी सिर्फ साधारण जानता के असर परल अवुरी अइसन माहा बिपत में भी अवसरबादी आपन स्वार्थी अवसर ना छोड़लख लोग । कोई त्रिपाल बेचलख त कोई करकट बेचलख, कोई चाउर दाल चोरईलख त कोई आर्थिक सहयोग पर चिलहोर के जईसन नजर रखलख । अईसन अवसरबादी लोग से देश के दलित, जनजाति चाहे मधेसी लोग का आश कर सकता ।

नेपाल में राजधानी काठमांडू के केन्द्रीकरण भी यी ब्राह्मणबादी अवुरी अवसरबादी लोग के कमीनापन के उदाहरण ही ह । नेपाल के कौनो भी जगह रऊवा पढ़ाई करी बाकिर प्रमाणपत्र खतिरा रउवा काठमांडू ही जाए के पड़ी । नेपाल के हर सारकारी, अर्ध सरकारी चाहे गैर सरकारी संस्था ही काहे ना होखे सारा के केन्द्रीकरण काठमांडू ही कईल रहेला । अईसन राजनीतिज्ञय लोग एक बेर केन्द्र में पहुचते उ लोग के काठमांडू में घर किना जाला ओकरा बाद गाव के रस्ते भुला जाला लोग । अगर रौउवा कौनो किसिम के सेवा चाही त जाई काठमांडू ।

नेपाल के राजनीति के सब से घिन लागेवाला काम स्थानीय राजनीति जाहा हर १० आदमी के बिच में ८ आदमी कौनो ना कौनो राजनीतिक पार्टी से ही जुडल रहेला लोग ।देश के कौनो अईसन अंग नईखे जवन यी लोग के अशिर्बाद बिना के चलत होखे । निजी ब्यापार, गैरसरकारी संघ संस्था, प्रशासन, संचार चाहे सुरक्षा निकाय सब के सब राजनीति से प्रभावित बा । काठ के दीमक नियन यी देश के हर अंग के खोखला बाना के रख देहेले बा लोग । ५७ बरिस पहिले ईहे मधेश से राजधानी काठमांडू जाए ला अनिवार्य रूप से परिचय पत्र खोजल जात रहे ओह बेरा मधेस पूर्ण रूप से अपने आप पर निर्भर ही ना रहे बाकिर भारत जईसन बड़का पडोसी देश में बहुते कुछ के निर्यात करे के भी सक्षम रहे । आज मधेस के नेपाली उपनिबेश बनावला के पिछे स्वार्थी अवसरबादी लोग के ही हात बा । नेपाल के उपनिबेश भईला से मधेस के फायदा त कुछो ना भईल बाकिर घाटा सदैव होते आगईल ।

मधेस के बीड़ा उठा के केन्द्र में पहुचल कुछ मधेसी अवसरबादी लोग भी बा जे आपन स्वार्थ पूरा करे खतिरा ब्राहमणबादी के छाला ओढले बा लोग । अईसन बात नईखे के मधेसी जानता सचेत नईखे बाकिर जानता सब जानत बा लोग की सियारा उहे ह बाकीर पोछ्वा रंगवले बा ।

अवसरबादी नेता लोग अगर बोलता की मधेस मतलब बिहार होखेला त उ देश द्रोह ना होखेला बाकिर अगर एगो मधेसी अगर आवाज उठा देवेला की मधेस अलग प्रदेश होखे के पडल त उ देश द्रोही कहला । यी ह हमनी रहेवाला नेपाल देश के राजनीति । दोसरा देश के अंग दार्जिलिंग के जानता नेपाली ह बाकिर आपन देश के मधेसी बिहारी ह । भारत में भारतीय सेना से आवाकास प्राप्त नेपाली लगे भारतीय अवुरी नेपाली दुनु नागरिकता बा त कौनो बात नईखे बाकिर मधेसी के आपन बंसज नागरिकता खतिरा भी पूछताछ जरुरी बा । जेकर जनम से लेके पालन पोसन दोसर देश में होखे बस ओकरा नाम के पीछे आर्याल, पन्त, पौडेल, भटराई, दाहाल चाहे कोईराला उपनाम लागल बा भले उ नेपाली बोले के जनत होखे चाहे ना पर उ नेपाली काहला बाकिर मधेसी नेपाल में जनमल नेपाल में बाड़का भईल नेपाल के हर काम काज में हिस्सेदार रहल अवुरी शुद्ध नेपाली भी बोले त का ह बाकिर उ बिहारी काहाला ।

देश के जानता अईसन राजनीतिज्ञ लोग के केतना प्रेम करेला की सामाजिक संजाल फेसबुक चाहे ट्विटर पर नेपाली राजनीतिज्ञ लोग के अगर राउवा खाता खोल के देखि त ऊपर से निचे तक सिर्फ अवुरी सिर्फ अश्लील गारी से ही भरल मिलेला । केकर केकर धरी नाव कमरी ओढले सागरी गाव भोजपुरी काहावत के नेपाली राजनीतिज्ञ लोग प्रैक्टिकली प्रमाणित कर देहेले बा लोग । जेकरा जेतने मिलता ओतने लूट के खुश रहता लोग पर लुटत जरुर बा लोग । मधेस के बीड़ा उठा के केन्द्र में पहुचल कुछ मधेसी अवसरबादी लोग भी बा जे आपन स्वार्थ पूरा करे खतिरा ब्राहमणबादी के छाला ओढले बा लोग । अईसन बात नईखे के मधेसी जानता सचेत नईखे बाकिर जानता सब जानत बा लोग की सियारा उहे ह बाकीर पोछ्वा रंगवले बा ।

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