भारतीय खुल्ला बोर्डर “मधेश खातिर बरदान कि अभिशाप”

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शिव सन्देश

नेपाल एक अइसन भुगोलिय देश बा जवना के तिन ओर से भारत आ एक ओर से चीन देश के सिमाना घेरले बा । नेपाल के दक्षिणी हिस्सा मे पुर्व मेची से पश्चिम महाकाली तक मधेश भुभाग फैलल बा । ई मधेश भु–भाग भारतीय भुमि से जोडला के कारण से मधेश मे रहेवाला मधेशी के प्रत्यक्ष सम्बन्ध भारतीय भुमि तथा भारतीय जनता से रहल स्वभाविक बा । नेपाल आ भारत के सिमाना दशगजा नाम के भुभाग द्वारा विभाजन कइल बा ।

उपर उपर देखला पर सस्ता मे समान किनल निमन बुझाला, बाक़िर गहन रुप से बिश्लेषन कइला पर खुल्ला सिमाना मधेश के अर्थिक विकास में अभिषाप के रुपमें रहल बा ।

खुल्ला सिमाना भइला से दुनु देश के जनता लोग निर्वाद रुपसे एक दोसरा के देश मे आवत जावत करे के सुविधा भी बा । जवना के चल्ते दुनु देश के जनता सब आर्थिक, समाजिक, राजनैतिक, धार्मिक आ शैक्षिक सम्बन्ध के डोर मे एक दोसरा से बन्हाइल बा । ई दु देशिय बन्धन से मधेश के भुत, बर्तमान आ भविष्य जोडल बा । एकर असर कवनो क्षेत्र मे बरदान सावित भइल बा त, कवनो क्षेत्र मे अभिशाप सावित भइल बा ।

आर्थिक पक्षः

भौगोलिक सहजता के कारण से नेपाल के अधिकाँस ब्यापार भारत देश से कइल जाला । भारत बाहेक के तिसरका देश से कइल ब्यापार के समान सब भी आयात करे खातिर भारतीय भुमि ही प्रयोग कइल बाध्यता बा । मधेश मे रहल अधिकाँस जनता सब भी अपन दैनिक उपभोग के समान सब खरिद करे खातिर भारतीय बजार के ही प्रयोग कर रहल बा । मधेश मे अवस्थति ब्यापारी लोग भी कुछ समान कानुनी माध्यम से त, कुछ समान गैर कानुनी माध्यम से भारतीय बजार से आयात कर रहल बा । भंसार तथा यातायात खर्च के कारण से मधेशी बजार में उपलब्ध दैनिक प्रयोग के समान सब भारतीय बजार के तुलना मे कुछ महंगा रहेला । ईहे कारण से मधेश के जनता सब के दैनिक प्रयोग मे आवेवाला समान भारतीय बजार मे किने खातिर बाध्य हो रहल बा ।

खुल्ला सिमाना आ कमजोर सिमा सुरक्षा के उपयोग कर के भारतीय बजार से किनल समान बिना कठिनाई के ही नेपाल मे ल्यावे के मिलजाला । जवना के परिणाम, मधेश मे अवस्थित बजार सब दिन प्रतिदिन कमजोर आ सुखते जा रहल बा । करीब पचास वर्ष पहिले, मधेश के भुमि आ बजार सब खाद्यान के गढ के रुपमे चर्चित रहे । ओ समय मे मधेश के बजार सब बहुते सबल आ फलल फुलल रहे ।

नेपाल के सिमा मे अवस्थित बिराटनगर, राजविराज, सिराहा, जलेश्वर, मलंगवा, गौर, बीरगंज, भैरहवा, नेपालगंज एकदमे प्रसिद्ध बजार रहत रहे । ऐ बजार मे दुर दुर के भारतीय जनता सब अपना दैनिक आवश्यकता के समान सब किने खातिर आवत रहे । खुल्ला बजार के प्रभाव तथा महेन्द्र राजमार्ग के निमार्ण के कारण के मधेश के बजार तथा भुमि आर्थिक दृष्टिकोण से एकदमे कमजोर हो गइल बा । राजविराज, सिराहा, जलेश्वर, मलंगवा, गौर लगायत अधिकाँस शहर अव गाँव मे परिवर्तन होखे के रस्ता पर चल पडल बा । उपर उपर देखला पर सस्ता मे समान किनल निमन बुझाला, बाक़िर गहन रुप से बिश्लेषन कइला पर खुल्ला सिमाना मधेश के अर्थिक विकास में अभिषाप के रुपमें रहल बा ।

यदि खुल्ला सिमाना बन्द कर देहल जाए त मधेशी जनता अपन दैनिक उपभोग के समान सब किने खातिर नेपाली बजार के ही प्रयोग करइत आ मधेशी बजार के आर्थिक गतिविधि मे वृद्धि हो जाइत । आर्थिक गतिविधि मे बृद्धि होके इहाँ के जनता के आर्थिक पक्ष भी मजबुत हो जाइत । “यदि बिकल्प समाप्त हो जाए त सफलता मिलल असान हो जाला” ।

समाजिक पक्ष:

भौगोलिक निकटता के कारण से भारतीय जनता आ मधेशी जनता के बीच रंगरुप, रहनसहन, भेषभुषा, रितिरिवाज, धार्मिक, भाषिक तथा साँस्कृतिक समानता आ निकटता बा । जवना के कारण से दुनु देश वीच धार्मिक आ साँस्कृतिक आदानप्रदान बैदिक काल से लेके आज तक भी हो रहल बा । मानवीय विकास खातिर साँस्कृति आदान प्रदान बहुते जरुरी रहेला । मधेशी क्षेत्र के नजदीक मे रहल बंगाल, बिहार आ उतर प्रदेश के जनता सब के रहन सहन विश्व सन्दर्भ में ज्यादा उच्च नइखे आ समाजिक चेतना भी अत्यन्त कमजोर देखल गइल बा । अइसन कमजोर समाजिक पक्ष बिभिन्न माध्यम से मधेश मे आयात होखइत आ रहल बा ।

धार्मिक तथा समाजिक संकीर्णता ऐ समाज में ब्यापक रुप से भरल बा । समाजिक संकीर्णता के कारण से समाज में जातिय, लैगिंक, भाषिक आ धार्मिक भेदभाव खराब ढंग से चलन चलती मे रहल बा । अइसन समाजिक रितिरिवाज एक देश से दोसरा देश में बैवाहिक सम्बन्ध तथा आवतजावत से आदान प्रदान हो रहल बा । कुछ निमन समाजिक पक्ष अदानप्रदान हो रहल बा त बहुते खराब समाजिक पक्ष आदानप्रदान हो रहल बा । मधेशी के समाजिक एकरुपता भारतीय जनता से मिलला के कारण से, पहाडी शासक तथा पहाडी जनताद्वारा मधेशी के बारम्बार अपहेलित कइल गइल घटना कवनो नयाँ नइखे । सम्पुर्ण मधेशी के जनता के भारतीय नजर से देखावे मे ई समाजिक एकरुपता भी एगो कारण के रुप मे देखल गइल बा ।

राजनैतिक पक्षः

भारतीय भुमि में बिभिन्न समय में बृहत राजनैतिक परिवर्तन के प्रत्यक्ष प्रभाव नेपाल के राजनीति में पडते आ रहल बा । नेपाल के राजनीतिक घटना सब भी भारतीय राजनीतिक घटना आ संस्कार से उत्प्रेरित होके होखते आ रहल बा । नेपाल में भइल मुख्य राजनीतिक घटना जइसे कि राणाशासन के अन्त आ प्रजातन्त्र के प्राप्ति, निर्दलीय ब्यवस्था, बहुदलीय ब्यवस्था, लोकतन्त्र तथा गणतन्त्र के स्थापना, संविधान सभा, संघिय सरकार के निर्माण लगायत के सम्पुर्ण राजनीतिक परिवर्तन मे भारतीय राजनीतिक प्रभाव, अभ्यास तथा संस्कार प्रत्यक्ष आ अप्रत्यक्ष रुप से रहल बा । भारत विश्व स्तर में एगो सफल लोकतान्त्रिक ब्यवस्था भइला से अइसन संस्कार के आयात से मधेश में साकारात्मक प्रभाव पडल देखल गइल बा ।

शैक्षिक पक्षः

भारत में लोकतन्त्र समृद्ध भइला से औषत शैक्षिक अवस्था कुछ निमन बा । बाक़िर मधेश से नजदीक रहल बंगाल, बिहार तथा उतर प्रदेश के जनता के शैक्षिक स्तर विश्व स्तर पर कमजोर मानल गइल बा । पहिले पहिले मधेश के जनता सब भारतीय विद्यालय में जाके अपन शिक्षा प्राप्त करत रहे । जवना के कारण के पहिले पहिले मधेशी सब विज्ञान आ गणित बिषय में बिशिष्टा प्राप्त कइले रहे । नेपाल के अधिकांस विद्यालय में पढावे खातिर मधेशी शिक्षक मात्र उपलब्ध रहे । बाक़िर अभी आके उतर प्रदेश आ बिहार के खराब शैक्षिक पद्धति से उत्प्रेरित होके आ राज्यद्वारा रचल संरचनागत कुटिलता में अझुरा के मधेश के सम्पुर्ण शैक्षिक स्तर बर्वाद हो रहल बा ।

परिक्षा में चोरी करल आ करावल एगो संस्कार बनते जा रहल बा । जवना के कारण से मधेश के सम्पुर्ण बौद्धिक मानवीय सम्पति सब बचपने में पोलियो लाग रहल बा । स्कुल आ क्लेज राजनीतिक खेल के अखाँडा बनते जा रहल बा । परिक्षा के चोरी से प्राप्त डिग्रीधारी के संख्या त बढ रहल बा बाक़िर अध्ययन के अभाव से योग्यता में कमी हो रहल बा । जवना के कारण से राज्य संचालन के प्रमुख प्रशासनिक निकाय में मधेशी के पहुँच जनसंख्या के अनुपात में नइखे हो रहल । शैक्षिक अवस्था कमजोर बनावे में खुल्ला सिमाना के प्रभाव तथा राज्य के संरचनागत बइमानी ही प्रमुख कारण के रुप मे मानल गइल बा ।

निश्कर्ष:

विश्वब्यापिकरण तथा खुल्ला बजार निति के युग में अइसन समाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षिक आदानप्रदान होखे के चाही । बाक़िर अइसन अदानप्रदान से समानता के जोड पुगेला, समावेशिता के ना । सम्पन्न आउर सम्पन्न होते जाला, आ कमजोर आउर कमजोर होते जाला । अइसन कमजोर के संरक्षण खातिर राज्य के हस्तक्षेप जरुरी होजाला ।

नेपाल भारत के सिमाना में भी उहे देखल गइल बा कि आर्थिक, समाजिक तथा शैक्षिक रुप से कमजोर मधेश के भुमि तथा जनता उपर भारतीय सबलता भारी पड रहल बा । आ मधेश के अधिकाँस पक्ष के दिन प्रतिदिन कमजोर बनावते जा रहल बा । मधेश के बिकास के पुर्वाधार जइसे बजार, उद्योग, ब्यापार, शिक्षण संस्थान आ धार्मिक संस्थान के दिन प्रतिदिन कमजोर बनावते जा रहल बा जवना के संरक्षण अहम जरुरी बन गइल बा ।

लेखक – शिव “सन्देश”
सिम्रोन गढ नगरपालिका ९, बारा
हालः वीरगंज महानगरपालिका

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