भारत के दिल्ली में आयोजित “भोजपुरी लिटरेचर फेस्टिबल” के मुख्य आकर्षण बनल “नेपाल भोजपुरी समाज”

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    कार्तिक २९ गते, नई दिल्ली ।

    भोजपुरी असोसिएशन ऑफ इंडिया आ मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार के संयुक्त आयोजन में दिल्ली के हंसराज कॉलेज में भोजपुरी लिटरेचर फेस्टिवल सफलतापूर्वक सम्पन्न भइल। कार्यक्रम में भारत भर से आइल भोजपुरी विद्वानन, रचनाकरन, सरकारी कर्मचारियन के संगे भोजपुरी जमात के ख़ूब जुटान रहे। एह लिटरेचर फेस्टिवल के मुख्य आकर्षण रहल नेपाल से भोजपुरी के प्रतिनिधित्व करे नेपाल भोजपुरी समाज, वीरगंज से गइल दूगो युवा भोजपुरी रचनाकार रितु राज आ अज़मत अली अंसारी। दुनू जने अपना रचना वाचन से भोजपुरी के विद्वानन के संगे संगे कार्यक्रम में उपस्थित लोगन के दिल में उतरे में सफल भइल लोग।

    पूरा भोजपुरी लिटरेचर फेस्टिवल पांच सत्र में बाँटल रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अखिलेश मिश्र रहनी। जबकि हंसराज कॉलेज के प्राचार्या डॉ रमा, बॉलीवुड अभिनेता सत्यकाम आंनद, मृत्युंजय सिंह, अजीत दुबे, ज्वाला प्रसाद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहनी।

    हरेक सत्र में अलग-अलग पैनलिस्ट भोजपुरी लोक, भाषा, संस्कृति के समृद्धि पर गंभीर चिंतन-बतकही कईलख लोग। “भोजपुरी गीतन सामाजिक विमर्श” सत्र में भोजपुरी लोकगीत के इतिहास आ वर्त्तमान पर बात करत भोजपुरी के विद्वान राम नारायण तिवारी जी बतवलें जे कइसे वेद लोकगीतन से प्रेरित भइल बा। लोकगीत के संबंध में ही बात करत वरिष्ठ साहित्यकार निलय उपाध्याय बतवनीं जे वेद आ लोक के टक्कर में लोक के जीत भइल आ वेद हारल। उहाँ के बतवनीं जे जवन समाज से लोकगीत के लोप होखे लागेला उहवाँ हिंसा के भाव बढ़े लागेला।

    “वर्त्तमान दौर में मातृभाषा के प्रासंगिकता आ बीच बहस में भोजपुरी” सत्र में मुजफ्फरपुर एल एस कॉलेज के भोजपुरी के प्रोफेसर जयकांत सिंह जय, बनारस हिंदू विश्व विद्यालय के प्रोफेसर सदानन्द शाही आ विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अध्यक्ष अजीत दुबे जी लोग एक स्वर में कहनी जे हमनी के मातृभाषा भोजपुरी सरकारी उपेक्षा के शिकार बा। भोजपुरी भाषा के यथोचित स्थान दियावे खातिर हमनी के बहुत मेहनत करे के होइ। जी जान से जूटे के होइ। “भोजपुरी साहित्य के पृष्ठभूमि आ नवलेखन” सत्र के पैनल में भोजपुरी के वरिष्ठ साहित्यकार ब्रजभूषण मिश्र आ प्रकाश उदय रहनी। ब्रजभूषण मिश्र कहनी “भोजपुरी भाषा साहित्य आ समाज के पृष्ठभूमि समृद्ध रहल बा। आउर समृद्ध होइ। बहुत नवका-नवका लोग लिख रहल बा।” बाकिर उहाँ के गुणवत्तापूर्ण लेखन के ओर लागे के कहनी। प्रकाश उदय जी कहनी “भोजपुरी में काल ठहर जाला। उहाँ के कहनी आजू से सै बरिस पहिले भी बिआह में जवन रामसीता के गीत गाइल जात रहे ऊहे अबहिनो गावल जाता। भोजपुरी में भक्ति काल, रीति काल सब काल संगही चल रहल बा।

    एह लिटरेचर फेस्टिवल में वरिष्ठ साहित्यकार नागेंद्र प्रसाद सिंह के लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार आ बेतिया के साहित्यकार चतुर्भुज मिश्र के साहित्य में योगदान खातिर आ विनिता भास्कर के पीडिया आ कोहबर के चित्रकारी खातिर सम्मानित कइल गइल रहे। वरिष्ठ साहित्यकार ब्रजभूषण मिश्र के संपादन में भोजपुरी पत्रिका “भोजपुरी मंथन” के लोकार्पण भी कार्यक्रम में भइल।

    लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश उदय के अध्यक्षता में कवि सम्मेलन भइल। जवना में युवा आ वरिष्ठ कवि लोग कविता वाचन कइलख लोग। बेतिया के कवि सुभाष शर्मा के सरस्वती वंदना से शुरू भइल कवि सम्मेलन में सभ कवियन लोग आपन कविता से समां बान्ह देहलख लोग। भोजपुरी कवियित्री सरोज सिंह द्रौपदी के व्यथा के बड़ा ही मार्मिक ढंग से कविता में प्रस्तुत कईली। मिथिलेश मैकस के हास्य कविता आ सुशांत के कन्या भूर्ण हत्या के गीत आपन प्रभाव छोड़े में सफल भइल। फेस्टिवल में भइल कवि सम्मेलन के मुख्य आकर्षण रहे वीरगंज, नेपाल से आइल दूगो युवा कवि रितुराज आ अज़मत अली अंसारी। युवा कवि अज़मत अली के सायकिल गीत के प्रस्तुति से पूरा सभा हॉल झूम गइल। डफ वाद्ययंत्र पर प्रस्तुत कइल ई गीत में पर्यावरण, स्वास्थ्य, मनोरंजन समेत गृहस्थ जीवन के भाव मज़बूत रूप में रहे।

    एहितरे रितु राज के ग़ज़ल ” बाप हमनिये के पोसे में बुढ़ाइल त कहत बानी..” में सभावहॉल ताली के गड़गड़ाहट से गूंज गइल रहे। अंत में नामचीन वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश उदय के रचनन कवि सम्मेलन में चार चाँद लगा दिहल। कार्यक्रम के संचालन प्रभांशु ओझा आ भोजपुरी असोसिएशन ऑफ इंडिया के दिल्ली चैप्टर के संयोजक जलज कुमार अनुपम कईले रहे लोग।

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