भाषा आ बाजार के संदर्भ में भोजपुरी

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गोपाल ठाकुर

भूमि आ भूमिपुत्र पर कब्जा करे के क्रम में सामंती साम्राज्य के विकास भइल त बाजार के खोज में पूंजीवादी साम्राज्य के विकास भइल बा । विरान लोग के शासन से मुक्ति के क्रम में बितल शताब्दी के उत्तरार्ध में अनेको उपनिवेश स्वाधीनता प्राप्त कइलख त अड़ोसी–पड़ोसी के शासन यानी आंतरिक उपनिवेश से मुक्ति के क्रम में संघीय शासन प्रणाली के विकास भइल भी इतिहास बतावेला ।

एकरा साथ साथ राष्ट्रीय–भाषिक स्वायत्तता के संवैधानिक सुनिश्चितता में सोभियत संघ, युगोस्लाभिया, चेकोस्लोभाकिया जइसन उदीप्यमान देशन के गठन भइल त फेर से ऊ स्वायत्तता के दुरुपयोग भइला पर विघटन भी ।

एही उतार–चढ़ाव के दौरान आज से अढ़ाई सय बरीस पहिले गोरखा राज्य के सामंती विस्तार अभियान के क्रम में तत्कालीन गोरखा महाराज पृथ्वीनारायण के सामंती साम्राज्य खड़ा भइल जे आपन राजधानी गोरखा से उठाके नेपाल घाटी में ले अइलन आ उनकर साम्राज्य के धीरे–धीरे नेपाल के नाम से स्थापित करे के दौर आगा बढ़ल । आज एतहाँ सामंती राजशाही ओराइल बा आ संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र नेपाल विधिवत रूप से संवैधानिक व्यवस्थापन का साथ आगा बढ़ रहल बा ।

एह तरे वैश्विक संदर्भ होखे भा हमनी के घरेलु संदर्भ अब बाह्य भा आंतरिक उपनिवेश के रूप में कहीं कौनो राष्ट्रीयता मुड़ी गाड़के रहेके मानसिकता में नइखे । बाँकिर एह संदर्भ के औपनिवेशिकता से मुक्ति के रूप में लेहल आजो गरफँसरी से कम नइखे । अर्थात आजो साम्राज्यवाद–उपनिवेशवाद जिंदा बा बाँकिर भूमि आ भूमिपुत्र पर सीधा कब्जा ना कके बाजार के दबाव के जरिए राष्ट्रीय–भाषिक पहचान मेटावे के मीठगर अस्त्र–शस्त्र के साथ ।

हमनी के घरेलु संदर्भ के लेहल जाए त खसकुरा, पर्वते कुरा, गोरखा भाषा होत शाही मातृभाषा के आज से करीब ८५ बरीस पहिले नेपाली नाम देहल गइल आ राज्य के समूचा संयंत्रन के दुरुपयोग करत बाँकी भाषा के उखाड़ फेंके के हर संभव प्रयास कइल गइल । पहाड़ के दर्जनो भाषा त ओरा गइल, मधेश के भाषा में विशृंखलता के जहर घोरे के प्रयास के बावजूद अभी तक ऊ भाषा सब कायम बा, ई खुशी के बात बा ।

ऐतिहासिक भौतिकवाद के अनुसार राज्य एगो निश्चित राष्ट्र आ वर्ग के आउर राष्ट्र आ वर्ग पर मानवीय–अमानवीय वर्चश्व कायम राखे के एगो संयंत्र ह । एही से साम्यवादी दर्शन राज्यविहीन संसार के परिकल्पना कइले बा । बाँकिर ई राज्य के खेल भी बड़ा विचित्र बा । जब दबाव बढ़ी आ आपन अस्तित्व पर खतरा देखी त हर तरह के सम्झौता कर ली आ दबाव में तनिको नरमी हो जाई त फेर गहुमन लेखा छत्तर काढ़के फोंफिआए लागी ।

२०४६ के जन आंदोलन से महेंद्रीय मंडलीय भाषिक सोच के नेपाल में निमन धक्का पहुँचल । नेपाली आ अंग्रेजी के अलावा नेवारी आ मैथिली में रेडियो नेपाल के समाचार में स्थान मिलल । बाद में २०५१ से भोजपुरी सहित आउर ८ भाषा भी सामिल भइल । २०५४ से प्राथमिक शिक्षा में भी भोजपुरी सहित के कुछ मातृभाषा सब के शामिल कके एगो विषय के रूप में पाठ्यक्रम आ पाठ्यपुस्तक भी तैयार भइल । २०६३ के बाद से गोरखापत्र में भी २२ गो भाषा में पृष्ठ के स्थान देहल गइल । बाँकिर भूलाएम ना कि मातृभाषा के पढ़ाई आज तक सुचारू नइखे रहल त २०५५ में सर्वोच्च अदालत के दुरुपयोग कके स्थानीय निकाय में शुरू भइल नेवार आ मैथिली के प्रयोग के रोकल गइल ।

एही बीच में युनेस्को के सन् २००० तक ले विश्वव्यापी रूप में निरक्षरता उन्मूलन के आपन अभियान के तास के पत्ता जइसन उधियात लउकल । स्थलगत अनुसंधान से पता चलल राज्य के कामकाजी भाषा में ऊ अभियान चलल रहे जे हरेक जगह सब लोग के मातृभाषा ना रहे । अतः जेकर मातृभाषा रहे ओह राष्ट्रीयतन में ऊ सफल भइल आ जेकर मातृभाषा ना रहे ओह राष्ट्रीयतन में विफल ।

तब से मातृभाषा के माध्यम से बहुभाषिक शिक्षा के कार्यक्रम लेके युनेस्को भी आगा बढ़ रहल बा, बाँकिर नेपाल के संदर्भ में अब तक के परिणाम हाथ लागल शुन्य रहल बा । एकर कारण ई रहल बा कि नेपाली के अलावा आउर भाषा के पढ़वला पर नेपाली के रुत्वा कम हो जाई कहल मंडलिया बुझाई से अब तक के कथित मूलधार के लोकतांत्रिक राजनीति आ कर्मचारीतंत्र के नेतृत्व ऊपर नइखे उठल त दोसर ओर अंग्रेजी के बिना वैश्विक बाजार में जनशक्ति निकम्मा रही कहके सब से खतरनाक बुझाई शासक से शासित तक आम जनमानस में व्याप्त बा । यानी बाजार में प्रतिस्पर्धा खातिर हमनी के घरेलु परिवेश में नेपाली आ वैश्विक परिवेश में अंग्रेजी के ज्ञान भइला से हो जाई । अइसन मान्यता भारत सहित के दक्खिन एशिया के आउर अल्पविकसित देशन में भी कामकाजी भाषा आ अंग्रेजी प्रति के मोह के साथ व्याप्त देखल गइल बा ।

पछिमी संसार के छोड़के पूर्वी संसार में ही अगर झँखियाके ताकल जाए त चीन, जापान, कोरिया सहित के देशन के बाजार में अगर अंग्रेजी के जरूरत नइखे त दक्खिन एशिया के कुछ देशन के बाजार में ही काहे एकर गरफँसरी में हमनी पड़ल बानी ? तनिका सोचले ठीक रही ।

जहाँ तक भोजपुरी के बात बा त जनसंख्या के हिसाब से नेपाल में तिसरका राष्ट्रभाषा आ भारत में दोसरका भाषा बा । राज्य के मान्यता के हिसाब से मॉरीशस, गुएना, त्रिनिदाद में भोजपुरी के दोसरका भाषा के मान्यता प्राप्त बा । एही तरे उपस्थिति के हिसाब से अगर देखल जाए त अब संसार के कौनो देश नइखे जहाँ भोजपुरियन के उपस्थिति नइखे । सहजता के हिसाब से गैर भाषाभाषी खातिर भी ई एतना सहज बा कि भोजपुरियन के नज्दीक रहके संसारभर के आउर भाषाभाषी भी एकरा के बोल सकेला आ बोल भी रहल बा ।

विरान भाषा सिखे खातिर भी मातृभाषा पहिले सिखल पढ़ल जरूरी बा । भोजपुरी के संदर्भ में भोजपुरिया लोग समय रहते सोचो । भोजपुरिया क्षेत्र में एह शैक्षिक शत्र से भोजपुरी में पढ़ाई खातिर आपन गाँवरनगरपालिका, जिला समन्वय समिति, प्रादेशिक सरकार आ नेपाल सरकार पाठ्यक्रम विकास केंद्र में पाठ्यपुस्तक खातिर जल्दी संपर्क करो ।

जहाँतक नेपाल के विस्थापित शाही राजघराना के बात बा त ऊ लोग अपना के गोरखनाथ के शिष्य वंशज के रूप में स्वीकार करेला । कहेके ना परी गोरखनाथ भोजपुरी के अविकसित काल के कवि रहलें जिनकर कविता आजो भोजपुरिया जगत में संरक्षित बा । पृथ्वीनारायण के कइगो चिट्ठी भोजपुरी में मिलल बा त नेपाल घाटी के बनावहू में भोजपुरियन के खुन–पसेना लागल बा जेकर परिणाम रहल कि मल्ल शासक लोग एह भाषा के राजकाज में भी प्रयोग करत रहे । एह से कि सेमरवनगढ़ रियासत के पतन के बाद ओतहाँ के शासक हरिसिंहदेव नेपाल घाटी में आके शासन चलवले रहस ।

ओही तरे मैथिली के महाकवि के मान्यता प्राप्त विद्यापति के लेखनी में भी सेमरवनगढ़ के स्थानीयता के महक आजो बरकरार बा । कवीर के त बाते मत करीं । एह तरे भोजपुरी एगो जीअत–जागत विश्वभाषा के हैसियत में पहुँच चुकल बा बाँकिर अपने जन्मभूमि पर तिरस्कृत बा । बाजार के बात कइल जाओ त भोजपुरी ५० हजार वर्गमाइल क्षेत्र में आधुनिक नेपाल आ भारत में जीवंत मातृभाषा बा आ बाजार के भाषा भी । मातृभाषा के रूप में एतना लमहर बाजार कौनो भाषा के संसारे में शायद नशीब होई । तबो हमनी केंचुराइल गहुमन खानी मुड़ी गिराके बइठल बानी ।

रहल बात नेपाल के संदर्भ में नेपाली, भारत के संदर्भ में हिंदी आ विश्व के संदर्भ में अंग्रेजी सिखला बिना नइखे बनेवाला, त नेपाल आ भारत में भी क्रमशः नेपाली, हिन्दी आ अंग्रेजी विषय में ही सब से अधिक लोग एस. एल. सी., एस. ई. ई. भा मैट्रिकुलेशन के परीक्षा में काहे फेल हो रहल बा ? एकर उपयुक्त जवाब बिना खोजले लबरई के नेपाली नेपालिए में, हिंदी हिंदिए में आ अंग्रेजी अंग्रेजिए में पढ़ाके होखे भा नेपाली, हिंदी आ अंग्रेजी मात्र के माध्यम बनाके समूचा विषय पढ़ाके होखे, ज्ञान भा प्रमाणपत्र बहुत आसानी से प्राप्त होखेवाला नइखे ।

सन २००० से पहिले सीधा सिखाई विधि के प्रमुखता देहल गइल रहे । यानी जवन भाषा पढ़ेके बा ओही भाषा में पढ़ीं । बाँकिर ऊ बालू के भीत सावित भइल । अतः गैर मातृभाषा विषय पढ़े से पहिले मातृभाषा पढ़ल–जानल जरूरी बा ।
दोसर बात बा भाषिक विविधता ओराई त जैविक विविधता भी ओराई आ अइसन भइला पर मानव अस्तित्व भी खतरा में पड़ी ।

अतः बाजार बनावल भी जा सकता, ओहीसुके बाजार के कारण आपन भाषा छोड़ल ठीक नइखे । अगर विरान उत्पादन के बाजार के उपयोगे करेके बा त विरान भाषा सिखे खातिर भी मातृभाषा पहिले सिखल पढ़ल जरूरी बा आ एह सब से अधिक जरूरी बा मानव अस्तित्व, जेकरा खातिर मातृभाषा के बँचाके आ बढ़ाके जैविक विविधता भी बँचावल जा सकता । ओहीसुके भोजपुरी के संदर्भ में भोजपुरिया लोग समय रहते सोचो । भोजपुरिया क्षेत्र में एह शैक्षिक शत्र से भोजपुरी में पढ़ाई खातिर आपन गाँवरनगरपालिका, जिला समन्वय समिति, प्रादेशिक सरकार आ नेपाल सरकार पाठ्यक्रम विकास केंद्र में पाठ्यपुस्तक खातिर जल्दी संपर्क करो ।

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