भूकम्प : साधारण जानकारी

    169

    भूकम्प : साधारण जानकारी

    आनन्द कुमार गुप्ता

    भूकम्प पृथ्वी में लगातार होखेवाला एगो नियमित प्रक्रिया भा दैवी विपत्ति ह । पृथ्वी में सात गो मुख्य प्लेट होला । सातु प्लेट सँगही चलत रहेला । चलत अवस्था में जब कवनो भी दूगो प्लेट एक दुसरा से टकराला तब भूकम्प होला भा धरती डोलेला । दूरी के हिसाब से भूकम्प तीन प्रकार के होला । पृथ्वी के सतह से ३० कि.मी. उपर के दूरी से आवेवाला के स्यालो, ३० से ७० कि.मी. तकले के मिडियम आ ३० से ३ सय कि.मी. तकले के डिप कहल जाला । सबसे बेसि क्षति ३० कि.मी. तकले वाला (स्यालो भूकम्प) जवन नेपाल में १२ वैशाख २०७२ में आइल रहे । भूकम्प के दूगो वेभ होला । एगो बडी वेभ आ दुसर सर्फिस वेभ । बडी वेभ में प्राइमरी आ सेकेण्डरी तथा सर्फिस वेभ में रेली आ लव कहल दूगो अलग–अलग प्रकार होला । बडी वेभ कम आ सर्फिस वेभ बेसि क्षति पहँुचावेला । भूकम्प के भी गर्भ होला । पृथ्वी के गर्भ जहाँ से ई पारम्भ होला , ओकरा के हाईपोसेन्टर कहल जाला जब कि भूकम्प के पहिलका धक्का महशुस भइल धर्ती के सतह के इपिसेन्टर कहल जाला जवन हाइपोसेन्टर के ठीक उपर धरती के सतह ह । नेपाल के बैशाख १२ गते के भूकम्प के इपिसेन्टर लमजुङ्ख रहे ।

    सैद्धान्तिक रुप में भूकम्प दहिना–बाँया डोलेवाला क्षैतीजीय हलचल (होरिजेण्टल वेभ) आ उपर–निचा डोलेवाला लम्बीय हलचल (भर्टिकल वेभ) कके दू किसिम के होला, बाकिर कबो–कबो दूनू मिल के संघही आगइल त औरी खतरनाक होखेला जवन नेपाल में आइल रलऽ । भूकम्प दू तरिका से नापाला, एगो रेक्टर स्केल आ दोसर इन्टेन्सिटी । स्केल के विकास होगइला के बाद इन्टेन्सिटी के प्रयोग कम होता । स्केल से भूकम्प के क्षमता नापाला जब कि इन्टेन्सिटी से क्षति के नाप के ही केतना मात्रा के भूकम्प आइल रलऽ ओकर अनुमान कइल जाला ओहिसे इन्टेन्सिटी बहुत आधिकारिक आ विश्वशनीय ना होला । रेक्टर स्केल में ० से १० तकले के ही भूकम्प नापा सकता ।

    भूकम्प रोज होत रहेला, बाकिर हमनी के मालुम ना होला । १ से ४ रेक्टर स्केल तकले के भूकम्प क्षति ना करेला । ५ रेक्टर स्केल से उपर के भूकम्प ही क्षति पहँुचावेला । सामान्य भूकम्प के ना नापल जाला । वास्तव में पृथ्वी में उत्पन्न होखेवाला अनेक हलचल के कारण से भूसतह में होखेवाला कम्पन ही भूकम्प ह । ५ रेक्टर स्केल से उपर के भूकम्प विध्वंसकारी प्राकृतिक प्रकोप ह जवन पृथ्वी के सतह में विद्यमान भौतिक, जैविक आ सामाजिक पक्ष सब के प्रत्यक्ष प्रभाव पारेला । भूकम्प होखे में विभिन्न कारण सब मेसे कुछ प्रमुख कारण सब (१) पृथ्वी के आन्तरीक शक्ति में आवेवाला विचलन (२) ज्वालामुखी विस्पोटन (३) हिमपात आ भूक्षय (४) गुरुत्वाकर्षण शक्ति (५) भूगर्भ के चटानी प्लेट सब के स्थान्तरण (६) मानवीय क्रियाकलाप इत्यादि ह ।

    हिमालय क्षेत्र के निर्माण दूगो बड़का–बड़का टेक्टोनिक प्लेट (इन्डियन प्लेट आ युरेसियन प्लेट) के निरन्तर टकराव आ इन्डियन प्लेट युरेसियन प्लेट के निचा ओरी घुसत गइला के कारण से भइल बा । एकरे प्रभाव के कारण से हिमालय क्षेत्र में लाखौँ वर्ष पहिले जमिन में बड़का–बड़का चिरा पर गइल, जेकरा के फल्ट कहल जाला । निरन्तर दूगो बड़का प्लेट के बीच में घर्षण के कारण से बहुत ज्यादा मात्रा में शक्ति जमिन के नीचा सञ्चित हो गइल । उहे शक्ति समय–समय में जमिन के कमजोर भाग से बाहर आवेला । एकरे के हमनी भूकम्प कहेनी । इहे पृथ्वी में कम्पन लियावेला जवन प्रक्रिया हजारौँ वर्ष से निरन्तर चलत आ रहल बा । सन् १२५५ के नेपाल के खतरनाक भूकम्प, १५५० के आसाम भूकम्प, १९०५ के काकड़ा भूकम्प, १८९७ के सिलोंग भूकम्प, १९०५ के देहरादुन भूकम्प सब भूकम्प के कारण इन्डियन प्लेट आ तिब्बती प्लेट बीच के टकराब मुख्य ह । इन्डियन प्लेट उपर के ओर जात अवस्था में तिब्बती प्लेट रोकेला जवना के कारण से उहाँ खतरनाक टकराब सिर्जना होला, फलस्वरुप बिशाल शक्ति पैदा होला आ धरती के कमजोर जगह से भूकम्प के रुप में कम्पन्न पैदा करेला ।

    अभिन तकले संसार में सर्वाधिक ९.५ रेक्टर स्केल के भूकम्प गइल बा । चिली में गइल बिनासकारी भूकम्प ही अभिन तकले के सबसे बड़का भूकम्प ह । अइसही इण्डोनेसिया में ९.३ आ जापान में सन् २०११ में ९.५ रेक्टर स्केल के भूकम्प गइल रहे । नेपाल में वि. स.१९९० (सन १९३४) में ८.४ रेक्टर स्केल के भूकम्प गइल रहे जबकि ओकरा लगभग सय वर्ष पहिले सन १८३३ में बड़का भूकम्प गइल रहे । नेपाल के इतिहास देखला पर हरेक ८० से १ सय वर्ष में बड़का भूकम्प आ रहल बा । वि.स.१९९० साल के बाद अबकिर के भूकम्प सबसे बड़का ह । भूकम्प तीन चरण में आवेला । पहिलका पूर्व सांकेतिक रुप में छोट आवेला जवना के झटका महशुस ना होला भा बहुत कम होला । दुसरका चरण में आवेवाला भूकम्प मुख्य झट्का ह । ओकरा बाद आवेवाला सहायक भूकम्प ह । अभिन बेर–बेर आरहल भूकम्प सहायक भूकम्प ह । एकरा के आफ्टर सक (पराकम्प) कहल जाला । मुख्य धक्का महशुस भइला के ७२ घण्टा तकले सहायक धक्का आ सकता, कबो–कबो बेसि दिन तकले आवेला । बाकिर एगो बात पक्का बा कि सहायक धक्का मुख्य धक्का जेतना बड़का ना कबो आइल बा ना आ सकता । ई खालि नेपाल में ही ना दुसरा जगह पर भी होला । वि.स. १९९० साल में भी ६ दिन तकले आफ्टर सक (पराकम्प) गइल रहे ।

    विज्ञान आ प्रविधी के क्षेत्र में दिनानुदिन भइल आश्चर्यजनक प्रगति के वावजुद भी भूकम्प सम्बन्धी पुर्वानुमान तथा भविष्यवाणी कइल नइखे जा सकत । भूकम्प के भविष्यवाणी ना ज्योतिश शास्त्र करे सकल बा ना आधुनिक विज्ञान तसर्थ एकर भविष्यवाण्ी अभिन तकले असम्भव बा । यदी सम्भव रहित त संसार में भा नेपाल में भूकम्प के कारण लाखो लोग के आ सम्पति के क्षति ना होइत । हिमालय क्षेत्र आ एमें होखेवाला भूकम्प के अध्ययन अभिन तकले सयौँ देशी–विदेशी अनुसन्धानकर्ता लोग कके बहुते शोधपत्र प्रकाशित कइले बा लोग । ओहिसही सन् २००१ मा चर्चित शोधपत्रिका ‘साइन्स’ में हिमालय क्षेत्र में बहुते ८ रेक्टर स्केल के भूकम्प सब जाए सके भर के शक्ति सञ्चय भइल बात प्रकाशित भइल रहे । एकरा के बहुत गम्भीर अध्ययन मानल गइल । ओकरा बाद भी बहुते शोधपत्र सब हिमालय क्षेत्र में भूकम्प के जोखिम बहुते ज्यादा भइल बतवलक । जापान आ चीन में साँप सब एके बेर बिल मेसे बाहर अइला पर, आशमान में बहुत सँख्या में चिरई के उडला पर, बहुते कुुकुर एके साथे भोकला पर, माल–जाल के एके सँघे चिलइला पर भूकम्प आई कहके अनुमान लगावल जाला, बाकिर बैज्ञानिक रुप में ई सब बात के भूकम्प आवे के संकेत के रुप में स्वीकार नइखे कइल जा सकत आ ह भी ना । कवनो बेरा संयोगवस हो गइल त अलगे बात बा । भूकम्प से होखेवाला क्षति जमिन के बनावट आ भवन के संरचना के उपर भर परेला । काठमाडौँ उपत्यका कवनो समय में पोखरा रहे । उहाँ के जमिन गील बा जेमे भूकम्प के शक्ति बोक के लियावेवाला भूकम्पीय तरङ्ग पार होके जाए में बेसि समय लागेला । ओहिसे ज्यादा मात्रा में शक्ति ओइसन जमिन में अडस जाला । काठमाडौँ आ आस–पास के क्षेत्र में बेसि क्षति होखे के कारण इहे ह । क्षतिग्रस्त अधिकांश संरचनासब सयौँ वर्ष पुरान रलऽ सँ जेमे भूकम्प सहे के आधुनिक निर्माणशैली ना भइल संरचना बेसि भतकला के कारण से बेसि जनधन के क्षति भइल बा । आदमी के भूकम्प ना बल्कि मानव निर्मित संरचना बेसि क्षति पहँुचावेला । नेपाल में ज्वालामुखी विस्फोट होरहल बा कहल बात एकदम झुठ ह । एकर संभावना शून्य प्रतिशत मात्र बा । ज्वालामुखी विस्फोट आ सुनामी सामुन्द्रिक मुलुकसब में ही होखेवाला घटना ह । हमनी जइसन पहाडी मुलुक में ओइसन होइए नइखे सकत । नेपाल समुन्द्र सतह से ७२ से ८ हजार ८ सय ४८ मिटर उचाइ भइल देश ह, एतना उचाई भइल देश में ज्वालामुखी विस्फोट होखही नइखे सकत । संसार में ज्वालामुखी विस्फोटन के अधिक खतरा रहल देश अमेंंरिका, इण्डोनेसिया आ ब्राजिल ह ।

    प्रकृति के लिला अपरम्पार बा । प्रकृति ही कबो वरदान स्वरुप पृथ्वी के सुन्दर बनावेला आ विभिन्न रुप में उपहार देवेला त कबो प्रकृति ही भयावह आ विनाशलीला रचेला जवना चलते केतना लोग मानविय सभ्यता के क्षति हो जाला । भूकम्प दैवी प्रकोप के रुप में उत्पन्न होखेवाला प्रयलकारी भवितब्य ह जवन मानव सभ्यता , संस्कृति , इतिहास आ कला के विनास करेला । भूकम्प कवनो माहामारी ना ह, ई त प्राकृतिक विपत्ति ह । ई केकरो रोकले ना रोकाई, बाकिर सावधानी अपना सकल जाला । मुख्य रुप में भवन भूकम्प प्रतिरोधात्मक बनावे के पड़ल । बेसि लोग जम्मा हाखेवाला स्कुल, क्याम्पस, सरकारी कार्यालय, अस्पताल जइसन संरचनासब बहुते मजबुत बनावे के पड़ल जवना से क्षति कम होखो । भवन निर्माण भूकम्प प्रतिरोधात्मक बनावे खातिर नेपाल सरकार भवन निर्माण आचारसंहिता बनइले बा जवना के पूर्ण रुप में लागू करे के पड़ल । दुसरा आरिया भूकम्प अइला पर घर के भितर रहल आदमी के कम चोट लागेवाला जगह जैसे घर के बिम के निचा, टेबुल भा चौकी के नीचा रहला पर सुरक्षित होखे सकल जाई । बिजुली के स्वीच अफ करे के, ग्यास बन्द करे के, आ कम्पन कम होते मातर बाहर निकल जाए के, बिजुली के लाइन टुटला पर भी भाग के कवनो खुल्ला जगह पर चल जाए के चाही । बहुते बेसि क्षति भइल घर में ना रहल ही ठीक होला, बाकिर सामान्य क्षति भइल घर में मज्जा से रहला से होई । भूकम्प गइला के बाद सब से बेसि सचेत स्वास्थ्य के बारे में भइल जरुरी बा काहेसे कि मरल आदमी के कारण महामारी फैले के डर रहेला ।

    विसं १९९० साल के महाभूकम्प के याद रहो उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष माघ २ गते भूकम्प दिवस मनावल जाला । ओह दिने भूकम्प अइला पर कइसे बाँचल जाई , भूकम्प से सुरक्षित भवन कइसे बनावल जाई, एकरे बारे में जनचेतना जगावेवाला काम सरकारी तथा गैरसरकारी तवर से निरन्तर होत आ रहल बा, बाकिर ई सहरी क्षेत्र में मात्रे सिमित बा । यदि एहिसन जानकारी के गम्भीरता से लेहल गइल रहित त अभिन के अवस्था ना आइत आ लोग एतना ना डेराइत । ई सूचना सब जनमानस में ना पुगला के कारण से विभिन्न प्रकार के भ्रमपूर्ण हल्लासब लोग के औरी आतंकित बना रहल बा । ओहिसे भूकम्प सम्बन्धी सूचना सब आधिकारिक निकाय भा व्यक्ति से ही सम्प्रेषण होखे के पड़ल आ कडाइ के साथे लागु होखे के पड़ल ।

    advertisement

    राउर टिप्पणी

    राउर टिप्पणी लिखी
    Please enter your name here