भोजपुरियन के ऊपर षड़यन्त्र

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भोजपुरियन के ऊपर षड़यन्त्र

– बेचु गौड़

भाषिक समूह के जनसांख्यिक आधार पर विश्व के आठवाँ स्थान पर रहल भोजपुरी आज राजनीतिक खिचातानी अउर स्वार्थ के कारण संकट में बा । १३ करोड से जादा संख्या रहल भोजपुरियन के भारतो में प्रदेश विभाजन के समय उत्तर प्रदेश अउर बिहार में बँटले के नाते भोजपुरी भाषा राज्य अउर सत्ता में नजदिक होके आपन कौनो फायदा नाई उठा पावत बा । उत्तर प्रदेश के मुख्यालाय लखनऊ में बनल जहवाँ स्थानीय भाषिक प्रभाव अवधी के बा । ओहीतरे बिहार के मुख्यालय पटना में बनल जहवाँ के भाषिक प्रभाव हिंदी के बाद स्थानीय भाषा मगही के रहेला । दिल्ली में भोजपुरी के स्थानीय प्रभाव रहले के बाते नाई भइल ।

आज ठीके उहे दशा नेपाल के भोजपुरियन के बनले के लक्षण देखाई देत बा । काहेकि आज मधेश केंद्रित होके राजनीति करेवाला राजनीतिक पार्टी सब भी स्वायत्त मधेश एक प्रदेश के बात छोड़त दुई प्रदेश के अवधारणा आगे बढ़ा रहल हवें । चितवन से पुरब एक प्रदेश अउर नवलपरासी से पश्चिम एक प्रदेश । ई अवधारणा से मधेश में ही भाषिक रूप से भोजपुरी टुटले के अवस्था होई जइसन कि भारत में उत्तर प्रदेश अउर बिहार में टुटल बा । नेपाल के मधेश के भीतर चितवन, रौतहट, बारा अउर पर्सा भोजपुरी समूह एक तरफ होई अउर नवलपरासी, रूपन्देही, कपिलवस्तु भोजपुरी समूह अगल हो जाई । मुख्यालय में अगर आपन पहुँच बनावल चाही त उहो भारत के जइसे ही संकट में रही । अगर दुई प्रदेश के मुख्यालय भी पूर्वी मधेश के जनकपुर अगर बनल त ओहवा स्थानीय भाषा मैथली रही अउर दाङ में पश्चिमी मधेश के मुख्यालय बनल त ओहवा अवधी भाषा के स्थानीय प्रभाव रही । ओ से भोजपुरी भारत में ही नाही नेपाल के मधेश में बटवारा में परे जात बा ।

ओसे भी मधेश आंदोलन के बाद जवन सम्झौता भइल बा स्वायत्त मधेश प्रदेश ओ पर ही अडान राजनीतिक पार्टी के लेहे खातिर दबाव बढावे के परी । पहिले मधेश प्रदेश बनले के बाद ही मधेश में बोलेवाला मैथिली, भोजपुरी अउर अवधी भाषिक आधार पर प्रदेश भीतर उप–प्रदेश बनाके भोजपरी, अवधी अउर मैथिली के स्थानीय सरकारी कामकाजी भाषा बनले के बाद भाषा अपने अस्तित्व के बचा सकी । कौनो भी देश के भाषा जबले सरकारी कामकाजी भाषा नाई बनल बा, तबले भाषा विकास के खातिर सरकारी लगानी नाई होला । कुछ साहित्यकार, संगीतकार भर से भाषा के संरक्षण कइल कठिन बा । जइसे के भारत में देखल जाई त गुजराती भाषा प्रदेश के कामकाजी भाषा हवे, बाकिर ओही उत्तर प्रदेश अउर बिहार में करोड़ो के संख्या में बोलेवाला अवधी, भोजपुरी, मैथली अउर मगही भाषा सरकारी कामकाजी भाषा नबनले से जईसन चाही ओइसन विकास नाई कई पावत बा । बाकिर साझा भाषा हिंदी ही आपन प्रभुत्व बनावत जात बा, सरकारी कामकाजी भाषा बनले के कारण ।

मधेश के माग लेके राजनीति करेवाले पार्टी सम्पर्क भाषाके रूप में भले ही हिंदी भाषा के प्रयोग करत बाटे, बकिर ग्रामीण क्षेत्र में लाखो लाख के संख्या में रहेवाले मैथिली, भोजपुरी अउर अवधीभाषी आपन दैनिक जिवन में आपन ही भाषा के प्रयोग करेलन । आपन संस्कृति, सभ्यता, संस्कार भी अपनही भाषा में करेलन । अगर उहें भाषा सरकारी कामकाजी, पठन पाठन में होखे लागी त ओह भाषा के विकास ही नाई संसार में आपन पहिचान करवले सहज होई ।

ओइसे मधेश में प्राचीनता के आधार पर भी एह भाषा के प्रभुत्व रहल । प्राचीन मधेश जवन हजारो वर्ष के इतिहास बोकले बा, लिपि के विकास न भईले बाद भी मधेश में बोलेवाला भाषा के विकास राज्य के हिसाब से ही बनले के आधार पावल जाला । मध्यदेश, मज्झिमदेश आज के मधेश गंगा सभ्यता के रूपमे चिन्हाला । मानव सभ्यता के विकास कौनो भी नदी के किनारे ही भइल पावल जाला । जम्बु द्वीप पर खास कइके सिन्धु सभ्यता, गंगा सभ्यता, समुद्री तट पे तमिल सभ्यता जईसन सभ्यता पावल जाला । ओसे से गंगा नदी से पर्वत तकले के बीच के सभ्यता के ही गंगा सभ्यता के रूप में जानल जाला । हिमालय से बहेवाला नदी पश्चिमी क्षेत्र में (अबहीनवा के पाकिस्तान में) परेवाला सिंधु नदी में मिलेवाला सब नदी के किनारे जेतना सभ्यता बनल ऊ सभ्यता के सिंधु सभ्यता के नाम से चिन्हल जाला । सिंधु नदी अरब सागर में मिलेला । ओहीतर पुर्वी क्षेत्र के हिमालय से जेतना नदी बहल ओतना गंगा नदी में ही मिलके बंगाल के खाड़ी में मिलेला । एही गंगा सभ्यता पर के पहिला राजा मनु के बनावल मध्यदेश हवे ।

इहवाँ उनकर बंशज लोग शासन कईले रहलन । पुत्री के ओर के बंशज चन्द्रबंशी भईलन जवन कुरू राज्य में आपन राज्य बनवले रहलन । कुरू राज्य के राजा भरत के भारतवर्ष अउर भारत के पहिचान दिअवलन । जवने कुरू राज्य के भाषा खड़ी भाषा रहल । अबहिन भी ग्रामीण क्षेत्र में बोलल जाला । हिंदी के विकास भी संस्कृत अउर खड़ी भाषा के ही मिलाके बनल बा । ओही तरे मनु के पुत्र इछ्वाकु वंश के सुर्यवंशी राजा लोग कौशल (अवध) में आपन राज्य बनवल । ओही वंशज के राजा रघु, दशरथ, राम, लव–कुश के वंशज राज कईलस । कौशल राज्य के भााषा अवधी हवें । ओहीतर कौशल के पुरब में काशी राज्य के रूप में विकसित भइल ।

काशी राज्य के भितर ही शाक्य, वैशाली, बनारस, कोलिय जइसन गणराज्य बनल । काशी राज्य के आपन भाषा भोजुपरी हवे । ओकरे पुरव में विदेह राज्य बनल जवने के राजधानी जनकपुर रहल जहवाँ सिरध्वज जनक राज कइलन । ओहवा के मैथिल सभ्यता अउर मैथिली भाषा हवे । बाद में गंगा के किनारे नदी के माध्यम से समुद्रीक ब्यपार के नाते मगध राज्य विकासित भइल । जवन मगध पुरे भारत पे साम्राज्य भी कायम कइलस । ओ मगध के भी आपन मगही भाषा हवे । कुरू, कौशल, काशी, विदेह, मगध, अंग जइसन राज्य मधेश के भितर के ही राज्य हवे । इहवाँ के आपन भाषा भी अबहिन लोप नाई भइल बा ।

मधेश में बाहर से आइल आर्य, मुगल अउर अग्रेज के कारण से मधेश राज्य तितर वितर होत आइल । मूल निवासी आपन पहचान बँचवले में ही लगल रहलन । ई सब मधेश के मूल निवासी के ऊपर षड़यंत्रमूलक तरिका से ही भाषिक, सांस्कृतिक रूप से आक्रमण करत मूल निवासी के भाषा अउर संस्कृति पे आक्रमण कइलन । अग्रेज के ही समय में भाषिक अउर सांस्कृतिक रूप से एक रहल मधेशी समुदाय के भी नेपाल अउर भारत सार्वभौमिकता में विभाजन भइल । सन १८१६ के सुगौली संधि अउर १८६० के सन्धि के ही कारण से अवधी, भोजपुरी अउर मैथली भाषा बोलेवाले लोग दुई देश में बट गइलन । ओतनाही नाही, भारत में अजादी के बाद भी डा. भिम राव अंबेडकर उत्तरी क्षेत्र के मातृभाषा के जब माग कइलन, ओ समय में कुछ सामंत अउर खास कइके आर्य समुदाय ही ओहवा के अवधी, भोजपुरी अउर मैथली, मगही मातृभाषा के न देके मातृभाषा के रूप में हिंदी दर्ज करवलन । जवने के प्रत्यक्ष प्रमाण भारतीय नोट में देख सकल जाई । कुछ लाख बोलेवाला संस्कृत के उल्लेख पावल जाई बकिर करोड़ो के संख्या में बोलावाला भोजपुरी, अवधी, मैथली, मगही के कवनो स्थान नाई बा । भाषा के कारण राज्यसत्ता में मूल निवासी के पकड़ नाई बन पावेला ।

सन १८१६ अउर १८६० के गोर्खा अउर अंग्रेज के सम्झौता से कुछ मधेश के भाग नेपाल के नाम से गोर्खा साम्राज्य के अधिन में आइल । इहाँ आज भी भोजपुरी, अधवी अउर मैथली भाषा के उहे अवस्था बा । खस भाषा सरकारी कामकाजी भाषा बनल । खस में उहे आर्य लोग के ही प्रभाव बा । ओसे भी नेपाल अधिनस्त मूल निवासी मधेशी भाषा के ही कारण मार खात आवत बाटे । नेपाल में संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र आज आईल बा । मधेश आंदोलन के भावना भी उहे रहल । ताकि गणतंत्र में भाषागत अजादी भी मिली । बकिर आज भी उहे आर्य खस अउर समंत लोग के राजनीति में हालीमुहाली बा ।

मधेश विद्रोह से मिलल स्वायत्त मधेश प्रदेश बनले के बाद भोजपुरी, अधवी, मैथली भाषा भी कामकाजी भाषा बनी । ओेसे सरकार अउर सत्ता में पहुँच बनी । बकिर संसोधनवादी होत मधेश केंद्रित पार्टी चाहे राष्ट्रीय दल के नेता भाषिक अजादी पर षड़यंत्र करत आवत बाटे । जवने में आज के संरचना देखल जाई त सब से दुर्दशा भोजपुरियन के बनेवाला बा । जवन दुगो प्रदेश में बटले के अवस्था में बाटे । एह पर भोजपुरी भाषी लोग के एक होके आवाज उठावल आज के आवश्यकता बनत बा । एहपर भोजपुरी क्षेत्र के बुद्धिजीवी लोग के ध्यान देहेके परी ।

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