भोजपुरिया बचपन – घुघुवा माना  

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घुघुवा माना

यी खेल मतारी के सहजोग से खेलल जाला । एह खेल मे ६ महिना से ले के ५ साल तक के लईकन लोग भाग लेला । एह खेल मे लरिकन सब के खुबे मजा आवेला । मतारी बिछावना पर चीते सूत जाली । आपन ठेहुना के उपर काओर मोड के लईका के गोड के पंजा पर बईठा लेली आ बराबर आपन लईका के आगे पीछे करेली । खेल के सिलसिला मे मतारी बोल भी बोलेली । खेल के यी बोल बेमतलब के ना होला । बहुते गम्भीर ओमे छिपल रहेला ।

गलर गलर पुवा पाकेला

चिलरा खोईंछा नाचेला

जोरे चिलरा खेत खरिहान

ले अईहे तिलकीया धान

ओहि धान के चिउरा कुटाइबो

बभान बिसुन नेवता पठइबो

बभना के पुतवा दिही असीस

बाबुवा जिहे लाख बरिस  

मतारी पुवा पकावतारी । कराही मे पुवा गलर गलर करता । पुवा के गमक पाके चिलरा गाँव के नोकर खुशी से नाचत की आजू पुवा खाए के मिली । मतारी ओकरा के धान ले आवे के कहतारी । ओह धान के चिउरा कुटिहे । बाभन बिसुन के नेवता पठईहे । बाभन के बेटवा आसीस दी आ उनकर मुन्ना लखिया होइहे ।

घुघुआ माना उपजे धाना

धनी धनी भईले बाबुआ के मामा

बाबुआ के नाक कान दुनु छेदइबो

सोनरा के देबो भर सूप धाना

सोनरा के पुतवा दिही आसीस

बाबुआ जिहे लाख बरिस

धान के फसल खूब उबजल बा । एही बिचे बबुआ के मामा चहुपगईले । मामा के आईला पर लईका लोग खूब खुश होला । मतारी कहतारी की सोनार के बोलवा के नाक आ कान दुनु छेदवा देब । सोनार के इनाम मे भरसूप धान देब । सोनार के बालबच्चा हमके आसीस दी आ हमार बाबुवा ढेर दिन ले जिहे ।

भोजपुरी मे लरिकन के नाक कान छेदवे के चलन बा । माराछ लरिकन के नाक आ कुण्डल पहिरे खातिर कान छेदाला ।

घुघुवा माना मानेर से

सठिया के चउरा डेढ़ सेर

बाबुवा खाले दूध भतवा

बिलईया चाटे पातवा

पातवा   उधिया गईल

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बिलईया लाजा गईल

मतारी कहतारी की मानेर से डेढ़ सेर साठी के चाउर मंगवले बानी । ओकर भात दूध के संघे बाबुवा खातारे बिलार उनकर जूठ पतल चाटत बिया । एही बीच मे पतल उधिया जाता आ बिलार लाजा जातिया ।

आखिर मे मतारी आपन पंजा उपर उठावेली आ ओके धीरे धीरे नीचे लेआवेली । एह सीलसिला मे बोल भी बोलेली ।

नाई भीती उठेले

पुरानी भीती गिरेले

मतलब ई की नवका पीढ़ी के निर्माण हो रहल बा आ पुरनका पीढ़ी ढह रहल बा । एकरा बाद खेल खतम हो जाला

साभार : खेलखिलाड़ी : शारदानन्द प्रसाद

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