भोजपुरी के छबि सुधारे मे युवा पुस्ता के जरुरी

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भोजपुरी के छबि सुधारे मे युवा पुस्ता के जरुरी

मिथिलेश चौरसिया
"चाचाजी, हम काल्हु स्कूल में डांस कईले रहनी, सभे कोई हमरा के खुबे सरहले रहे।
अच्छा ! बढ़िया डांस करे ल का, कवन गाना पर डांस कईले रल ह ?
जी,नेपाली गाना पर । आ हिंदी पर भी नचले रहनी, बहोत ताली बजल रहे ।
अच्छा, इंग्लिश गाना पर भी नाचे ल ?
जी कबो कबो, सर कहेनी तब ।
अच्छा, भोजपुरी गाना पर ना नाचे ल ?
छि, भोजपुरी गाना पर ना नाचेनी ,
काहे ?
भोजपुरी गाना फूहड़ होला ।
तोहरा से के ई कहलख ? सुन्दर गाना खोज के ओपर नाच ब त ना होई ?
ना, सर लोग भोजपुरी गाना पर ना नाचे देवेला लोग, सर कहेनी भोजपुरी फूहड़ होला ।"

ऊपर लिखल संबाद हमर भतीजा के ह । एक दिन सबेरे सबेरे आईल रहलन हमरा लगे त बात भईल रहे । उनकर बात सुनके उनकरा पर ना माकिर उनकर शिक्षक लोगन पर खीस बरत रहे ।

भतिजा त अबगे ३ कक्षा मे पढ़ेलन, अबोध बाड़न मकिर गुरु सभे के त बुझेके चाहित कि भले आज भोजपुरी मे कुछ फुहड होखे मकिर उन्कर ई कर्तब्य ना ह कि बच्चा के दिमाग मे अनाबसनाब भा गलत  चिज भरदी । विचारा भतिजा के दिमाग त इहे सम्झी की भोजपुरी फुहड बाहेक कुछओ नईखे ।

ई सब बात वोह दिन हम दिनभर सोचत रह गईनी । साझ भईल त एक संघतिया के फोन आईल कि एक जगह बैठल जावो माने कि पार्टी कईल जाव । हम कहनी कि चली ठिक बा । सांझ के एक जगह हमार स्कूल के संघतिया सब बैठल रह्नी आ ढेर सारा बात होत रहे । एहि क्रम मे हम आजु सवेरे भतिजा से भईल बतकही भी सुनईनी ।

साथी लोगन मे एक साथी पहाडी भी रहलन आ पेशा से एक निजि स्कूल के हेडमास्टर भी हवन, हमार बात सुनते ऊ कहलन कि ठिके त कहलख सर, भोजपुरी फूहड़ बा त फुहड़े नु कहल जाई । एहिमे एक अउर दोस्त जे पेसा से पत्रकार हवन, ऊ भी पहाडी संघतिया के बात के साथ देत कहनी की स्कूल में भोजपुरी बोलेके अगर दिहल जाय त सारा बिद्ध्यार्थी बिगड़ जैहे, सारा गाली गलौज करे लगिहे । ईहा तकले चुप रहल एक संघतिया कहत बाड़े की ‘यार हमर त जुबाने बिगड़ गईल बा भोजपुरी बोलते बोलते’ । हमनी पूछनी की का भईल त उहाके कहनी की काल्हु उ आपन बॉस से बतियात रहनी की बॉस कहले “तुमको तोह हिंदी भी नहीं आती” । एहसे उ संघतिया बहोत उदास होगईल रहलन । ई सभी बात सुनके हमर मन भी  निरास होगईल आ ई नकारात्मक संबाद के तोडेके कोसिस कईनी ।

लोग के भोजपुरी के फूहड़पन से परहेज बा, भोजपुरी भाषा से ना । आ ई फूहड़पन हटावे लाए युवा पुस्ता ना आगे आई त के आई ?

हमर कहनाम रहे की आज हमनी के युवा वर्ग जे बिशेष रूपसे अच्छा ओहदा पर बाड़े आ जेकर माईभाषा भोजपुरी हवे उहे लोग अगर अईसन नाकारात्मक सन्देश बच्चा के दिमाग में भर दी लोग त कईसे भोजपुरी के विकाश होई । अगर पढ़ल लिखल शिक्षित लोग भोजपुरी के साथ छोड़ दिहे त आखिर में खाली जगह भरेलाए बाउरे लोग आई नु, आ ईहे कारण बा की आज भोजपुरी के लोग फूहड़पनसे नाता जोड लेहले बा ।

हमनी जब बच्चा रहनी तब नेपाली/हिंदी पढ़त गईनी वोह बेर मे सोचेके क्षमता ना रहे माकिर आज जब पढ़-लिख के अच्छा ओहदा पर पहुच के भी कुछो ना कईनी, उहे बच्चा वाला विचार लेके चलनि त कइसे विकाश होई भोजपुरी के ?

आपन हेडमास्टर वाला संघतिया से कहनी की एक बात बताव का लईका सब आपन मनसे जवन भी गाना पर नाच सकेले, की कोई निगरानी करेवाला भी रहेला वा केहूके अनुमति लेवेके परेला जईसे की डांस टीचर आदि ? तब उहा के कहनी की ह रहेला डांस टीचर भा कल्चरल टीचर रहेला जे निगरानी करेला । तब हम कहनी की अगर अईसन बा त का कवनो बच्चा रउवा लोगन के अनुमति लेके अच्छा गाना नइखे गा सकत, अगर गाना भोजपुरी में ही बा माकिर सुन्दर बा त तोहनी के परहेज काथी के बा ? पूरा भोजपुरी भाषा पर प्रतिबन्ध काहे ? तोहनी के फूहड़ शब्द से आपति बा की पूरा भाषा से ?

कमती में अगर नइखे कुछ कर सकत त दोसर के गाली त ना दिही । हम फेर से उहे हेडमास्टर संघतिया से पूछनी की अगर बिहान बीरगंज एरियामें भोजपुरी के अनिवार्य बिषय कर दिहल जात बा त का तोहनी प्राइवेट स्कूलमें भोजपुरी ना पढाई कर ब?  तब जाके हेडमास्टर संघतिया कहत बाड़े की कहेना जरुर पढाएम । एपर तीसर संघतिया जे कहले रहे की उनकर जुबान बीगड गईल बा, उ कहत बाड़े की “हमार बॉस के हम कथी जवाब दिही, अब त लगत बा की हिंदी सिखेके पड़ी ? उ आगे कहलन की हमरा त नेपाली भी नीमन से ना आवे, हिंदी भा नेपाली बोलला पर सबमे भोजपुरी मिक्स होजाला, वोह बेरिया बहोत निराश आ लज्जा महसूस करेनी ।

उनकरा के संतवना देत हम कहनी की देख जब तक तू अपने आपसे लाजात रहब तब तक तोहरा के सभे केहू लज्वावत रही, संसार के इहे दस्तूर बा । तोहर बॉस होखस या जे भी उनकरा के कह की ‘जी हमार भाखा/लवज भोजपुरी ह, माँई भाषा भोजपुरी ह वोहिसे भोजपुरी मिक्स होजाला, वोइसे भी भाषा त एक दूसराके मनके बात आदानप्रदान करेवाला माध्यम ह  नु । का हिंदी बोलले जरुरी बा, भारत में भी त तमिल/तेलगू/केरला सब हिंदी ना बोलेले वा बोलेले त टुटल फूटल त का वोह लोग आगे नइखे ? अगर तोहर बॉस उच्च बिचार के बाड़े आ भाषा प्रति ज्ञान बा त तोहर बिचार के जरुर सरहिये ।

ई सारा संबाद के निचोड़ इहे रहल की आज बहुत सारा युवा पुस्ता देश के बहुत लमहर ओहदा पर पुगल बा लोग । बहुत जने प्रिंसिपल भईल बाड़े त केहू पत्रकार त केहू वकील त केहू साहित्यकार त केहू पुलिस प्रशासन मे बा त बहुते जने डॉक्टर इंजिनियर भईल बाड़े ।

ऊ सबलोग से निहोरा बा की जे भी राउर क्लाइंट कही या पेशेंट बा लोग, अगर उहा के भोजपुरी भाषी बानी त रउओ दू शब्द भोजपुरी में हि बतिया दिही । अगर बिद्ध्यार्थी भोजपुरी बोलत बाड़े त डाटला के शातिर उनकरा के दू गो भोजपुरी के सही शब्द सिखा दिही, अगर केहू भोजपुरी गाना पर नृत्य करके चाहत बाड़े त आछा गाना खोजके दे दिही माकिर एके बेर भाषा पर ही आरोप ना लगाई , तनिक मेहनत करी जुरूर बहुते निक गाना सब भी बा जवन की रौवा आपन स्कूल के प्रोग्राम मे बजा सकत बानी ।

एक बात अउर सभी हेडमास्टर लोगन से की कबो सुनर भोजपुरी गाना पर चेला सभन से नृत्य कराके देखि केतना सराहना मिली रउवा के अभिभावक लोगन से । एक बात जान लिही लोग के भोजपुरी के फूहड़पन से परहेज बा माकिर भोजपुरी भाषा से ना, आ ई फूहड़पन हटावे लाए युवा पुस्ता ना आगे आई त के आई ? जरुर सोचेम ।

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