भोजपुरी भाषा अउरी विकास । भोजपुरी जागरण – ११

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bhojpuri idioms

भोजपुरी जागरण – ११

“ना बोलला के मतलब इनकार ना होखेला,
हर नाकामयाबी के मतलब हार ना होखेला,
का होगइल भोजपुरी के भाषिक दर्जा ना मिलल त,
खाली दर्जा पावल ही भाषिक प्यार ना होखेला”

अशोक कुशवाहा

भो

जपुरी भाषा के इतिहास देखला पर ई भाषा के शुरुवात सातवा सताब्दि में शुरु भइल कुछ विज्ञलोग बतावेला । ई भाषा में गुरु गोरखनाथ सन ११०० में गोरखबानी के रचना कइले रहलन कहके मान्यता बा ।भोजपुरी भाषा पुरबी कही या मागधी परिवार के सब से पश्चिमी बोली ह ।भोजपुरी भाषा के अध्यन कर्ता ग्रियर्सन पुरबी बोली के नाम बिहारी कह के आपन लिंगविसटीक सर्बे लिखले बानी ।ग्रियर्सन के हिसाब से बिहारी परिवार में तिन गो बोली आवेला भोजपुरी, मैथली अउरी मगही ।भोजपुरी, मैथली औवुरी मगही भाषा के शब्द औरी बोली में जटिलता त मिलेला बाकिर बोलनिहार लोग एक दोसरा के बोली एतना ना सहज तरीका से बुझे लोग जेसे यी तिनु बोली बिहारी भाषा परिवार के अपभ्रंस ह कहल जा सकेला ।मैथली भाषा के साहित्यिक रचना प्राचीन काल से ही होते आरहल बा पर भोजपुरी भाषा के साहित्यिक बिकास प्राचीन काल में ना भईला के बाबजूद भी आज भोजपुरी भाषी लोग मैथली भाषी के जनसंख्या से बहुती बा लोग |

बिहारी परिवार के तीनो बोली भोजपुरी, मैथली औवुरी मगही में बिस्तार क्षेत्र के हिसाब से भोजपुरी के स्थान सबसे उच्च मानल जाला।उतर में हिमालय के तराई से लेके दक्षिण में मध्यान्त सरगुजा रियासत तक भोजपुरी के सियासत देखे के मिलेला ।बिहार प्रान्त में शाहाबाद, सारण, चम्पारण, राँची, जशपुर स्टेट, पालामऊ के कुछ भाग से लेके मुज्जफरपुर तक भोजपुरी भाषी लोग के क्षेत्र बा।ओइसे ही उतरप्रदेश के बनारस, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर, मिर्जापुर, गोरखपुर, आजमगढ़ औवुरी बस्ती जिल्ला के हरैया तहसील में स्थित कुवानो नदी के क्षेत्र मे भोजपुरियन लोग के अधिपत्य बा।नेपाल के सन्दर्भ में भोजपुरिया लोग सर्लाही, रौतहट, बारा, पर्सा, चिंतवन, कपिलबस्तु, मोरंग, नवलपरासी औवुरी रुपन्देही जिल्ला में भोजपुरिये के बोलबाला बा ।एकरा आलावा बर्मा, युगांडा, केन्या, मालदिप्स, फिजी, मारीशस, सूरीनाम, गुयाना, जमाइका, दी कैरिबियन, साउथ अफ्रीका, पकिस्तान, बंगलादेश, त्रिनिदाद औवुरी टाबागो सहित लगभग २० करोड़ भोजपुरियन भाषी लोग यी संसार के हर माहादिपन पर भोजपुरी के झन्डा फहराईले बा लोग |

डाक्टर सुनीति कुमार चटर्जी जी मागधी भाषा या बोली के तिन भाग मे बाट के अध्यन कईले बानी ।उनका हिसाब से भोजपुरी पश्चिमी मागधी बर्ग, मैथली औवुरी मगही मध्य मागधी बर्ग अउरी बंगला, आसामी औवुरी उड़िया पुरबी मागधी बर्ग के अन्तर्गत पड़ेला ।एहिसे बंगला, आसामी अउरी उड़िया भाषा भोजपुरी भाषा के चचेरी बहिन औवुरी मैथली आ मगही भोजपुरी के आपन बहिन कह के डाक्टर सुनिती कुमार चटर्जी बतवले बाडन ।भोजपुरी भाषा के नामकरण शाहाबाद जिल्ला के भोजपुर जगह के नाम पर ही कईल बा ।शाहाबाद जिल्ला के भ्रमण के क्रम में डाक्टर बुकनन १८१२ ईसवी में भोजपुर आईल रहलन ।उनकर हिसाब से भोजबंशी लोग उज्जैन राजपूतन लोग “चेरो” जाती के पाराजीत कर के भोजबंशी राज्य कायम कईलख लोग कह के आपन सर्बे में उल्लेख कईले बाड़े ।यिहे भोजबंशी से भोजपुरी के जनम भी मानल जाला |

भोजपुर राज्य बहुते प्रसिद्ध राज्य रहे ।भोजपुर के शासक प्राचीन उज्जैन राजपूत लोग रहे लोग जे लोग के मध्य युग के भारतीय इतिहास में बहुते महत्वपूर्ण स्थान देखल जा सकेला ।सन १८५७ तक भोजपुर राज्य के राजपूतलोग के ही बोलबाला रहे ।ओही समय में माहाराजकुमार बाबू कुवर सिंह अंग्रेजन के बिरोध में बिप्लव कईले जावना के परिणाम अंग्रेजन लोग भोजपुर राज्य के तबाह कर देहलख लोग ।आज भी भोजपुरी इतिहास में बाबु कुँवर सिंह के भोजपुरिया बीर मानल जाला ।भोजपुर के प्राचीन राज्य के नाम पर ही एह क्षेत्र के नाम भोजपुर पड़ल औवुरी बाद में भोजपुर जिल्ला कह के नामकरण कईल गईल ।प्राचीन काल में भोजपुर राज्य के दक्षिण अउरी बर्तमान आरा जिल्ला के उतर दिशा के आधा भाग तक भोजपुर राज्य सिमित रहे ।सन १७८१ जेम्स रेनेल जे सर्बप्रथम बंगाल औरी बिहार के प्रमाणिक मानचित्र तैयार कईले रहलन उनकर एटलस किताब में आरा के उतर भाग के नाम रोतास (रोहतास) प्रान्त कह के पढ़ल जा सकता |

१८ वी सदी में भोजपुर एगो प्रान्त रहे ।धीरे धीरे भोजपुरी शब्द भोजपुर अउरी भोजपुर बासी खतिरा बिशेषण के रूप में बिकसित भईल जवन आज भोजपुरी बोली या भाषा के रूप में बिश्व स्तर पर जानल जाला ।जब भोजपुर के राजपूत लोग आपन बीरता अउरी सामरिक सक्ति के बिशेष परिचय देहलख लोग तब से भोजपुरी शब्द जानता औरी भाषा के वाचक बन के भोजपुरी के गौरव बाढावे लागल ।भोजपुरी एगो सजीव भाषा ह ।भले ही भोजपुरी क्षेत्र में प्रारम्भिक या माध्यमिक शिक्षा के माध्यम भाषा दोसर होखे त का ह बाकिर भोजपुरिया भाषी लोग में भोजपुरी प्रति के आगाध प्रेम देखे के मिलेला ।जाहवा अध्यापक औरी छात्र दुनु भोजपुरी भाषी होखे उहा अगर कौनो कठिन शब्द के ब्याख्या करे के पड़ेला त अध्यापक आपन छात्र के सहज तरीका से समझावे खतिरा आपन मातृभाषा भोजपुरी के ही प्रयोग करे लोग ।छात्र औरी छात्रा लोग कक्षा के बाहर या भीतर भोजपुरी में ही ब्यवहार करत देखाई देवे ला लोग |

भोजपुरी भाषा के प्रति भोजपुरियन लोग के एतना आगाध प्रेम रहते हुवे भी भोजपुरी भाषा के लिखित साहित्य के आभाव आखिर काहे बा ? यी बिचारणीय प्रश्न बा ।एकर एगो कारण यी भी बा की प्राचीन काल में मैथली भाषी ब्राहमण लोग संस्कृत के साथ साथै आपन मातृभाषा भाषा के साहित्यिक बिकास के आपना के बहुते रचना कईलख लोग जेकरा करते मैथली साहित्य के बिकास भईल बाकिर भोजपुरिया ब्राहमण लोग संस्कृत के अध्यन औरी अध्यापन पर बिशेष जोड़ देहलख लोग औवुरी आपन मातृभाषा के अपहेलना कईलख लोग जेकरा वजह से आज भोजपुरी साहित्य के एतना कमी बा जब की प्राचीन समय में अध्यान अध्यापन के केन्द्र “काशी” भोजपुरी क्षेत्र मे ही रहे औवुरी आज भी बा ।आज तक के जेतना भी भोजपुरी भाषा के साहित्यिक बिकास भईल बा एकर योगदान भोजपुरी के कबी कबीर दास चाहे भोजपुरिया क्षेत्र के अन्य कबी औरी सन्त लोग के ह जे लोग आपन मातृभाषा प्रति के आगाध प्रेम में डूबल रह गईल लोग औवुरी भोजपुरी भाषा के साहित्य खतिरा आपन आमुल्य भोजपुरी रचना छोड़ गईल लोग |

नेपाल के भोजपुरी भाषा के सन्दर्भ में अगर देखल जाव त नेपाल के उत्पति के पहिले से ई भाषा बोलल जाला, बाकिर लिखित रुप में राजा प्रताप मल्ल के पाला से भोजपुरी भाषा के प्रमाण मिलेला । राजा प्रताप मल्ल जेकर राज्यकाल (१६२४-१६७४ A.D.) तक रहल शुभयसेन के राजा बनावे खातिर दलषभ बनियाँ के लगे लिखल चिठ्ठी भोजपुरी में रहे। ओह चिठ्ठी प्रमुख लेख एह प्रकार से रहे –स्वस्ति सर्वोपमायोग्यगंगाजलनिर्मल– पवित्रपात्र दलषभवानिञाकेषु आशिषपूर्वकपत्रमिदम् आगे इहाकुशल राउरकुशलचाही जेहितेपरमआनन्दहोइ आगे जे राउरेसाहुतिकैलरहल से परमेश्वर आनिकरवैआभैलही जेहिभाति शुभयसेन राजाहोहि से कैलजाओ हमहु दुइजना दरवारभेजिला एहिकामकंह रौरेसंदेह जनि राषीञु रौरेअपनेमने मन्त्रणा अर्थविचारतजाओ परिनामकह जहाहम ताहाराउर जाहाराउर तहाहम एतना से सबअर्थ बुझलजाओ जौनेउपायते शुभयसेन राजाहोहि सेकैलजाओ हम राउरसाहुतिभितरअ औरसमाचार जे माधओषत्री कहही से प्रणाम, फागुनवदी ९, मोकाम श्रीमत्कान्तिपुरममहानगरे (मधुपर्क, वर्ष ३, अङ्क ४, पृ. २५–२६)। ई चिठ्ठी से का प्रमाणित होता कि प्रताप मल्ल के पाला में सरकारी कामकाज के भाषा भोजपुरी ही रहे काहेकि उपर के चिठ्ठी में राउर, हमर, हम, जहा, एतना, तथा प्रणाम जइसन ठेठ भोजपुरी शब्द के प्रयोग भइल बा ।

भोजपुरी भाषा के बिकास अउरी संरक्षण में गिरमिटिया मजदुर लोग के भी योगदान साराहनीय रहल बा ।भोजपुरी भाषा के बिकास में गिरमिटिया मजदुर लोग के जेतना योगदान बा ओतना भारत चाहे नेपाल के भोजपुरी भाषी लोग के योगदान नइखे देखल गईल ।भोजपुरी भाषा के बिकास में शुरुवे से गिरमिटिया लोग के अहम भूमिका रहल बा ।आज गिरमिटिया लोग के ही देन ह जे दुनिया के सभी माहाद्विपन पर भोजपुरी भाषा के झांडा फहरा रहल बा ।बड़ी दुःख के साथ कहे के पड़ता की भारत देश जाहा भोजपुरी भाषा सब से ज्यादा बोलल जाला अउरी भोजपुरी भाषा के जनम स्थल भी मानल गईल यी देश में ही भोजपुरी भाषा के अधिकारिक दर्जा प्राप्त नईखे ।यी सायद भारतीय भोजपुरी भाषी लोग के कमजोरी कहल जाव या आपन माई भाषा भोजपुरी के दुर्भाग्य बाकिर बाकी भोजपुरी बोलल जाए वाला देशन में भोजपुरी भाषा के भाषा के रूप में अधिकारिक दर्जा प्राप्त बा |

साभार:भोजपुरी जागरण

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1 टिप्पणी

  1. भोजपुरी भाषा की मिठास एकदम मिश्री जइसन लागेला…
    एकर शान के पूरा इंटरनेशनल में परचम..लहरेला
    भोजपुरी माट्टी के ताकत के गुन पूरा जहांन जानेला….
    ई धरती भगवान राम के भी मन भावेला……।।

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