मधेश के विकास विना देश विकास असम्भव

ज्योति तिवारी

ब लोग जानेला की मधेश जामाना से राज्य द्वारा पीछे पारल गइल बा । साथे- साथे, मधेश के जनता के राज्य सत्ता मे रहल कुछ व्यति लोग खून चुस के दमन, शोषण आ पिछे कइले बा, कहके बहुत जगह से आवाज उठ रहल बा । जवना के चलते मधेश के जनता आज भी ऊपर उठे ना सकल लोग । देश के आधा हिस्सा के लोग गरिबि, अशिक्षा आ वेरोजगार जइसन समस्या से आज भी जूझ रहल बा लोग । जेकरा चलते देश के विकास मे देरी हो रहल बा ।

नेपाल मे खाली मधेशी ही ना बल्कि अन्य समुदाय के जनता भी राज्य के गलत शिकार भइल बा लोग । ऊ सभी समुदाय के लोग के भलाई होखों आ देश मे सब समुदाय के विकास संगे राज्य के विकास होखों कहके ई लेख केन्द्रित बाटे । खास कर के मधेशी के साथे जनजाति, दलित, मुस्लिम लगायत के समुदाय दिन-प्रतिदिन निच्चे होते जा रहल बा लोग । ई सब समुदाय के विना ऊपर उठवले देश विकास ना होखे सकी । ई बात पर सरकार थोर बहुत प्रयास भी कर रहल बा, बाक़िर ऊ प्रयाप्त नइखे ।

पिछड़ल लोग के हात मिला के उठावे के जरूरी बा, संगे बैठा के खानपिन कइल जरूरी बा, कथित बड्का जात अपना घर मे बोला के खियावल जरूरी बा । जनावर जइसन व्यवहार कइल बंद करे के जरूरी बा, राज्य से विशेष रणनीति अख़्तियार कर के ऊ समुदाय के अवसर देवे के जरूरी बा । तब मधेश के डोम, दुसाध, चमार, मुसहर, मुस्लिम चाहे पहाड़ के दलित लगायत के जनता से इन्साफ होई ना त मुसकिल बा आगे के यात्रा । मधेस के विकास बिना देश के विकास असम्भव बा ।

सबसे पहिले समाज मे से समाजिक भेदभाव आ छुवाछुत के जड़ से उखाड़ के फेके के पड़ी, शिक्षा के मूल धार मे ई लोग के लियावे के पड़ी, प्रयाप्त रोजगारी के व्यवस्था राज्य द्वारा करेके पड़ी, तबे सम्भव बा देश के समग्र विकास ।

सामाजिक भेदभाव आ छुवाछुत के बात कइल जाई त मधेश ही ना नेपाल के बहुत अइसन समुदाय बा जेकरा सगे अपने आप के कथित बड़का जात कहेवाला समुदाय आज भी जानवर से भी निच व्यवहार कर रहल बा । एकरा विरुद्ध मे कानून त बा, बाक़िर कानून कागज मे सिमित बा । दोषी के कड़ा कारवाही ना होला । पुलिस ओरहन ना पडल कहके भेदभाव आ छुवाछूत करेवाला व्यक्ति के खुदे संरक्षण करेला ।

अभिन एगो समाजिक सञ्जाल पर क्षमा दान वाला अभियान बहुत चर्चा मे रहल देखल जा रहल बा । बाक़िर ऊ अभियान भी कुछ समय खातिर मात्रे बा । बल्कि एकरा से अच्छा त पिछड़ल समुदाय लोग के घर-घर मे जाके सामुहीक माफी मागेवाला काम होइत आ मधेस के हरेक समाजिक काम मे ऊ लोग के सहभागी करावे के पड़ी कह के समाजिक उर्दी जारी होइत । खाली दलित समुदाय के घर मे एक दिन भोजन ग्रहण कइला से थोड़े सब उपरका जात सचेत होई आ बाड्का बनल छोड़ दी लोग? बाड्का छोटका के बात त मन से मिटावे के नु पड़ी । ई बात पर सोचल जरूरी बा । हम ई नइखी क़हत की ई अभियान एकदमे गलत बा, एसे अच्छा प्रचार भी हो रहल बा भेदभाव मिटावे खातिर, बाक़िर प्रभावकारी आ लमहर समय खातिर ना होई ई फॉर्मूला हमार जिकिर बा ।

अन्त मे इहे कहे के चाहतानी की, पिछड़ल लोग के हात मिला के उठावे के जरूरी बा, संगे बैठा के खानपिन कइल जरूरी बा, कथित बड्का जात अपना घर मे बोला के खियावल जरूरी बा, जानवर जइसन व्यवहार कइल बंद करे के जरूरी बा, राज्य से विशेष रणनीति अख़्तियार करके ऊ समुदाय के अवसर देवे के जरूरी बा । तब मधेश के डोम, दुसाध, चमार, मुसहर, मुस्लिम चाहे पहाड़ के दलित लगायत के जनता से इन्साफ होई ना त मुसकिल बा आगे के यात्रा । मधेस के विकास बिना देश के विकास असम्भव बा । अपना जगह से सब केहु लागि, ई समाजिक विकृति आ विभेद के जड़ से उखाड़ फेकी, तबे देश समृद्ध होई ।

लेखक – वीरगंज के रहनियार ज्योति तिवारी एक सामाजिक अभियन्ता तथा पत्रकार हई । TRN International News के समाचार सम्पादक भी रह चुकल इहाँ के हाल मे ब्लु क्रोस तथा ब्लु क्रेसेंट नामक संस्था से आबद्ध बानी । वर्तमान मे इहाँ त्रिवी किर्तीपुर, काठमाडौ मे रह रहल  बानी ।

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