मधेश मे बेटी के अधिकार अउर दहेज के सवाल

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हेज के बारे पछिलका समय मे बहुती चर्चा परिचर्चा हो रहल भेटाला । मधेशी समुदाय भीतर खास कर के उच्च जात काहाइल कायस्थ, ब्रह्मण अउरी भूमियार मे ई समस्या बिकराल रूप ले लेहले बा कहल जाला । बाक़िर ई समस्या सउसे मधेश के हवे से बात नइखे । कुछ एनजीओ आईएनजीओ सब दहेज के मधेश के बिक्रान्त समस्या कहला पर भी ई ओकरा सब के मांग के खाये वाला भाड़ा ही होई ओ से बेसी कुछो ना ।

ओइसे त कानुनी रुपमे दहेज स्त्री धन अन्तर्गत परेला । दहेज अउरी पेवा के सम्बन्ध मे स्त्री अंश धन के महल के 4 अउरी 5 नं. अनुसार महिला लोग अपन दहेज पेवा अपना खुसी मुताबिक करेके मिलेला । महिला लोग के मरला के बाद निज “ई खइहे” कहके लिखित प्रमाण रहल बा त वोकरे बमोजिम होइ औरी ऊ लिखित प्रमाण ना रहला पर ओकरा संगे रहल बेटा ना त पति न त बेटी, भा कही उहो ना भइल त नाति-नतनी पोता-पोती ना त हकवाला के ही मिल सकेला ।

ई त भइल कानूनी बात लेकिन व्यवहारिक बात के ख्याल कइल जाव तेपरो दहेज एक प्रकार से महिला के अधिकार हवे । ई बात के ई उदाहरण से भी प्रष्ट करल जा सकत बा की ‘समान्यत कवनो घर मे यदि दुगो बेटा अउरी एगो बेटी बा त ओकर पैत्रिक सम्पति मे बेटी के अंस के बात कनहु ना देखल जाला । ऊ बेटी कतनो सुन्दर शुसिल अनुसासित काहे ना होखों बाक़िर पैतृक संपति मे ओकरो अधिकार बाटे ई बात के इयाद वोकर परिवार चाहे वोकर समाज के ना रहेला । अगर रहेला त ई दुर्लभ बात बा ।

ई सब से भी दहेज एक प्रकार से बेटि के जन्मजात अधिकार हि हवे से हो कहल जा सकत बा । रहल गरिबी के बात त उहवा दहेज एगो अभिशाप जैसन बा । बेटी विवाह करे बेरि दहेज के बिरोध त होला बाक़िर बेटा के विवाह करे बेरी दहेज के बिरोध मे अग्रसर होवेवाला कुछ सिमित परिवार मात्र बा जेकरा कारण ई दहेज अभिन ले अभिश्राप बन रहल बा ।

विवाह के बाद पूर्ण स्वामित्व भइल सम्पति के बारे मे बेटि के पति के घरपरिवार द्वारा अनेक आलोचना कइला पर  अउरी मांग होला आ ना दिइला पर पुतोह के मारपीट, गाली गलौज करके घर से निकाल देवेके, छूटापतर (सम्बन्ध बिच्छेद) करा देवेके जइसन व्यवहार सब भी दहेजे के उपज हवे कहत केतना समाचार सब समय समय पर अवत रहेला ।

लेकिन ऊ महिला ऊपर हिंसा दहेजे के कारण भइल बा त ओकर बारे मे भी अध्ययन कइल अति आवश्यक बा ।  विवाह पश्चात कोवनो भी बेटी अपना पति के घर मे जाली आदि हमनी सब बहुत कम्युनिस्ट बात करेनी बाक़िर वोसे से कुछ ना होखेवाला बा । हमनी के समाज मे कवनो भी पुतोह विवाह भइला के विहाने बेरि यदि उ छूटापतर करत बाड़ी त ऊ अपना पति के अधिकार से आधा अधिकार पा सकेली अउरी अइसन मान्यता के कानून मे भी स्थापित कइल गइल बा ।

बाक़िर का ऊ बेटी अपना बाबु अउरी भैया संगे अधिकार मांग ले रहित त, ई भी एगो सोचेवाला प्रश्न बा । पछिलका समय त अउरीयो दोसर कारण से होखे वाला घरेलू हिंसा के भी दहेज संगे ज़ोर के महिला हिंसा भइल कहके दावी भी होखे लागल बा । एकर मुख्य कारण ह, ग्रासरूट मे पहुच के रिपोर्टिङ्ग, अध्ययन-अनुसन्धान ना होनाई । काहे लाए की पछिलका समय ल्यपटप केन्द्रित रिपोर्ट अउरी फोन केन्द्रित शहरिया अध्ययन हि आजकुली बजार के गरमयले बा । बहूति केस मे त सतही प्रमाण के आधारे पर लोग हालिसे मन बना लेला की दहेज ही ई सब के पीछे एक मात्र कारण बा जवना से अइसन देखाई देला की सचमे ई एक बिकराल समस्या बा । आ एकर दाग समूचे समाज के बदनामी सहेके परेला ।

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