मधेश ख़ातिर अन्तिम विकल्प कहिया ????? (विचार)

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जे. पि. साह

धेश के भूमि लगभग २०२ साल से सुगौली संधि के तहत नेपाल में बा। इहवाँ के जनता २०२ साल से यातना, धिक्कार, ग़रीबी अउरी ग़ुलामी के जिनगी जिए पर मजबूर बा। अईसन बात ना बा कीं मधेशी जनता ई ग़ुलामी के कहियो प्रतिकार हीं ना कईलक।

नेपाल के इतिहास में जेतना भी बड़का आंदोलन भईल बा सब मधेश के पावन भूमि से हीं भईल बा। इहा तक कीं मधेश आंदोलन विश्व रेकर्ड भी बनावलक। अब सवाल ई मन में आइ कीं एतना बड़का संघर्ष अउरी बलिदानी देहला के बावजूद भी मधेश के माँग पूरा काहे ना भईल? कमज़ोरी कहाँ रहें?

एकर दूगो कारण बा –

१. मधेश के समस्या किटान अउरी नेतृत्व में कमी:-

सब के मालूम बा अगर रोग कैन्सर बा त सर्दी खोकि के दवाई खईला से कहियो ठीक ना होई। ठीक ओइसे हीं मधेश के समस्या हीं नेपाली उपनिवेश के ह अउरी उपनिवेश के दवाई आज़ादी होला । माकिर अफ़सोस कीं मधेश के ठेकेदार नेता कहियो ना समस्या बुझल, ना ही असली इलाज के कोशिस कईलक । उपनिवेश के उदाहरण देवे ख़ातिर बड़का बड़का किताब अध्यन के ज़रूरी ना ह, बस मधेश के कवनों सरकारी कार्यालय में चल जाई आ देखीं केतना प्रतिशत मधेशी बा अउरी केतना पहाड़ी, सेना में केतना मधेशी बा ? न्यायाधीश केतना मधेशी बा ? राजदूत, सी॰डी॰ओ॰ भा डिसिज़न मेकिंग सेक्टर में केतना मधेशी बा ?

ओकरा बाद बात करल जाओ नेतृत्व प ।

पिछला २०-२५ साल में मधेश आंदोलन के नेतृत्व जवन भी पार्टी भा व्यक्ति लेलक सब के सब ख़ून बेचूवॉ निकलल। शाहिद के लाश के व्यापारी निकलल। एकर सबसे बड़का उदाहरण ई बा कीं जवन नेता के नून रोटी ना ज़ुरे, साइकल चढ़ें के औक़ात ना रहें आज करोड़ों के घर अउरी बंगला में चढ़त बा। कहाँ से आइल एतना पैसा जब कीं लाखों मधेशि बर्बाद भइल, ई नेता एतना पैसा वाला कईसे भेईल ? ई बात साफ़ साफ़ कहत बा कीं मधेश के नेतृत्व कहियो ईमानदार ना रहल।

२. उपनिवेशिक अउरी नस्लीय सत्ता प्रणाली:-

सत्ताधारी के रवैया शुरू से हीं मधेश के ख़ातिर नस्लीय रहल बा। इतिहाश के हीं सबसे क्रूर अउरी धोखाबाज़ रहल बा नेपाली सत्ता। मिलल अधिकार भी निगल जाएवाला ई सत्ता से अधिकार के भीख मांगल मूर्खता ह। एकर जीयत जागत सबूत बा नेपाल के अंतरिम संविधान अउरी अभिन के तत्कालीन संविधान में मधेशी के देवल अधिकार क्षेत्र। जवन देश के संविधान हीं १० साल से जादा ना टिकेला ओमे अपने के अधिकार कईसे टिकीं ? ओमे अपने के अपन भाषा, संस्कार अउरी राष्ट्रीयता(मधेशि राष्ट्रीयता) कईसे सुरक्षित रहि ? अब विचार करेवाला बात ई बा कीं अईसन परिस्थिति में अंतिम विकल्प काथी होई????

अपने बहुत बेर बहुत नेता लोग से सुनले होखेम कीं “अब अन्तिम विकल्प मधेश आज़ादी ह कहके”, “प्रदेश ना दी त अपन देश लियाई”, “संसोधन ना होई ता अलग मधेश के माँग उठीं” अब ना ता प्रदेश मिलल, ना स्वायत्तता, ना भाषिक अधिकार ना हीं सेना में सहभागिता त ई नेता के लोग काहे नईखे “आज़ाद मधेश” ख़ातिर आवाज़ उठावत???

एकर मतलब साफ़ बा की ई लोग कुर्सी के बार्गनिंग करे ख़ातिर ई बात कहले रहें। पूरा मधेशी जनता के पता बा कीं मधेश के आज़ादी के मुद्दा पर सिर्फ़ डॉ. सी के राउत टिकल बड़ान अउरी अपन सारा सुख शांति के त्याग कर चूकल बड़ान। मधेश के इतिहाश अनुसंधान करके मधेशि जनता के अवगत करावे वाला पहिला वैज्ञानिक बाड़न । जे “वीर मधेशी” जईसन किताब लिखके मधेशी अपन पूर्वज से परिचित करावलन। मधेश के मुद्दा विश्व मंच प स्थापित करवलन अउरी मधेश के राजनीति के अंतर्रष्ट्रिकरण कईलन। मधेश आज़ादी के मुद्दा आज मधेश के बच्चा बच्चा में फ़इल रहल बा।

फिर भी कुछः मधेश बुद्धिजीवी के कहनाम बा कीं “आज़ादी अंतिम विकल्प ह” आज़ादी के अंतिम विकल्प कहेवालन समस्त बुद्धिजीवी से हमार एक सवाल बा “अपने कईसे निर्धारित करेम कीं अब अंतिम विकल्प के समय आ गईल ?
•का जब पूरा मधेश मरुभूमि बन जाईं तब,या फिर मधेश से सारा मधेशी विस्थापित होजाई तब????
•मधेश के वन जंगल तबाह होजाई तब या पूरा मधेशी में नेपाली सेना के क़ब्ज़ा होजाईं तब???
•मधेश के युवा शक्ति विदेश चल जाईं तब या नशा के आदत से युवा पुस्ता बर्बाद होजाईं तब???
•अधिकार के शांतिपूर्ण आंदोलन में नेपाली पुलिस सीना अउरी सर पर गोली मारी तब ???
•मधेश रोहींगिया होजाई तब या मधेशि के चमड़ा नेपाली पुलिस उधेर दीं तब????

नेता जीं अउरी बुद्धिजीवी लोग बता देओ कब आइ अपने के उ अंतिम विकल्प ? फेर दोबेरा कवनों महान वैज्ञानिक ना आइ मधेशी के आज़ादी ख़ातिर लड़े वाला, मधेशी के पुस्ता पुस्ता के स्वतंत्रता दिलावे वाला, मधेशि ख़ातिर जेल जाए वाला फेर दोबेरा कवनों सीके राउत ना आइ। ओहिसे अब कर्तव्य से भगला से ना होई, हमनी के आज़ादी ख़ातिर दोसर ग्रह से आदमी ना आइ लड़े ख़ातिर।

लेखक साह पेशा से इंजीनियर हई आ सामाजिक कार्य में संलग्न बानी ।
डिस्क्लइमर- ई लेख के विचार बिलकुल लेखक के निजी विचार हवे । लेखक के विचार से आपन वीरगंज के कवनों सरोकार नईखे ।
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