मनके कइसे मनाई ? जहाँ मधेशी-पहाड़ी के टिस अब ले बढले बा (घटना विस्तार )

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सुबास कुमार बैठा

मनी बोडर पर रहेवाला लोग ए देश के बिना बर्दी के सिपाही हई । अगर केहु के देशभक्ति का होला सिखेके चाहे-जाने के बा त हमनी से सिख सकता । देशभक्ति का ह ?

ई बात हमनी बच्चपने से बिना कवनो स्कुली शिक्षा के ही सिख जानी आ ओपर तटस्थ रहेनी । दोसर बात ईतिहास गवाह बा आ सबके मालुम भी बा कि ए देशपर जब भी कवनों संकट परल बा तब ईहे लोग आ जमिन साथ दे के देश के बचवले बा । बिना ए जमिन के आ लोग के देश में कवनो भी परिवर्तन नईखे भईल । देश के हक़ मेंं ग़द्दारी साबित होएवाला कवनो भी काम चाहे सम्झौता ईहाँ के जनता यानी मधेसी नईखे कईले । चाहे उ बिदेशी सबके नागरिकता देवे के बात होखो चाहे देश के कवनो नदी नाला, सिमना के सम्झौता होखो । साथे सबका मालुमें बा कि ईहे जगह चाहे ईहे आदमी देश के पालनहार यानी अन्नदाता ह ।

ईहे जगह ह जहाँ दुनिया मेंं नेपाल के चिन्हावेवाला गौतम बुद्ध, राजा जनक, माता सिता, राजा विराट जईसन विश्व प्रसिद्ध विभूति सब के जन्म भईल रहे । ई सब लोग का मालूम ना होइ की गोरखा राज्य विस्तार से पहिले एही मधेश मेंं सिम्रौनगढ़ जईसन सशक्त आ समृद्ध राज्य रहे जहाँ ज्योतिरिश्वर ठाकुर जईसन विद्वान ७०० सय वर्ष पहिले समृद्ध साहित्य श्रृजना कईलन । बाद मेंं ओहिजाने विद्यापति भी साहित्य श्रृजना कईलन । संसार के सबसे पहिलका मानव रामा पिथेकस के अवशेष जेकर उमेंर १ करोड़ १० लाख वर्ष वैज्ञानिक लोग बतावेला ऊ भी मधेश से ही मिलल बा । कथित नेपाल से बहुत पुरान आ समृद्धशाली आ गौरवपूर्ण ईतिहास एही मधेश के रहल बा ।

एनता सब चीज़ होते हुए हमनी के पहचान चाहे राष्ट्रीयता पर हरदम काहे प्रश्न चिन्ह उठावल जाले । हमनी के रंग, चेहरा देखते भारतीय, धोती, मरशिया, भईया आदि जईसन अपमानित शब्द से सम्बोधित कके घृणा काहे करले लोग । ए लोगके नाबालक बाच्चा हमनी मधेश के लोग के देखते भईया, धोती कहेके कईसे सिख लेवेला । उ बाच्चा सबके ई सब सिखावेवाला के बा ? जब कि पहाड़ी समुदाय के लोग त मधेश मेंं बहुत रहेला । हमनी त अईसन शब्द सबसे अपमानित त ना करिले ।

एक त ए देशके नाम केतना बेईमानी से कईसे के रखलक उ सबका पता बा । फिर भी हमरा जईसन मधेश में रहेवाला कवनो लोगके मन में कबो ई ना आईल होइ कि हमनी नेपाली ना हई । अगर हमनी के अपन परिचय करावे के क्रम में केहु भारतिय कहके सम्बोधित करदेला त मन दुखित के साथे प्रतिकार मेंं लगलिए हम राजा जनक, गौतम बुद्ध के खलदान पुरा नेपाली हई जईसन जबाब निकले लागेला। हमारा जईसन बहुत लोग होइ जेकरा साथे पहाड़ी मधेसी वाला घटना बहुत बेर घटल होइ, छोटमोट त उ अईसही भुला देले होइ लेकिन कुछ अईसन घाटना जवन ओके झकझोर के राख देले होइ । उ अपन पहचान के उपर सोचे पर मजबूर होगईल होइ । अईसही हमारा साथे घटल घाटना त काठमांडू के त्रिचन्द्र कॉलेज जाएके रास्ता से लेके कुपन्डोल तरकारी बजार आ ढुगें धारा परके अपमानित शब्द सुनला के झागडा त बहुते बा लेकिन कुछ घाटना अईसन बा जे हमारा के सोचे पर मजबूर करदेले बा आ अपने आप से अपना पहचान पर हरदम प्रश्न पुछत रहेला ?

नेपाल में त बहुते घटना बा जे सबलोगके सोचे पर मजबूर करदेला । चाहे उ रितिक रौशन काण्ड होखो चाहे मधेश आन्दोलन के बेर प्रशासन द्वारा कईल गईल मधेशी के नरसंघार होखो । आजो दिल दहल जाला आ मन मेंं तूफ़ान आ जाला जब मधेश आन्दोलन के बेर के भिंडियों सब देखल जाला । कि कईसे उहे प्रशासन पहाड़ के आन्दोलन मेंं पानी के फुहारा, लाठी चार्ज कके आन्दोलन नियन्त्रण करे आ उहे मधेश के आन्दोलन मेंं ४ साल के बाच्चा के भा ७० साल बुढ़ के कईसे खहेद खहेद के छाती मेंं, कपार मेंं गोली मार के मुँह में पेशाब भी करेला ।

हम ईहाँ एकादगो घाटना के ज़रीए कुछ बतावे के कोशिश करतानी । जवन हमारा ज़मीर आ पहचान के पहाड़ी समुदाय के लोग के तरे धजिया उडावेला । आ के तरे घृणा कके गारी देत व्यवहार करेला । हालाकि पहाड़ी समुदाय के कुछ लोग बा जे हमेंं बड़ा ईज़्ज़त के साथे अभि तक भि बावु कहेला लोग । आ बड़ा ईज़्ज़त भी करेला लोग । लेकिन फिर भी …??

हम अभिए कुछ दिन पहिले बहुत दिनका बाद नेपाल गईल रहनी हं । मन मेंं अनेक किसिम के ख़्याल आवत रहे कि लोग अब बहुत बदल गईल होइ । अब लगभग नेपाल मेंं सब लोग मेंं राजनीतिक आ समाजिक चेतना होगईल होइ । पहाड़ी मधेसी के नफ़रत अब भाईचारा मेंं बदल गईल होइ । अब पहाड़ी लोग मधेसी के ओतना नफ़रत के नज़र से ना देखत होइ । अब मदिसे, धोती, भईया जईसन शब्द से अपमानित ना करत होइ । काहे कि नेपाल मेंं बहुत बड़ा परिवर्तन भईल बा । सब लोग अब चेतनशिल होगईल बा । लेकिन ऊ हमर भ्रम रहे । हमारा सोच के ऊ पुरा विपरीत रहे । हमारा सोच जईसन कुछ ना रहे उहवाँ । पहिले से जादा पहाड़ी लोग के मधेसी से नफ़रत रहे । काहे कि हमारा साथे एगो घाटना घटल ओके हम सोचते रहगईनी आ अभितक सोचते बानी ।

हमारा जे दिन अमेंरिका आवेके रहे ओही दिन ११ बजे संयोग वस पशुपतिनाथ के मन्दिर मेंं जाए  के सौभाग्य मिल गईल । जहाँ हम कुछ लोग के भेंट करे ख़ातिर भी बोला देले रहनी । बड़ा हौसल्ला आ उत्साह के साथे पुरा मन्दिर घुमाई भईल । तनिसा थकान भईला पर हमनी मन्दिर के पिछे बईठके कुछ बात करत ईन्तज़ार करे लगनी, काहे कि कुछ साथी लोग उहाँ भेंट करे आवेवाला रहे लोग । एही बिच मेंं हमर मोबाईल एगो साथी लेके चलावे लागल आ सब फ़ोटो सब देखके हमारा पर व्यगँ करे लागल । ओतने मेंं एगो औरत आईल आ ओ साथी से मोबाईल छिन्न लेहलक त हम नेपाली मेंं पुछनी ओकरा से कि काहे छिन्तारू । हमनी के गल्ती का बा ? त उ टुटल फुटल हिन्दी मेंं अपशब्द भाषा मेंं कहली कि तोहनी के जाते (मधेशी) अईसन होला तोहनी जान जान के अन्जान बनेलिस । तोहनी फ़ोटो खिचत बाड़े मन्दिर के उपर के गजूरके ।

त हम कहनी कि ना हमनी फ़ोटो नईखी खिचत, हमनी के मालुम बा, हमनी ईहे रहेनी । तोहरा विश्वास ना बा त पुरा मोबाईल देख ले। अगर फ़ोटो होइ त जवन दण्ड देवेके उ दिहे। एतने मेंं मोबाईल लेजाके एगो डिप्टी मेंं रहल असई के दे दिहली । हमनी गईनी ओ असई के लगे आ कुछ शब्द बड़ा नम्र भाषा नेपाली मेंं बोलत कहेके कोशिश ही कईनी कि सर हमनी फ़ोटो ना खिचत रहनी, रउवा देख ली मोबाईल अगर होइ त जवन दण्ड देवेके होइ उ देहम । हमनी जवन काम नईखी कईले चाहे ना करत रनि ओकर सजाए काहे देतानी ?

हमर बात शुरू करते बानी तब तक उ महासय हमनी के टुटलफुटल हिन्दी मेंं गारी देत कहलन कि तोहनी के मोबाईल ना मिली । बिहान मिली । जो जाहा जाए के बा । जेकरा से पावर लगावे के बा, लगा ले। आ धकेल के उहाँ से हमनी के हटा देलन । हमनी सोचनी सब कि रूक जा तानी तनि बाद मेंं उनकर गुसा ख़त्म होइ त दे दिहन । रूक के १ घान्टा बाद फेन हमनी गईनी उन्का लगे । हमनी कुछ बोली ओकरा पहिले उ हिन्दीमें “ किस मन्त्री का नम्बर चाहिए, कौन सचिव, कौन नेता का नम्बर चाहिए कहत पुरा मधेशी नेता, मन्त्री, सचिव के नाम कहत किस से पावर लगवाना है, किसका धाक देखाता है साथे एतना ख़राब शब्द सब प्रयोग करत गारी देके हमनी के धकेले लगलन कि हमनी के बुझाईल कि अब हमनी के मरिहन । ए लगे से हटल उचित बा आ हट गईनी ओहिजासे हमनी ।

बाद मेंं हमर साथी जे साथ मेंं रहलन उ कहे लगलन कि ई अत्यन्त होगईल। चलल जाव पहिले एकरा ऑफ़िस मेंं कहल जाव आ पुलिस हेडक्वार मेंं भी तब एकरा पर मुद्दा कईल जाईं काहे कि अईसन हमहु ना भोगले रलि ह जवन जान्ता के रक्षक बा उहे ए तरे के व्यवहार करी त केन्ती होइ उ भी बिना बात सुन्ले, बिना गल्ती के । उ मोबाईल खोलके देख सकता नु ?

त कहनी ओ साथी के भाई सब छोडअ हमारा एयरपोर्ट ५ बजे हर हालत मेंं पुगे के बा २ बज गईल अभि डेरा मेंं जाके नहा, खाएके भि बा । कोशिश करअ कि मोबाईल लेके चलल जाव । मोबाईल भी महंगा बा ओ मेंं बहुत कुछ अपन बा । देखते बाडअ कि केन्ती लगातार फ़ोन घन्टी बाजत बाजत मोबाईल बन्द होगईल । आ बाहर साथी लोग भि खोजत होइ जेके बोलवले बानी ।

ईहे बात करत रहनी तबतक एक जने हमनी के लगे आके मैथिली बोलत हमनी के समस्या सुन्लन । हालाँकि उ अपन परिचय त ना खोललन लेकिन देखे में पुलिसवाला ही लगलन आ कहलन कि हम कुछ करतानी आ कुछ देर मेंं एगो दोसर सिपाही हमनी के मोबाईल लेयाके दे देलन ।

ईहे ना नेपाल रहे के दौरान मेंं हम का देखनी कि मधेशी लोग केतनो नेपाली मेंं बोली लेकिन काठमाण्डू के एगो होटल मेंं काम करेवाला भी अक्सर जवाब हिन्दीए मेंं आ तनिसा भी कुछ भईल त शुरो कर दी धोती, मरशिया आदि कहल ।

हमारा ई ना समझ आईल कि उ असई चाहे औरत हमनी के साथे काहे अईसन व्यवहार कईलक । हमर एगो वाक्य सुन्ले बिना काहे मधेशी कहके गारी देवे लागल । जबकि हम आ हमर साथी दुनु कोई नेपाली में बात करत रही । आ हमनी बहुत निमन नेपाली बोलेनी आ लिखेनी सब ।

समग्र मेंं देखला पर हमनी मधेशीका साथे राज्य ओहीलेखा व्यवहार करेला, प्रशासन ओहीलेखा, शासक ओहीलेखा, न्यायालय ओहीलेखा आ जन्ता ओहीलेखा त हमनी का करी ? अपन मनके के तरे मनाई ?

लेखक – सुभाष कुमार बैठा
पचरौता न. पा. (बेल्दारी), बारा
हाल –  पेनसल्भानिया, अमेंरिका

प्रकाशित मिति – सावन ९, २०७६

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