मुर्ती बनावेवाला माटी के कमी भइला से सरस्वती माता के मूर्ति बनावे मे समस्या

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वीरगंज २५ माघ,

नियरात गइल सरस्वती पूजा के खातिर मूर्ति बनावे खातिर माटी के कमी भइला से पर्सा के पोखरिया नगरपालिका–९ के कालिगड शिवचन्द्र महतो ई बेर सोंचल जइसन व्यापार ना भइला से चिन्ता बढल बा । वितल चार बरीस से मूर्ति बना के गुजारा चलावत आइल महतो मांग बहुते भइला पर भी मूर्ति बनावेवाला माटी के कमी के चलते ई पालि सोचल जइसन बहुती मूर्ति बनावे ना सकल बतवनी ।

“मुर्ती बनावेवाला माटी के समस्या से मांग मुताविक के सरस्वती के मूर्ति बनावे नइखी सकल”, कहत महतो “एक त माटी ना मिलेला आ दोसर ओरी माटी मिलला पर भी जमिन धनी एक ट्र्याक्टर के रु ३०० के दर से पइसा लेहला से ई पालि कम मूर्ति बनवले बानी ।”

“वितल बरीस ई समय मे मूर्ति बना के लाखो रोपेया कमइले रहनी माकिर ई पालि गहुँ के ‘सिजन’ भइला से माटी आ सोंचल जइसन माटी ना मिलला से अइसन अवस्था आइल बा”, परवानीपुर मे मूर्ति बना रहल शिवलखन महतो के सिकाइत बा ।

अभी जिल्ला के अनेकन जगह रोड के बगल मे, दलान, घर आँगन मे मूर्ति बनावेवाला कालिगड के सङ्ख्या बढत गइला के बाद ई व्यवसाय से सोंचल जइसन आर्थिक फायदा लेवे ना सकल जानकी टोला मे मूर्ति बना रहल रमेश पण्डित बतवनी ।

वसन्तपञ्चमी आरहल समय सामुदायिक तथा निजी बोर्डिङ स्कूल के सङ्ख्या थपइला पर भी मूर्ति बनावेवाला कालिड भी बढाल से ई व्यवसाय से पहिले जइसन कमाई होखे नइखे सकत । पुराना पुस्ता के भावना आ कला के संयोजन मार्फत काँच माटी आ पुवरा मिला के ईश्वर के आकृति देके व्यवसाय करत अइला मे युवापुस्ता वैदेशिक रोजगार मे जाएवाला होडबाजी से अभी ई व्यवसाय भी प्रभावित होरहल बा । अभी के युवा माटी आ पुवरा छुवेमे घिन मानेवाला भइला से भी ई व्यवसाय उपर युवापुस्ता के आकर्षण घटे लागल बा ।

श्रीमद्भगवत्गीता मुताविक भगवान श्रीकृष्ण के जिभ के अगाडि माता सरस्वती के उत्पत्ति भइल रहे । सरस्वती के उजर वर्ण जोतिर्मय ब्रह्मा के प्रतीक मानल गइला से सरस्वती बिना ई जगत् मे केहु विद्या प्राप्त करे ना सकिहन । शास्त्र मुताविक माता सरस्वती के कृपा से कालिदास, महर्षि वाल्मिकी आदि के कवि के उपाधि मिलल बा ।

इहे एतवार के श्रीपचञ्मी अर्थात् सरवस्ती पूजा करेवाला भइला से शनिचर तक सभी मूर्ति बिकाएवाला भइला पर भी वितल दु-तिन दिन एने मौसम के खराबी से घाम ना उगला से कालिगड के मूर्ति सुखावे मे समस्या भइल बा । प्रविधि से विकास करत गइला पर भी मूर्ति पूजा के आस्था मे कमी ना आइला पर भी ई व्यवसाय के भविष्य उज्ज्वल रहल कालिगड के कहनाम बा ।

हरेक बरीस विद्या के देवी सरस्वती के मूर्ति बनावेवाला अधिकांश कालिगड निरक्षर बाडन माकिर कैयन कालिगड मूर्ति बनावेवाला व्यवसाय से भइल आम्दानी से आपन बेटाबेटी के उज्ज्वल भविष्य के खातिर पढावेलन ।

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