मोदी के आड में मधेश ढुकत ओली

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वीरगंज, २३ बईशाख

मधेश विरोधी छवि रहल प्रधानमन्त्री आ नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली मधेशी बाहुल जिल्ला अर्थात् प्रदेश २ के राजधानी मे खुल्ला रुपमे जाए के तैयारी मे बाड़न ।

मधेश आ मधेशी उपर करत आरहल बयानबाजी के चलते ओली के ‘कोर मधेश’ मे ढुकेमे दिक्कत होत आवत बा । स्मरण रहे की जबरजस्ती मधेश मे ढुके के ओह लोग के चेष्टा से बिगत मे मधेश मे ५ जने के ज्यान समेत गईल रहे ।

बाक़िर, ई बेर अईसन कुछों नईखे होखेवाला, ई बेर ओली मधेश मे ढुकिहन त ओईसन कवनों दिक्कत के सामना ना करेके परी । काहे की ई बेर ऊ भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के स्वागत करेके बहाना मे प्रदेश २ के राजधानी जनकपुरधाम मे निर्वाध रूपसे प्रवेश कर जईहन ।

जन नेता बने खातिर बड़का बड़का भाषण कईला से मात्र ना होई, कईल वाचासब के भी पूरा करेके परेला एकर गम प्रधानमन्त्री ओली के भी राखे के चाहि । समृद्धि, विकास के नारा मात्र लगईला से ना होई, व्यावहारिक रुपमे भी करके देखावे के परेला ।

संविधान विश्व के उत्कृष्ट बनावे खातिर सब कोई के भावना के समेटे के परेला, उचित सम्बोधन करेके परेला । अभिन के संविधान के ९०% के कहल त गईल बाक़िर व्यवहार मे अइसन नईखे । संविधान भीतर येतना त्रुटिसब बाटे की ई ओली सरकार आपन पाँच वरिष के अवधि भी पूरा करेमे बहोत मुसकिल के सामना करेके परी ।

ओहिसे, भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आपन प्रधानमन्त्रीत्वकाल के पहिलका भ्रमण के क्रम मे कहले भी रहलन की संविधान ‘ऋषि मन से बनाई लोगिन’ के आत्मसात करत आगा बढ़ल ही उचित रही । संविधान के मतलब कवनों गीता, बाइबल भा कुरान ना हवे जे अपरिवर्तनीय होखस । इहेसे सब कोई के अपनत्व महसुस होखे जैसन संशोधन आवश्यक बा ।

ऊ जदी नेपाल के सभी नागरिक के भावना के कदर करत संविधान संशोधन करावे मे सफल हो जात बाड़े त नेपाल के कवनों गाँव, जिल्ला भा प्रदेश मे ढुके खातिर कवनों विदेशी पाहुना के सहारा लेवे के नवबते ना आई ।

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