रसदार, महक़दार, बरसल हास्य-व्यंग के फुहार, -रक्सौल में हास्य कवि सम्मेलन

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रक्सौल : प्रभात ख़बर दैनिक अख़बार के आयोजना मे हजारीमल विद्यालय में हास्य कवि सम्मेलन के दृश्य

रक्सौल, १२ चईत (२६ मार्च, २०१८)

“ सुना है इश्क़ में गधे भी सूखी घास खाते हैं, वो पागल लोग है जो प्यार में सल्फ़ास खाते हैं, मोहल्ले में हमारे एक आशिक़ है ७२ के, रज़ाई ओढ़कर बेदाम च्यवनप्राश खाते है….

प्रभात ख़बर दैनिक अख़बार के आयोजना में सोमवार के दिन रक्सौल के हजारीमल विद्यालय में एगो हास्य कवि सम्मेलन भईल । ई हास्य कवि सम्मेलन में भारत में हिंदी के चर्चित कवियन लोग अपन कविता के पाठ कईलख लोग ।

कवियन के समूह में चर्चित कवि एवं मंच संचालक शशिकांत यादव, राजेन्द्र आलसी, डॉ. रश्मि शाक्य, बादशाह प्रेमी, अभय निर्भीक एवं हेमंत पांडेय के उपस्थिति रहे। हिंदू धर्म के महान पर्व रामनवमी के ठीक एक दिन बाद भईल ई हास्य कवि सम्मेलन में दर्शकन-श्रोतन के टाल भीड़ रहे ।

कार्यक्रम के शुरुआत भारत के उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर से आईल कवियित्री डॉ. रश्मि शाक्य द्वारा माँ वीणभारती के प्रार्थना गीत से भईल । सुमधुर स्वरलहरी के आकर्षण में बँधल समस्त श्रोतगण समवेत स्वर में उनका साथ निभवलें। सबसे पहिला मंचीय प्रस्तुति उत्तर प्रदेश देवरिया ज़िला से आईल हास्य व्यंग्यकार बादशाह प्रेमी द्वारा भईल। “ सुना है इश्क़ में गधे भी सूखी घास खाते हैं, वो पागल लोग है जो प्यार में सल्फ़ास खाते हैं, मोहल्ले में हमारे एक आशिक़ है ७२ के, रज़ाई ओढ़कर बेदाम च्यवनप्राश खाते है….ई पंक्ति पर श्रोतागण पेट पकड़ हँसत रहे लोग ।

वीररस के कवि अभय निर्भीक के देशभक्ति वाला पंक्ति “जिस दिन आत्म-सुरक्षा में सेना बंदूक़ उठाएगी, काशमीर में पत्थरबाज़ी मिनटों में रुक जाएगी” से श्रोतागण में आक्रोश के भाव भरल । कानपुर से आईल हास्य कवि हेमंत पांडेय के चुटकुलन-कवितन प समूचा लोग हंसल ।

रक्सौल : हजारीमल बिधयालय मे हो रहल हास्यकवि सम्मेलन मे उपस्थित हजारो के संख्या मे दर्शक गण

मध्य-प्रदेश के इटारसी से आईल ६० वर्षीय वरिष्ठ हास्य कवि राजेन्द्र मालवीय ‘आलसी’ जी अपन चुटकुला के माध्यम से वर्तमान समय में मीडिया के भूमिका प तंज कसके आ मेल-फ़ीमेल के कॉमेडी से ज़बरदस्त ताली बटोरलन । “जाने क्या कह डाला तुमने सिर्फ़ इशारों में, तबसे दिल खोया-खोया है चाँद सितारों में….” प्यार-इंकार, दिल, चाँद-सितारा के के बात डॉ रश्मि के स्वर में जहाँ फ़िज़ाँ में गुंजन कि लोग के अपन होश सम्हारल मुश्किल हो गईल।

दर्शकन द्वारा ताली के ज़ोरदार गड़गड़ाहट से उनकर अभिनंदन भईल रहे । ई समूचा हास्य कवि सम्मेलन के आकर्षण कवि एवं संचालक शशिकांत यादव के अगल-बगल में सिमटल रहल । उनकर कविता के हर पंक्ति देश प्रेम के जज़्बा से ओत-प्रोत रहे । भारतीय राजनीति में पक्ष-विपक्ष के ऊपर उहाँ के समान रूप से कटाक्ष कईनीं । ग़ज़ब प्रतिभा के धनी, शब्दकोश के घूमत-फिरत भंडार, तंज, कटाक्ष, मान-दुलार में परिपक्व संचालक शशिकांत यादव के चुंबकत्व भरल उद्घोषण से लोग रात ११ बजे तक साहित्य आस्वादन के मज़बूर भईल ।

साहित्य के ई कार्यक्रम में प्रोफ़ेसर, शिक्षक, विद्यार्थी, पुलिस, नेता, पत्रकार, कवि के साथे-साथे रक्सौल के तमाम छोट-बड़ प्रतिष्ठित लोग के उपस्थिति रहे । नेपाल से भी सैकड़न हास्य-व्यंग के फुहार में तर होअत लउकल. लमहर समय तकले ईयाद रह जाए वाला प्रभात ख़बर के ई कवि सम्मेलन कार्यक्रम संझिया ७ बजे से शुरू होके रात के ११:१५ बजे तक चलल ।

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