वियाह अब दिन में काहे ना ?

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वियाह अब दिन में काहे ना ?

शिवनाथ साह

जिनगी एक अनवरत यात्रा हँ, जवना के हर इन्सान के पार करही के पड़ेला । केहु एकरा के खुशहाल तरिका से बितावेला त केहु जिनगी के एगो बोझ के रुपसे वितावेला । ई जीनगी के बुझाइँ आदमी के सोच अनुसार से निर्धारण होखेला ।

जीवन के ई यात्रा के पुर्णता देवे खातिर एगो जीवन साथी के जरुरी पडेला । जीवन साथी ऊ हँ जवन इन्सान के हर सुख दुःखमे साथ देवेला । ऊ जीवन साथी के निर्धारण हमनी के समाज मे बहुत तरिका से होखेला । जइसे केहु के प्रेम करके हाखेला, केहु के अदालत में होखेला त केहु के बावुमाई के पसन्द से होखेला । चाहे माध्यम जे भी होखे, जीवन साथी आदमी से एगो आधा अंग बनके रहेला ओही से सायद ऐकरा के अर्धांगिनी भी कहल जाला ।

हमनी के मधेसी समाज मे जीवन साथी बनावे के सबसे प्रचलित चलन बाटे “बावुमाई वाला वियाह” । जवना के छनौट हमनी के बावु माई के पसन्द से होला । कहल जाला कि बावु माई अपना बालबच्चा खातिर खराब ना सोचेले बाकिर इ मुदा मे हमनी के बावुमाई हमनी के जीवन साथी से ज्यादा आपन पारिवारिक स्तर, मानमर्यादा, इज्जत के प्रति ज्यादा अग्रसर देखाई देवेले । इज्जत, मानसम्मान, प्रतिष्ठा आदमी के एक महत्वपुर्ण पहलु बा । जवना के पावे खातिर आदमी आपन जीवन के अन्तिम क्षण तकले प्रयत्नशील रहेला । बाकिर आदमी अनुसार एकर परिभाषा जरुर अलग अलग होखेला ।

रात के कारण वियाह जइसन पवित्र पर्वमे दारु के सेवन, पैसा आ स्वास्थ्य के बर्बादी, झुठ आनसान देखावे के प्रवृति, अनावश्यक सहभागिता एवं खर्च तथा अनावश्यक विवाद आ बैवाहिक झमेला देखल गइल बा हमनी के समाज में । अगर यी विवाह दिनमे कइल जाए बाराती मे कमी, दारू सेवन, अनावश्यक झैझगड़ा से लेके खर्चा मे भी बहोत कमी आई । 

आजू ई इज्जत, मानसम्मान आ प्रतिष्ठा के झुठमुठ के प्रर्दशन करेके माध्यम बन गइल बा पुरातात्विक ढाँचा के इ वियाह । जवना के अभिनो हमनी के समाज मे रात मे कइल जाला । अनेकन किसिम से अनावश्यक सजावट से सजावल जाला । अनावश्यक रुप मे ब्यापक लोग के सहभागिता करावला जाला, जवना के कवनो भुमिका ना रहेला । शान्तिपुर्ण होखेवाला जीवन साथी के छनौट मे अनावश्यक होहल्ला, कोलाहल मचावल जाला ।

आजकल हरेक विआह मे लडका वाला पक्ष अपना के सर्वश्रेष्ठ देखावे खातिर कवनोे कसर ना बाँकी राखेला । ओकर साथ साथ लडका पक्ष से आइल बेकामिल बराती लोग के भुमिका भी कुछ ओही तरे देखाई देवेला । विना बात पर बात बढ़ाके दबंगई देखावत रहेला । दुअरा पर आइल बराती के समय से लेके लडकी के विदाई के समय तक लडका पक्षवाला के समूचा बराती औरी लडका पक्ष के यातनापुर्ण ब्यवहार लडकीवाला के भोगे के पडेला । आजकल त सवसे बडका कुरिति के रुपमे देखल गइल प्रथा बा शराब चाहे दारु के सेवन । रात के समय अन्हार भइला के चलते लगभग हरेक बाराती मे सहभागी होखेवाला लोग दारु के सेवन करके अनावश्यक लफडा खडा कर देवेला । लगभग ९० प्रतिशत वियाह मे ऐही कारण से झगडा होखेला । अइसन झगडा के कारण बहुत गाव मे बहुत आदमी लोग घायल होला त कुछ गाव मे कुछ लोग के मौत भी होखल घटना बाटे । आजकल त विना झगडा वाला वियाह सुनल भी मुस्किल होगइल बा । समूचा खर्च के असुल करेके कारण से ही “दहेज” जइसन कुरिति हमनी के समाज मे प्रश्रय लेले बा । आ ई दहेज बडका महामारी के रुपमे हमनी के समाज मे फैल रहल बा ।

समय के साथ साथ लोग के काम मे ब्यस्थता भी बढ रहल बा । पहिले लोग अपने मन से विआह मे सहभागी होखे बाकिर अब लोग के उपस्थिति एक दुसरा के लेनीदेनी होगइल बा । बहुत लोग त दवाव के कारण से ही वियाह मे उपस्थित होखेला । अइसन दवाबमुलक सहभागिता के वियाह मे कवनो भुमिका भी ना होला, ऊ त खाली शक्ति प्रदर्शन करे के एगो माध्यम बन गइल बा । ई एकाइसवाँ शताब्दी मे भी शक्ति प्रदर्शन के कवनो औचित्य ना रह जाला काहे से की केहु कवनो से कमजोर नइखे ।

रात के कारण वियाह जइसन पवित्र पर्वमे दारु के सेवन, पैसा आ स्वास्थ्य के बर्बादी, झुठ आनसान देखावे के प्रवृति, अनावश्यक सहभागिता एवं खर्च तथा अनावश्यक विवाद आ बैवाहिक झमेला देखल गइल बा हमनी के समाज में । अगर यी विवाह दिनमे कइल जाए त सायद सहभागिता भी बहुत प्रमुख लोग के ही मात्र होखित । दिन भेईला के कारण से सुर्य के प्रकाशमे कवनो लोग दारु के सेवन भी ना करते । आ कवनो विवाद भी होखेके सम्भावना ना रहित । अनावश्यक खर्च मे भी सायद सुधार हो जाइत । दहेज जइसन कुरिति मे भी कुछ कमी आवे के सम्भावना हो जाइत । शास्त्रीय हिसाव से भी सुर्य ग्रह दायाँ भइल ब्यक्ति के चरित्र हमेशा उज्वल औरी खुशीमय होला त हमनी के विवाह जइसन पबित्र पर्व रात के अन्हार मे काहे ? शायद सुर्य के प्रकाश के साथ भइल बैवाहिक जीवन भी हरदम खुशमय औरी चम्कदार होखेके धार्मिक मान्यता बा ।

अन्तिम मे दिनमे होखेवाला वियाह के शुरुवात कहु कहु होगइल बा बाकिर एकदम कम जगह मे ही बाटे । ऐही से सम्पुर्ण मधेसी समाज मे दिन मे होखेवाला वियाह के भी स्वीकारल औरी लागु कइल अब अहम आवश्यकता हो गइल बा ।

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