विश्व कविता दिवस पर आनन्द के कविता “लुट लs”

125

विश्व कविता दिवस पर आनन्द के कविता “लुट लs”

 

 

काठमांडू चैत ७- आनन्द कुमार गुप्ता

आनन्द कुमार गुप्ता

विश्व कविता दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय राजदुतावास काठमाडौं द्वारा नेपाल-भारत पुस्तकालय काठमाडौं में बहुभाषिक कवि सम्मेलन “पोयमाण्डू” के आयोजना भइल रहे । जेमे अलग अलग भाषा के कवि लोग आपन आपन कविता सुनवले रहे । हमरों भोजपुरी कवि के रूप में आपन कविता प्रस्तुत करे के अवसर मिलल रहे जेमे हम कविता आ गजल सुनैले रहनी । आशा बा रउआ के पसन्द आई ।

हमार प्रस्तुत गजल आ कविता :

बड़का खुशी के तलाश में छोटकन के जरावत गइनी ।
जिनगी के तलाश में मौत के गरवा लगावत गइनी ।।

सफलता के पावे खातिर छुट गइल संबन्ध सारा पिछे ।
भीड़ में भी असगर के एहशास में लोर गिरावत गइनी ।।

ना आपन समेटाइल ना दुसरा के रंगे रंगा पाइल ।
अपना पहचान पर दोसरा के सँस्कृति ओढ़ावत गइनी ।।

भाग दौड़ में अझुराइल पलपल के जियल जिनगी इहाँ ।
जाने काथि पावे के आश में खुद के सतावत गइनी ।।

हार-जीत उँच-निच में कहाँ रह गइल जिनगी के ‘आनन्द’ ।
अन्तिम सत्य मउवत के भूलाई जिनगी जहर बनावत गइनी ।।

 

“लुट लs”

खादी के खाल बा
सरकारी माल बा
लुट सक त लुट लs
अगिला बेर जितलो मोहाल बा ॥

सत्ता के छोटे काल बा
सबके इहे चाल बा
लुट सक त लुट लs
अगिला बेर जितलो मोहाल बा ॥

राजनीति के बड़का जाल बा
झंझट भी त टाल बा
लुट सक त लुट लs
अगिला बेर जितलो मोहाल बा ॥

 

 

 

जबले सत्ता के ढाल बा
छुवे के केकरा मजाल बा                                लुट सक त लुट लs
अगिला बेर जितलो मोहाल बा ॥

अतरे दिने हड़ताल बा
महंगी से जनता बेहाल बा
लुट सक त लुट लs
अगिला बेर जितलो मोहाल बा ॥

विकास के केकरा खियाल बा
केतनन कमा के भइल लाल बा
लुट सक त लुट लs
अगिला बेर जितलो मोहाल बा ॥

सबसे बड़का ई जग में रोटी आ दाल बा
समय से केकरो छुपल ना हाल बा
दुनिया के रित के एगो कमाल बा
भ्रष्टाचारियन के अन्त में भइल हलाल बा ॥

advertisement

राउर टिप्पणी

राउर टिप्पणी लिखी
Please enter your name here