विश्व दृष्टान्त अा मधेश में भाषा ?

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आनन्द कुमार गुप्ता

हल जाला कि धर्म सबसे बेसि कट्टर होला, बाकिर यदि भाषिक नीति निमन से ना बनावल जाई त ऊ धर्म के भी सिवान नांघ सकता । भाषा ही के कारण विश्व में केतना देश के टुक्रा हो गइल ।

हमनी के परोसिया भारत आ पाकिस्तान के बटवारा के पिछे उपर से देखला पर भले धर्म होखो बाकिर भित्री बात लिपी रहे । हिन्दी आ उर्दु के बोलिचाली में खासे अन्तर नइखे, दूनू भाषा के मिला के एगो साझा भाषा के निमार्ण हो सकत रहे, बाकिर दूनू भाषि एक दोसरा के लिपी के ना स्विकार कइला के चल्ते भारत आ पाकिस्तान के विभाजन भइल ।

हमनी के दुसर परोसिया पहिले पूर्वी पाकिस्तान के नाम से परिचित भाषा के कारणा हि सन १९७२ में बंगलादेश के नाव से आजाद हो गइल । सोभियत संघ में भी शुरु–शुरु में बहुभाषिक अवधारणा अगाडी बढावल गइल, बाकिर व्यवहार में रुसी भाषा सम्पर्क भाषा होते हुवे भी दुसर भाषी के अनिवार्य रुसी भाषा सिखे के परे आ रुसी भाषी के औरी भाषा ना सिखे के परे जेकरा चल्ते दुसर भाषी अपने धर्ति पर अपने आप के विरान सम्झे लागल । सोभियत संघ के टुक्रा हाखे में उपर से भले अमेरिकी सम्राज्यवाद आ तत्कालिन सरकार के पुँजीवादी मानसिकता के जिम्मेवार मानलजाला, बाकिर भितर से देखला पर भाषिक–जातीय पहचान के ओरवावेवाला रुसी आन्तरिक उपनिवेशीक नीति भी ओतने जिम्मेवार रहे ।

सम्प‍ूर्ण मधेशी के मनाेवैज्ञानिक रुप में एक साथे जाेडे खातिर, मधेश के सभी भाषा सँस्कृति के सम्मान अा विकास के  प्राथमिकता मे राखत साध्य ना कि साधन के रुप में मधेश के हि भाषा सब से जन्मल हिन्दी भाषा के सम्पर्क भाषा के रुप में प्रयाेग करे में कवनाे बुराई नइखे

क्रोएसिया आ सर्विया दूनू मिलके यूगोस्लाभिया के जन्म भइल रहे आ दूनू देश के भाषा मिल के सर्बो–क्रोएसियाली भाषा के विकास भइल रहे, बाकिर व्यवहार में सर्बियाली राष्ट्रियता आ भाषिक पहचान के हमेशा प्रभुत्व में रहल आ ओकरे चल्ते क्रोएशियाली विद्रोह भइल आ फलस्वरुप युगोस्लाभिया के विगठन हो गइल आ उहँवा क्रोएशियाली, सर्बियाली आ बोस्नियाली भाषा अस्तित्व में बा ।

विगत के दिन में चेक आ स्लोभाक मिल के चेकोस्लोभाकिया के जनम भइल रहे । भाषिक हिसाब से राज्य के सञ्चार माध्यम में दूनू भाषा के प्रयोग होखे, बाकिर विदेशी फिल्म आ औरी सामग्रीसब खाली चेक भाषा में हि अनुवाद होखे । सन १९९० के दशक ओर अचानक चेक गणराज्य के संचार माध्यम स्लोभाक भाषा के प्रयोग कइल छोड देलक, फलस्वरुप सन १९९३ में बिना कवनो बल प्रयोग कइले दूनू देश स्वतन्त्र हो गइल ।

अफगानिस्तान के ओर देखल जाए त उहँवा दारी आ पास्तो दूनू भाषा सरकारी कामकाज के भाषा आ औरी भाषासब भौगोलिक क्षेत्र में शिक्षा आ सरकारी कामकाज के भाषा प्रयोग में बा । इन्डोनेसिया में ७०० से भी बेसी भाषा अस्तित्व में बा ओहिसे सरकारी कामकाज के खातिर सब भाषा के मिलाके बहासा इन्डोनेसिया भाषा के निमार्ण कइल गइल बा तेपर भी औरी सब भाषा में प्राथमिक शिक्षा देवे के संवैधानिक नियम बा । पपुआ न्यू गिनीया में ८०० से भी बेसि भाषा बा आ उहँवा अंग्रेजी मिलावल क्रिओल के रुप में रहल पिसिन आ हिरी मोतु सरकारी कामकाज के भाषा ह आ आधा से बेसि भाषा में औपचारिक आ अनौपचारिक शिक्षा दियाला । स्जिरल्याण्ड में त परोसिया देश के भाषा जर्मन, फ्रेञ्च, आ इटालियाली राष्ट्रभाषा आ सरकारी कामकाज के भाषा आ राष्ट्र भाषा के रुप में स्थापित बा ।

नेपाल के राज्य पुनःसंरचना के सन्दर्भ में हमनी के भी सकारात्मक आ नाकारात्मक अन्तराष्ट्रिय उद्हारण आ अनुभव से सिखे के चाहिं आ भाषिक नीति बनावे के बेर में लागु करे के चाहिं, ना त ओहिसनके नियती भोगे के पडी जइसन भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश, रुस, युगोस्लाभिया, चेकोस्लाभिया लगायत औरी देशन में भोगे पडल आ विखण्डित होखे के पडल ।

मधेश के सवाल राष्ट्रिय उत्पीडन के सवाल ह ना कि खाली साँस्कृतिक अा भाषिक । गाेर्खाली सम्राज्य से यदी भाेजपुरी, मैथिली, अवधी, थारु, उर्दु, ताजपुरिया लगायत के हमनी के भाषा सँस्कृति के बचावे के बा त सब से पहिले गाेर्खाली सम्राज्य के विरूद्ध एगाे मजबुत प्रतिराेधक शक्ति के निर्माण करे के पडी जवन क्षमता समग्र मधेश लगे ही बा, बाकिर जब लेक सम्प‍ूर्ण मधेशी मनाेवैज्ञानिक रुप में एकजुट ना हाेई तब लेक राष्ट्रिय उत्पीडन से मुक्ति महज एगाे सपना ही रही।

मधेश के सभी भाषा, सँस्कृति के गाेर्खाली सम्राज्य से जाेगावे खातिर, एगाे मजबुत प्रतिराेधक शक्ति के निर्माण करे खातिर, सम्प‍ूर्ण मधेशी के मनाेवैज्ञानिक रुप में एक साथे जाेडे खातिर, मधेश के सभी भाषा सँस्कृति के सम्मान अा विकास के  प्राथमिकता मे राखत साध्य ना कि साधन के रुप में मधेश के हि भाषा सब से जन्मल हिन्दी भाषा के सम्पर्क भाषा के रुप में प्रयाेग करे में कवनाे बुराई नइखे अा अाज के मधेश के अावश्यक्ता भी इहे बा ।

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