वीरगंज के एतिहासिक धरोहर के मटियामेट करत वीरगंज महानगरपालिका

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    प्रवेशद्वार पार्क मे बदलल के तस्वीर
    प्रवेशद्वार पार्क मे बदलल के तस्वीर

    वीरगंज, ०२ जेठ ।

    आधुनिकता के नाम पर वीरगंज के एतिहासिक धरोहर के मटियामेट कर रहल बा वीरगंज महानगरपालिका । एकर जीयते उदाहरण बा नेपाल के प्रमुख प्रवेशद्वार के प्रसिद्धि पईले वीरगंज के प्रवेशद्वार ‘शंकराचार्य प्रवेशद्वार’ ।

    नेपाल मे प्रमुख प्रवेशद्वार के रूप मे रहल वीरगंज के ‘शंकराचार्य प्रवेशद्वार’ आधुनिकता के नाम पर वीरगंज महानगरपालिका सेल्फी पॉइंट के साथ साथे पार्क बना के रख देहले बा ।

    भारत से नेपाल प्रवेश करे खातिर रक्सौल आ वीरगंज के सिवान के प्रमुखद्वार के रूप पे रहल वीरगंज ‘शंकराचार्य प्रवेशद्वार’ भारत से नेपाल खातिर सरसामान आयात निर्यात करे के देश के ही सबसे बाडका प्रवेशद्वार ह माकिर अभी वीरगंज के ‘शंकराचार्य प्रवेशद्वार’ के स्थिति देखला से प्रवेश द्वार के चारु तरफ से घेर के पार्क मे बदल देहल गईल बा । प्रवेशद्वार के उपर एगो डिजिटल लाइट भी लटका देहल गईल बा जवन कुछ दिन त बढ़िया काम कईलख माकिर अभी उ भी बिगड़ल स्थिति मे बा जेकर खोज खबर करेवाला कोई नईखे ।

    पार्क मे एकरा आलवा नेपाल के झण्डा भी खड़िया देहल गइल जवन दिन आ रात भर उड़त धुरा आ गर्दा के कारण नेपाल के झण्डा ह कह के पहिचानल भी कठिन होला । प्रवेशद्वार के पार्क आ सेल्फी पॉइंट मे बदले के चक्कर मे वीरगंज महानगरपालिका के पहिले के प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत डा. भीष्मकुमार भूसाल, वीरगंज महानगर के नगर प्रमुख विजय कुमार सरावगी आ नेपाल भरात सहयोग मञ्च के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक वैध के संयुक्त सहयोग मे ३ लाख २१ हजार बराबर मोल के पञ्चमुखी शिवलिङ्ग शालीमार होम्स प्रालि के सहयोग स्वरूप स्थापना कर देहल गईल । एकरा अलावा पानी के फुहारा फेकेवाला एगो फाउंटेन भी लगावल गईल । नेपाल के ही प्रमुख प्रवेशद्वार के रूप मे पहिचान स्थापित कईले वीरगंज के ‘शंकराचार्य प्रवेशद्वार’ पर स्थापित पञ्चमुखी शिवलिङ्ग दिन रात उड़त धुरा आ गर्दा के कारण बड़ी कठिनाई से ही पहिचान करे सकल जाला ।

    वीरगंज के एतिहासिक धरोहर मे से ‘शंकराचार्य प्रवेशद्वार’ भी एगो प्रमुख आ प्रसिद्ध एतिहासिक धरोहर ह । एतिहासिक धरोहर के सुरक्षा आ संरक्षण करे के जिम्मेवारी स्थानीय सरकार के होखेला । माकिर वीरगंज महानगरपालिका वीरगंज के एतिहासिक धरोहर ‘शंकराचार्य प्रवेशद्वार’ के संरक्षण करे के जगह वजेट गालावे के चक्कर मे आधुनिकता के नाम दे के एतिहासिक धरोहर के मटियामेट कर रहल देखल गईल ।

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