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वैदेशिक रोजगार के नाफा नोक्सान

शिव सन्देश

 

विश्वब्यापिकरण के आधुनिक दौड में संसार बहुते छोट होते जा रहल बा । एक जगह के आदमी दोसारा जगह पर पहुँचल बहुते सहज होगइल बा । ऐही परिवर्तन के बहाव के ब्यापक प्रभाव, हमनी के देश पर भी पड़ रहल बा । देश के बहुसंख्यक जनता सब अपन घरपरिवार, गाँव समाज, देश के छोड के, दोसरा देश में जीनगी जी रहल बा । का ई परिवर्तनशील जरुरी बा रहे ? वैदेशिक रोजगार के नाफा नोक्सान कुछ अइसन बा ।

वैदेशिक रोजगार के नाफा

  •  वैदेशिक मुद्रा के आर्जनः

वैदेशिक रोजगार के माध्यम वैदेशिक मुद्रा आर्जन करेके बहुत लमहर एगो साधन बा । आयात से निर्यात कम होखेवाला मुलुक में वैदेशिक रोजगार के माध्यम से वैदेशिक मुद्रा के आपुर्ति कइल जाला । अगर वैदेशिक मुद्रा आर्जन ना भइला पर महँगा दर में वैदेशिक मुद्रा खरिद करके वैदेशिक समान आयात कइल देश के बाध्यता बन जाला । नेपाल देश मेंं वैदेशिक रोजगार भइला के कारण से अन्तराष्ट्रिय ब्यापार में सहयोग हो रहल देखल गइल बा ।

  • वैदेशिक सीप के आर्जनः

अनेकन देश में विभिन्न पेशा स्वरुप निर्यात भइल जनता के वैदेशिक कला एवं सीप सिखे के एगो निमन सम्भावना रहले । ऊ सीप एवँ कला देश विकास के खातिर बहुत महत्वपुर्ण साबित होखे के भी सम्भावना रहले । विश्व इतिहास मेंं जापान आज अइसन समृद्घ होखे में कुछ अइसने उल्लेख बा । एक समय में जापान के लोग समग्र विश्व में फैल के सम्पुर्ण विश्वभर से नयाँ नयाँ सोच, तकनीकि, सीप तथा कला सिखके आइल रहे आ जापान के समृद्घ बनवले बा । आज के जापान निर्माण होखे में ऊ समय में निर्यात कइल गइल लोग के बहुत बडका योगदान बा । जापान में आदमी के निर्यात होके नयाँ नयाँ सोच, तकनिकि तथा सीप के बहुत आयात भइल रहे । ओही से जापान दुसरका विश्वयुद्घ के द्वारा भइल नोक्सानी, विभिन्न तरह के प्राकृतिक प्रकोप के बाबजुद भी एतना सम्पन्न रहल देश हमनी के अगाडी बा ।

  •  समतामुलक समाज में सहायकः

सब दिन गावँ में गरिवी के दलदल में दवाई गरिव सभे वैदेशिक रोजगार के कारण से आर्थिक अवस्था सबल हो रहल बा । कहल बा पैसा भइला पर आदमी के बोलियो बदल जाला । गाँव के महाहज आजु निर्बल आ कमजोर देखल जा रहल बा । बाहर से त ऊ तामझाम आ शान शौकत देखाई दे रहल बा बाकिर ऊ लोग के एगो अदृष्य गरिवी में जि रहल बा । खेत त बा बाँकिर ऊ खेतमें उब्जावे खातिर कवनो मजदुर नइखे, सिंचाई आ पानी नइखे, रसायनिक मल तथा दवाई के अभाव बा । बहुत मुस्किल से अगर खेत में अन्न उब्जा ले रहल बा त उचित बजार एवं मुल्य के अभाव बा । कुल मिला के गाँव के महाजन लोग के अर्थिक स्तर निचे हो रहल बा आ गरिब लोग के आर्थिक स्तर उपर उठ रहल बा । जवन कि समतामुलक समाज निर्माण होखे के एगो संकेत बा ।

  •  चेतना में परिवर्तनः

वैदेशिक रोजगार के माध्यम से समग्र समाज में कुछ चेतना में भी अभिबृद्धि हो रहल बा । निरक्षर तथा अल्पअक्षर आदमी लोग भी, परिवर्तन हो रहल प्रविधि, जइसे मोबाइल, इन्टरनेट, रेडिया, टिःभी जइसन उपकरण के प्रयोग कर में सक्षम देखल जा रहल बा । यी उपकरण के माध्यम से समय में परिवर्तन के स्वीकार कर रहल भी मानल जा सकत बा । आर्थिक अवस्था त कुछ मजबुत होइए रहल बा बाकिर बौद्धिक चेतना भी विकाश हो रहल बा । यी रोजगार से संस्कार के समिश्रण होजाला ।

  •  असमाजिक गतिविधिमें कमीः

वैदेशिक रोजगारी के माध्यम से गावँ घर के चोर, बदमास, लबरा, लुच्चा सभे बिदेश में गइला से गाँव घरके चोरी, डकैती, बदमासी में कुछ कमी आइल देखल जइल बा । ऐकर प्रमुख कारण बा ओकनी के आर्थिक अवस्था में बृद्धि एवं काम में ब्यस्थता । जवन कि वैदेशिक रोजगार के माध्यम से प्राप्त भइल बा ।

  •  न्याँ प्रविधि के प्रयोगः

देश के बहुसंख्यक जनता विदेश में गइला से देश के सम्पुर्ण क्षेत्रमें ब्यापक कामदार के अभाव होगइल बा । जवना के कारण से सम्पुर्ण क्षेत्रमें न्याँ न्याँ स्वचालित प्रविधि के प्रयोग कइल बाध्यता बन गइल बा । जइसे कि कलकरखाना सव पहिले मजदुर पर आश्रित रहत रहे, अव वहुतो काम में डिजिटल स्वचालित मेंशिन सव प्रयोग हो रहल बा । खेतीबारी में पहिले खाली मजदुर ही काम करत रहे बाकिर अब रंगविरंग के खेत में प्रयोग होखेवाला मेंशिन के प्रयोग कइल बाध्यता बन गइल बा ।

वैदेशिक रोजगार के नोक्सान

  •  अभिमानरहित जीवनः

विश्व के अधिकाँश मुलुक अपन उत्पादित समान सव निर्यात करके अपन देश सम्पन्न बनावे में लागल रहले । बाकिर हमनी के देश नेपालके प्रमुख निर्यात खाली आदमी मात्र देखल गइल बा । आदमी के निर्यात करके विदेशी पैसा जम्मा करे के काम हो रहल बा समग्र नेपाल में । विदेश में जाके एकदमें न्युन स्तर के काम कर रहल बा । आदमी के अपन अस्तित्तव तथा सम्मान के भुलाके गैर मुलुक में काम कर रहल बा । उहवाँ के लोग के ना करेके चाहेवाला काम हमनी के नेपाली ऊ मुलुक में जाके काम करले । जहँवा हर पल में ओकरा अपमान के सामना करे के पड़ेला ।

  •  जोखिमयुक्त जीवनः

गरिबी के दवाई गरिब लोग वैदेशिक रोजगार के चक्कर में बहुत बेरिया ठगाइल भी बास्तविकता हमनी के अगाडी बा । सरकारद्वारा वैदेशिक ऋण से उचित प्रवन्ध नभइला के कारण से स्थानीय महाजन के ब्याज से ठगाइल, विदेश पेठावेवाला एजेन्ट से ठगाइल, विदेश में जाके कम्पनी से ठगाइल लगायत के बहुतो जोखिमयुक्त प्रक्रिया से सामना करे के पड़ल ले वैदेशिक कामदार के । ऊ देश के न्युन स्तर के जोखिमयुक्त काम करे के बाध्यत्मक अवस्था भी सामना करे के पड़ले वैदेशिक कामदार के ।

  •  बेडोर सन्ततिः

घर—परिवार के आदमी विदेश चलगइल बा ओकर घरपरिवार प्रति देखे के लोग के नजरिया बहुत फरक हो जाले । ओकरा घरके बालबच्चा, ओकर पत्नी के उचित रेखदेश ना भेला से विगडे के प्रवल सम्भावना रहले । जवना के घर के गारजियन विदेश चलगइल बा ओ घरके बालबच्चा बहुत ज्यादा विगडल नमुना भी हमनी के समाज में मौजुद बा । जवना पिढी खातिर ऊ कमाए गइल बा उहे पिढी ओकरा लायक ना बन रहल बा आजकल । एही के लइकन के छाडापन दिन प्रतिदिन बढते जा रहल बा । गाउँघरके स्कुल में कवनो विद्यार्थी पढे के मानसिकता में नइखे आजकल । जवन हमनी के परिक्षा के परिणाम तथा स्कुल के गतिविधि भी देखा रहल बा ।

  •  परिवारिक कलहः

विदेश में गइल आदमी के घरके औरत के अवस्था देखल जाव जवन एकदमें असहनीय बा । केहु लोग ओकरा के निमन नजर से ना देखले । स्वभाविक बात बा ही स्त्री पुरुष एक दुसरा के साथ से ही चले बाला प्राणी बा । दुनु के माया तथा प्रेम से ही एगो असल परिवार के परिकल्पना कइल जा सकत बा । विज्ञान के अनुसार सम्भोग स्त्री पुरुष के एगो अति आवश्यक भोजन समान बा । जवना के अभाव के ओकनी के मानसिक संतुलन भी ठीक ना होसकत बा । अइसन अवस्था में पुरुष के विदेश गइला से गावँ में रहल स्त्री के अति आवश्यक भोजन ना मिलले । जवना के कारण से गावँघर में विभिन्न तरह के हल्ला बवाल जइसन घटना सुने के मिलले । ऊ स्त्री के मानसिक संतुलन के कमी से ओकनी के सास ससुर से झगडा लगायत के आउरो प्रतिकृया भी हमनी के सुनेके मिलले । यी समस्या लगभग हरेक गाउँ के बहुसँख्यक परिवार में देखेके तथा सुने के मिलले ।

हमनी के देश में भी अवसर के कवनो कमी नइखे । कमी बा त साकारात्मक सोचवाला लोग के । जवन लोग हमनी के देशमें कवनो निम्न स्तर के काम करे में हिच्चकिचात रहले । उहे लोग विदेश में एकदमें न्युन स्त्तर के काम करे में बाध्य हो जाले । जहवाँ ओकर मानवता, आत्मसम्मान बारबार लज्जित होखेके अवस्था रहले । बहुतो लोग त एजेन्ट द्वारा ठगाएला के कारण से अलपत्र होके ओकर धनजन के भी छति बेहोरे के पड़ जाले । हमनी के समाज में दरिद्र मानसिकता के कमी कारण से शायद अइसन दोसरा के मुलुक में जाके काम करे के अवस्था आ गइल बा । आ ई दरिद्र मानसिकता के प्रमुख कारण बा शिक्षा के कमी । आ ई शिक्षा के कमी के प्रमुख कारण बा हमनी समाज के सभे लोग लगे कुछ कुछ खेतवारी के उपलब्धता । ई खेतवारी के उपलब्धता के कारण से इहाँ के लोग खेतबारी में अझुराके आगे ना बढे सकल । कुछ कुछ खाए के मिलिए जाए ओही के कवनो लोग सघर्ष ना कइलक । कहलजाला कि “ भुखाएल बाघ ही शिकार के खोजी करेला” । ओसही अगर हमनी लगे अगर यी खेतबारी ना रहइत इहाँ के लोग भी जरुर सघर्ष करइत आ आजु सम्पन्न रहइत ।

दुनिया के हरेक चीज के नाफा नोक्सान होला । बाकिर सब लोग के चाहना नाफा करेके ही होला बाकिर नाफा के चाह में कभी घाटा से सामना भी करेके पड़ेला । अगर हमनी के मन में विदेश जाके आत्म निर्भर होखेके मानसिकता बनजाई ओह दिन से हमनी के समान के तथा हमनी के समग्र देश के उन्नति के ओर लाग जाई ।

प्रतिकृया
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