सच्चाई बिरगंजिया पत्रकारिता के …. (बिबरण एक घटना के )

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बीरगंज, नेपाल ।

अशोक कुशवाहा

कौनो भी देश काहे ना होखे उ देश के पत्रकार संघतिया(साथी) लोग के उच्च कोटि के स्थान देहल जाला हमनी के नेपाल के भी ईहे संस्कृति औरी रीतिरिवाज ह ।।

काठमांडू के एगो होटल में हमरा एगो बीरगंज के पत्रकार जी से मुकालात हो गईल । उहा से बर्तालाप कईला से हमारा जानकारी भईल की १० बारिस परदेशी भईला से देश में केतना बदलाव भईल बा । पत्रकार जी हमरा के बर्तालाप से बढ़िया से सम्झावनी की जनता जंगल के जानवर होले औरी पत्रकार शेर ।


बीरगंज के पत्रकारिता पर मन में बहुत प्रश्न उठल । केतना पत्रकार लोग ता एसएलसी भी नइखे कईले लोग । बिना कौनो ट्रेनिंग के पत्रकारिता में लागल लोग लगे शभ्य बोली, शहनशीलता, ब्यवहार करे के तरीका सब के कमी देखल गईल । पत्रकार के परिचय पत्र कौनो पत्रिका के कार्यालय से का मिल गईल नेपाल के बरिष्ट पत्रकार लोग तक के अपशब्द बोले से ना चुके ला लोग । तानाशाही बोली जईसे लाइसेंस ही मिल गईल बा ।


वोईसे त बदलाव दुनिया के नियम ह औरी होखे के भी चाही । हम कुछ काम से गलती से उहे होटल में रुकल रहनी जाहा हमनी के बीरगंज के कुछ नामी गिनल चुनल नेता जी लोग औरी ऊ पत्रकार संघतिया लोग भी ठहरल रहे । देहात के भईला से दाढ़ी मोछ बढ़ल हमनी ला साधारण बात ह औरी दाढ़ी मोछ काम के ब्यस्तता में कब बढ़ गईल रहे पते ना चलल । हमनी के दू जाने संघतिया (साथी ) रहनी सन दुनु के दाढ़ी मोछ एके सामान बढ़ल रहे । हमनी के मुखौटा के रूप सायद कौनो नेता जी के पसंद ना आइल औरी नेता जी एगो आपना पत्रकार संघतिया के हमनी के खोज खबर लेवे के पीछे लगा देहलन । पत्रकार जी लोग साचो बड़ा चलाख होखे ला लोग । पत्रकार जी होटल के रिसेप्सन से हमर दूरभाष नम्बर लेके जल्दी जल्दी दूरभाष कैनी । शुरू में पत्रकार जी हमर नाम औरी काम पूछनी हम जबाब में उहा से भेट करे उहे के कोठरी में गईनी । पत्रकार जी के हाथ जोड़ के प्रणाम कईनी औरी आपन नाम औरी काम दुनु बाता दिहनी । पत्रकार जी फटाफट नेता जी के दूरभाष कईनी औरी कोठरी के बाहर जा के नेता जी के हमर सारा कुंडली बतावे लगनी ऊ भी हमरा के सूना के ही । हम पत्रकार जी से पूछनी हमर नम्बर राउवा के के देहल ह । काहे हमर कुंडली रउवा दोसरा के बतावतानी । पत्रकार जी के हमर प्रश्न बढ़िया ना लागल औरी सभे पत्रकार लोग कहे लागल लोग की हमनी के समाचार के श्रोत ना बतावे के । अईसन सायद ऊहा लोग के नारद भगवान् से बरदान प्राप्त भईल होखे काहे की देबी देवता के जूग के पहिलका पत्रकारिता के सामान नारद जी के ही प्राप्त बा ।पत्रकार जी लोग से बिदा लेके हम अपना कोठरी में अईनी ।


हम पूछनी पत्रकार जी यी बताई नेपाल के सन्दर्भ में पत्रकारीता कईसन नोकरी ह। पत्रकार जी जबाब देहनी की बहुत बेकार । त हम फेरु पूछनी जब बेकार ह त रउवा काहे करतानी । जबाब में पत्रकार जी खिसियाते हमरा के अंग्रेजी नेपाली भोजपुरी सारा भाषा में नेपाल के सारा पार्टी के सदस्य भी बाना देहनी औरी बर बाकि अंतिम में गुन्डा भी घुमके कह दिहनी ।


हमरा भी आपना दाढ़ी मोछ पर बड़ा फक्र भईल यी सोच के की हमरा दाढ़ी मोछ के करते हमरा के नेता पत्रकार जी लोग ध्यान देता लोग । पत्रकार जी से यी सम्बन्ध में पूछे खतिरा बड़ा मन में लालसा जगल । हम पत्रकार जी के दूरभाष पर अपना कोठरी में बोलवनी । दू गो पत्रकार संघतिया लोग हमरा कोठरी में आईनी लोग । हम पूछनी पत्रकार जी यी बताई नेपाल के सन्दर्भ में पत्रकारीता कईसन नोकरी ह । पत्रकार जी जबाब देहनी की बहुत बेकार । त हम फेरु पूछनी जब बेकार ह त रउवा काहे करतानी । जबाब में पत्रकार जी खिसियाते हमरा के अंग्रेजी नेपाली भोजपुरी सारा भाषा में नेपाल के सारा पार्टी के सदस्य भी बाना देहनी औरी बर बाकि अंतिम में गुन्डा भी घुम के कह दिहनी । हमरा दुःख एह बात के भईल की पत्रकार जैसन सामानित पद पर काम करे वाला आदमी के लगे सहनशीलता नाम के शब्द के “ श ” भी देखे के ना मिलल ।

ओकरा बाद बीरगंज के पत्रकारिता पर मन में बहुत प्रश्न उठल । कुछ पत्रकार लोग से भेट कर के ऊ लोग से कुछ प्रश्न भी पूछनी पर मन के संतोष ना भईल । केतना पत्रकार लोग ता एसएलसी भी नइखे कईले लोग । बहुत कम मिली लोग जे पत्रकारिता बिसय लेके पढ़ल होखे । बिना कौनो ट्रेनिंग के पत्रकारिता में लागल लोग लगे शभ्य बोली, शहनशीलता, ब्यवहार करे के तरीका सब के कमी देखल गईल । पत्रकार के परिचय पत्र कौनो पत्रिका के कार्यालय से का मिल गईल नेपाल के बरिष्ट पत्रकार लोग तक के अपशब्द बोले से ना चुके ला लोग । तानाशाही बोली जईसे लाइसेंस ही मिल गईल बा ।

नेपाल पत्रकार महासंघ के सभे महोदय लोग से हम एगो गाव के साधारण जनता से अनुरोध बा की पत्रकारिता के स्वच्छ पेशा बनाई लगन औरी कुछो ना त कमती में सभी पत्रकार भाई लोग के पत्रकारिता सम्बन्धी ट्रेनिंग, ब्याक्तिव बिकाश के ट्रेनिंग भी देहल करी ।

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